कब थमेगा रेल हादसों का सिलसिला

सवाल यह है कि आखिर कब तक रेल हादसे लोगों की जान लेते रहेंगे? क्या रेल यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? लगातार हो रहे रेल हादसों से क्या सरकार कोई सबक लेगी? क्या केवल यात्रियों से पैसा वसूलना भर रेलवे का कारोबार बन चुका है? क्या बाबा आदम के जमाने की तकनीकी पर चल रही रेल का कायाकल्प किया जाएगा?

sajnaysharmaपुरी से हरिद्वार की ओर जा रही उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर के खतौली में हादसा ग्रस्त हो गई। इस हादसे में 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। दुर्घटना में करीब तीस लोगों की मौत हो गई जबकि डेढ़ सौ से अधिक घायल हो गए। घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है। रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने दुर्घटना की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का भी ऐलान किया है। इन सबके बीच अहम सवाल यह है कि आखिर कब तक रेल हादसे लोगों की जान लेते रहेंगे? क्या रेल यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? लगातार हो रहे रेल हादसों से क्या सरकार कोई सबक लेगी? क्या केवल यात्रियों से पैसा वसूलना भर रेलवे का कारोबार बन चुका है? क्या बाबा आदम के जमाने की तकनीकी पर चल रही रेल का कायाकल्प किया जाएगा? आखिर कब तक सरकार मुआवजा देकर इन हादसों से पल्ला झाड़ती रहेगी? क्या सरकार की नजर में लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है?
देश में रेल दुर्र्घटनाएं अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई हैं। इसमें साल-दर-साल इजाफा हो रहा है। इन हादसों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। तमाम लोग अपाहिज हो चुके हैं। करोड़ों रुपये की रेल संपत्ति का नुकसान हो चुका है। बावजूद इसके हादसों में नियंत्रण लगाने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस पहल होती नहीं दिख रही है। उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना की असली वजह जांच के बाद सामने आएगी लेकिन प्रथम दृष्टया इसे रेलवे की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। बताया जा रहा है जहां हादसा हुआ वहां रेलवे ट्रैक पर मरम्मत का काम चल रहा था। यहां धीमी गति से ट्रेन चलाने के आदेश थे। लेकिन सिग्नल की गड़बड़ी के कारण चालक को कॉशन की जानकारी नहीं मिली और तेज रफ्तार ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। सवाल यह है कि ऐसे मौकों पर रेल मंत्रालय कोई फूल प्रूफ व्यवस्था क्यों नहीं करता है? रेलवे में सुधार की सिफारिशों की फाइलें धूल फांक रही हैं। आज भी तमाम रेलवे क्रासिंग में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। मानव रहित रेलवे लाइनों पर अक्सर दुर्घटनाएं होती है। सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द रेलवे की व्यवस्था में आमूल परिवर्तन करे। रेल संचार को तकनीकी रूप से अपडेट किए बिना तेज रफ्तार ट्रेनों को सुरक्षित रूप से संचालित नहीं किया जा सकता। यदि यही स्थिति रही तो बुलेट ट्रेन चलाना सपना ही बना रहेगा। साथ ही यात्री भी रेल यात्रा करने से कतराने लगेंगे। इसका सीधा असर देश के खजाने और विकास पर पड़ेगा।

Pin It