लापरवाही ने निगम का खजाना किया खाली प्रचार एजेंसियों से करोड़ों वसूलने में नाकाम

प्रचार एजेंसियों पर बकाया है 52 करोड़, अफसरों की मिलीभगत से नहीं हो पा रही वसूली
नोटिस-नोटिस का खेल खेल रहा निगम प्रशासन अवैध प्रचार करने वाली एजेंसियों पर भी मेहरबानी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। नगर निगम की खराब आर्थिक स्थिति का जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि विभाग के अफसर हैं। विभिन्न मदों में होने वाली करोड़ों के राजस्व वसूली को लेकर निगम पूरी तरह लापरवाह दिखाई पड़ रहा है। करोड़ों का बकाया होने के बावजूद वसूली नहीं की जा रही है। यह हाल तब है जब छह महीने से लगतार विभाग की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। यही नहीं विभाग पर कर्मचारियों, ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं की करोड़ों की देनदारी भी है। निगम का खजाना खाली हो जाने के चलते विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वसूली को लेकर निगम के प्रचार विभाग की कार्रवाई पर नजर डाले तो आंकड़े चौकाने वाले हैं।
नगर निगम के प्रचार विभाग में 110 से अधिक प्रचार एजेंसियां पंजीकृत है। इन पर नगर निगम का 52 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है। हालांकि अफसरों का कहना है कि एजेंसियों को टैक्स में 25 प्रतिशत की छूट दी जाती हैं। वहीं तमाम एजेंसियां ऐसी भी हैं जिनको विभाग में पंजीकृत किया गया है और उन्होंने शहर में धड़ल्ले से वैध व अवैध प्रचार किया है लेकिन जब मामला टैक्स जमा करने का आया तो कई कंपनियां रफूचक्कर हो गईं। इन सभी प्रचार एजेंसियों से नगर निगम वसूली नहीं कर पा रहा है। दूसरी ओर जिम्मेदार अफसर एजेंसियों को नोटिस भेज कर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
हाल यह है कि आज भी करोड़ों की वसूली निगम की फाइलों में कैद है। जिसको अफसर-कर्मचारियों की मिलीभगत से छुपा लिया गया है। सांठ-गांठ के जरिये इन एजेंसियों का नाम भी वसूली की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। विभाग में ऐसी कई प्रचार एजेंसियां हैं, जिन्होंने करोड़ों की डिमांड को दबाने के लिए पुरानी एजेंसियां बंद कर दी है और निगम में दूसरे नाम से एजेंसी पंजीकृत कर ली हैं। लिहाजा निगम को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। लंबे समय से निगम के अफसरों ने प्रचार एजेंसियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। कहीं न कहीं इसके पीछे निगम के शीर्ष पदों पर बैठे अफसरों की सुस्त कार्यप्रणाली जिम्मेदार है।

विभिन्न प्रचार मदों में बकाया टैक्स

=होर्डिंग – 3,55,78,099
=बस शेल्टर – 4,44,27,097
=ट्री गार्ड – 2,71,37,536
=ट्रैफिक सिग्नल – 18,31,813
=निजी होर्डिंग और यूनीपोल-41,14,52,306

केस एक
अवैध प्रचार करने वाली प्रचार एजेंसी गौरी इंटरप्राइजेज की बात करें तो पिछले साल इस प्रचार एजेंसी ने नगर निगम के अफसरों से सांठ-गांठ कर खूब अवैध प्रचार किया और नगर निगम को करोड़ों की चपत लगाई। अब नगर निगम के अफसर-कर्मचारी इस प्रचार एजेंसी से क्षतिपूर्ति की वसूली करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। एजेंसी का रसूख इतना ज्यादा है कि विभाग के अफसर एजेंसी के 11 यूनीपोल को हटाने के लिए विभागीय खर्चे का सहारा लेने की तैयारी में हैं। वहीं अन्य प्रचार एजेंसियों के प्रचार को हटा कर एजेंसी को क्षतिपूर्ति भेजी जाती है। नगर निगम की वित्तीय स्थिति खराब है। हालात यह हैं कि इस प्रचार एजेंसी के 11 यूनीपोल को हटाने के लिए वित्तीय स्वीकृत के लिए एक फाइल निगम के लेखा विभाग में पड़ी है। प्रचार विभाग से यह फाइल दो महीने पहले चली थी और आज तक लेखा विभाग में पड़ी है। उधर, प्रचार एजेंसी लगातार अवैध प्रचार कर रही है। अफसरों का कहना है कि पिछले साल इस प्रचार एजेंसी से आठ लाख की वसूली हुई थी जबकि 12 लाख की डिमांड भेजी गई थी। इस एजेंसी के सभी यूनीपोल को हटाने का खर्च 38,500 रूपये आ रहा है।

कुछ साल पहले इन एंड आउट नाम से एक प्रचार एजेंसी नगर निगम में पंजीकृत हुई थी। इस एजेंसी ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में एक साल के लिए नगर निगम के पॉलीटेक्निक, चारबाग व आलमाबाग फुट ओवर ब्रिज पर विज्ञापन लगाने का ठेका 47 लाख रुपये में लिया था। एजेंसी के मालिक और नगर निगम के एक अधिशासी अभियंता के बीच अच्छी जान पहचान थी, जिसके बाद वित्तीय वर्ष 2015-16 में तीनों ही फुटओवर ब्रिज का टेंडर नहीं कराया गया। इस काम में भ्रष्ट अधिशासी अभियंता ने तीनों ओवर ब्रिज की फाइल दबा दी और प्रचार एजेंसी ने बिना टैक्स दिये धड़ल्ले से प्रचार किया और लाखों का खेल किया। हालांकि छह माह बाद मामला खुला तो तत्कालीन अफसरों ने एजेंसी का प्रचार हटाया और खाता सील कर दिया, जिसके बाद दूसरी एजेंसी को टेंडर दिया गया। इस बीच नगर निगम को जो वित्तीय क्षति पहुंची उसकी वसूली आज तक उक्त एजेंसी से नहीं की गई। कुल मिलाकर इस प्रचार एजेंसी ने निगम को खूब चूना लगाया।

सभी प्रचार एजेंसियों से वसूली का प्रयास किया जा रहा है, जो प्रचार एजेंसियां टैक्स नहीं जमा कर रही हैं। उनका प्रचार हटवाया जा रहा है। इससे वसूली हो रही है। जिन प्रचार एजेंसियों ने निगम में टैक्स जमा नहीं किया है और बन्द हो गई हैं उनकी आरसी काट कर जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। जिसके बाद उनसे व्यक्तिगत वसूली की जाती है। पिछले साल कई लोगों की आरसी काटी गई थी। इस साल भी काटी जाएगी।
-अशोक सिंह, प्रचार प्रभारी,नगर निगम

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