बाढ़ पर सियासत नहीं स्थायी समाधान चाहिए

इस साल फिर देश के कई राज्य भीषण बाढ़ की चपेट में हैं । बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों में बाढ़ का कहर जारी है। बिहार और उत्तर प्रदेश में हालत ज्यादा खराब है। जिन इलाकों में बाढ़ का कहर है वहां के लाखों लोग जिंदा रहने की चुनौती से दो-चार हैं। लेकिन इन सबमें कुदरती मार से ज्यादा लोग सरकारों के काम करने के तरीके, पूर्व की तैयारी और प्रबंधन में घोर लापरवाही से परेशान हैं। बाढ़ की विषीषिका से हम हर साल जूझते हैं लेकिन बाढ़ पर सियासत होने के अलावा अभी तक इसका स्थायी समाधान ढूंढा नहीं जा सका।

sajnaysharmaउत्तर प्रदेश के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। गोरखपुर, महराजगंज, सिद्घार्थनगर, गोंडा, बाराबंकी में हालत ज्यादा चिंतनीय है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अधिकांश लोग पलायन कर रहे हैं। बाढ़ की वजह से लोग मर रहे हैं तो इसके सरकारी महकमों की लापरवाही और आपदा प्रबंधन का लचर तंत्र जिम्मेवार है। यह कोई छिपा तथ्य नहीं है कि भूकंप के बरक्स बाढ़ कभी अचानक नहीं आती, इसके संकेत पहले से ही मिलने लगते हैं। लेकिन शायद ही कभी सरकारों ने इससे बचाव के लिए पर्याप्त पूर्व तैयारी की जरूरत महसूस की हो। नतीजतन, बाढ़ जब अपनी तीव्रता के साथ रिहायशी इलाकों में फैलती है तो बहुत कुछ तबाह कर डालती है। कुदरत के चक्र को रोका नहीं जा सकता, पर इस तरह की तबाही जरूर कम की जा सकती है। सरकार का तर्क है कि बाढ़ की समस्या नेपाल द्वारा पानी छोडऩे की वजह से हुई है। बारिश की वजह से बाढ़ नहीं आयी है। यह समस्या कोई आज की नहीं है। नेपाल हर साल पानी छोड़ता है और उसके पानी से यूपी और बिहार के लोग प्रभावित होते हैं। नेपाल में स्थित उस बांध और उस पर बने गेट को भारतीय इंजीनियर संचालित करते हैं। यानी एक ओर मौसम, बारिश, पानी की मात्रा आदि के पूर्व आंकलन में लापरवाही न बरती जाए, और दूसरी ओर, बाढ़ के फैलने वाले इलाकों में बचाव की पूर्व तैयारी की जाए तो बड़ी तबाही से बचा जा सकता है। विडंबना यह है कि बाढ़ से होने वाली बर्बादी को रोकने के लिए सरकारें तटबंधों को अंतिम हल मान लेती हैं। लेकिन सच यह है कि जैसे-जैसे तटबंधों का विस्तार हुआ है, धारा बाधित होने से नदियां बेलगाम हुर्इं और इसी के साथ बाढ़ की समस्या भी बढ़ती गई है। इसलिए सरकार बाढ़ से निपटने का स्थायी समाधान ढूंढे न कि एक-दूसरे पर दोषारोपण कर अपनी जिम्मेदारी से बचे।

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