सुविधाओं के नाम पर छात्रों को चूना लगा रहा लखनऊ विश्वविद्यालय

छात्र संघ और बीमा समेत कई मदों में लिया जा रहा है पैसा
हर साल छात्रों से होती है लाखों की उगाही
शिकायतों के बाद भी विवि प्रशासन के कान पर नहीं रेंगती जूं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन सुविधाएं देने के नाम पर छात्रों से मोटी फीस वसूल रहा है, लेकिन पैसा देने के बावजूद उन्हें तमाम सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। छात्रों ने इस मामले में कई बार शिकायत की लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन सुविधाओं को बढ़ाने के नाम पर बजट का रोना रोता है।
विश्वविद्यालय हर साल छात्रों से मेडिकल इंश्योरेंस, गेम्स, डेलीगेसी, गरीब छात्रों की सहायता के लिए फीस समेत कई तरह की फीस वसूलता है। फीस लेने के बाद भी विश्वविद्यालय छात्रों को सुविधाएं नहीं मुहैया कराता है। एलयू मेडिकल रिलीफ फंड के नाम पर हर छात्र से सालाना 200 रुपये लेता है। यहां करीब 20 हजार छात्र हैं। इस तरह हर साल करीब 40 लाख रुपये विश्वविद्यालय एकत्र करता है। बावजूद आज तक बीमा कराने के लिए एजेंसी तक तय नहीं की गई है। पिछले वर्ष केवल फस्र्ट ईयर वाले छात्रों का बीमा हुआ है जबकि फीस की वसूली सभी छात्रों से की जा रही है। विवि प्रशासन छात्रसंघ के नाम पर प्रति छात्रों से 75 रुपये लेता है, जबकि चुनाव पर रोक लगी है। विश्वविद्यालय में 2005 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे। इसके बाद बसपा सरकार में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लग गई थी। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर छात्रसंघ बहाली का आश्वासन दिया गया, लेकिन चुनाव आज तक नहीं हो पाए। छात्रसंघ चुनाव पर भले रोक लगी हुई है, पर लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रों से छात्रसंघ के नाम पर फीस की वसूली कर रहा है। इस तरह हर वर्ष वह करीब 15 लाख रुपये छात्रसंघ के नाम पर वसूल रहा है।

खेलकूद की फीस पर व्यवस्था नदारद
विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को खेल सुविधाएं देने के लिए 125 रुपये प्रति छात्र वसूलता है। यह रकम हर साल 25 लाख होती है। बावजूद इसके आलम यह है कि फिजिकल एजूकेशन विभाग के छात्र तक सुविधाओं के लिए तरसते रहते हैं। साधारण छात्रों को तो पता ही नहीं होता कि उन्हें खेलने के लिए खेल सामग्री भी मिल सकती है।

डेलीगेसी फीस
विश्वविद्यालय डे स्कॉलर स्टूडेंट के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में डेलीगेसी संचालित करता है। इनकी हालत बेहद खराब है। डेलीगेसी में स्टूडेंट्स को समाचार पत्र व पत्रिकाएं तथा स्पोट्र्स सुविधा उपलब्ध करानी होती है। विवि की खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए स्टूडेंट्स को हॉस्टल या फिर डेलीगेसी का सदस्य रहना अनिवार्य है। इसके बावजूद हर साल स्टूडेंट्स से वसूल की गई 10 लाख रुपये कहां खर्च होती है, कहीं नजर नहीं आता है।

सुविधाओं पर जल्द होगा फैसला
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय का कहना है कि विवि पूअर ब्वायज और मेडिकल रिलीफ फंड पर जल्द फैसला लेगा। यह बड़ा मामला है इसलिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं ले सकते। मेडिकल इंश्योरेंस एक साल के लिए मिलेगा भले ही किसी अवधि के लिए हो। छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट का स्टे है। बाकी सुविधाओं का लाभ स्टूडेंट्स को दिया जा रहा है। वे इन सुविधाओं के लिए संपर्क कर सकते हैं।

गरीब छात्रों की सहायता के नाम पर उगाही 
विश्वविद्यालय हर स्टूडेंट से दो सौ रुपये निर्बल छात्र सहायता कोष के लिए लेता है। इस मद में करीब 40 लाख रुपये वसूले जाते हैं, लेकिन इस कोष से छात्रों की सहायता के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीर नहीं दिखा। सूत्रों के मुताबिक कई सालों से इस फंड से किसी को मदद नहीं मिली। दो वर्ष पूर्व विवि ने इसके लिए नियमावली तैयार की। इस मद से स्टूडेंट्स को मदद देने के लिए ‘अर्न व्हाइल लर्न’ योजना शुरू की गई। योजना के मुताबिक सहायता पाने के लिए छात्र को विश्वविद्यालय में काम करना होगा। प्रचार-प्रसार न होने की वजह से पहले साल विवि के करीब 20 हजार छात्रों में केवल 24 ने योजना के लिए आवेदन किया। इनमें से केवल 5 ही विवि के नियमों में फिट हो सके। पिछले साल इनकी संख्या 50 के करीब रही। इस साल नियम बदलने की बात कही गई। पर, अभी तक नए नियमों का अता-पता नहीं है।

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