68 मौतों के बाद भी ऐसे हो रहा है बच्चों का इलाज

सीएम के दौरे से पहले अस्पताल के अंदर गंदगी के बीच घूम रहे हैं कुत्ते और गाय

68 बच्चों की मौत ने रुला दिया पूरे देश को मगर फर्क नहीं पड़ा सिस्टम पर, बच्चों के इलाज के लिए बने संवेदनशील वार्डों के सामने घूम रहे हैं कुत्ते
सीएम योगी के पहुंचने के कुछ समय पहले ही 4पीएम के फोटोग्राफर सुमित कुमार ने खींची अस्पताल के अंदर फैली गंदगी और जानवरों की तस्वीरें
कल से अब तक एक दर्जन से अधिक बच्चों की हुई मौत, एक बच्चे ने आज सुबह तोड़ा दम

संजय शर्मा
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लखनऊ। गोरखपुर में बच्चों की दर्दनाक मौत का सिलसिला जारी है। 68 बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में गम का माहौल है, मगर गोरखपुर प्रशासन पर मानो इसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा। आज जब सीएम योगी आदित्यनाथ इस अस्पताल में पहुंचे तो उससे कुछ समय पहले अस्पताल में घूम रहे कुत्ते और गाय ये साबित करने के लिए पर्याप्त थे कि बच्चों की मौत सिस्टम पर कोई असर नहीं छोड़ पाई। गंदगी और जानवरों के बीच बच्चों का इलाज किया जा रहा है, जबकि गंभीर रूप से बीमार बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए खासे इंतजाम किए जाने चाहिए थे। उधर स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के उस बयान की जिसमें उन्होंने कहा था कि अगस्त में बच्चे मरते ही रहते हैं, पूरे देश में आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना करते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
सरकार ने कल यह साबित करने की कोशिश की कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई, मगर सरकार अपने ही बुने जाल में उलझ कर रह गई। चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि ऑक्सीजन के लिए पैसा 5 अगस्त को ही दे दिया गया था, मगर फर्म को भुगतान 11 अगस्त को किया गया इसलिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया। मगर हकीकत यह है कि इस पैसे की मांग प्रिंसिपल ने जुलाई के पहले हफ्ते में ही निदेशालय से की थी मगर निदेशालय के कुछ अफसर ये पैसा रिलीज करने के लिए कमीशन मांग रहे थे, जिसके कारण महीनों तक यह पैसा नहीं भेजा गया।
दरअसल देश भर में हो रही आलोचना के बीच जब लोगों ने इस मामले में पीएम मोदी को भी घसीटना शुरू किया तब लखनऊ से दिल्ली तक हडक़ंप मच गया। पीएम मोदी के निर्देश पर दिल्ली से एक टीम आई और फिर यूपी सरकार भी हरकत में आई। इससे पहले सीएम के इलाहाबाद दौरे पर लंच की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और लोगों ने आलोचना की कि एक तरफ बच्चे मर रहे हैं और दूसरी तरफ सीएम और केेंदीय मंत्री उमा भारती दावत उड़ा रही हैं।
देश भर में हो रहे इस विरोध के बाद सीएम ने आज अपना बाढ़ का दौरा स्थगित करके गोरखपुर जाने का फैसला किया। सीएम के गोरखपुर आने की खबर के बावजूद वहां के सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा। बच्चों के वार्ड में पहले की तरह गंदगी के ढेर लगे रहे और जानवर घूमते रहे। उधर बच्चों की मौत का सिलसिला लगातार जारी रहने से सरकार को पूरे देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि सीएम योगी गोरखपुर के सांसद भी हैं तब भी उन्हें इतने बच्चों की मौत के बाद गोरखपुर आने में 48 घंटे क्यों लग गये। जाहिर है कि गोरखपुर में बच्चों की मौत का यह कलंक सरकार के माथे से आसानी से खत्म नहीं होगा।

सीएम के दौरे से कुछ मिनट पहले डॉक्टर और बच्चों के माता-पिता के बीच मारपीट

सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर दौरे के दौरान ही हकीकत सामने आ गई। अस्पताल की अव्यवस्था देखकर सीएम योगी बेहद नाराज हुए। उनके पहुंचने के कुछ मिनट पहले ही सुमित नाम के बच्चे की मौत हो गई। बच्चों के परिजनों का कहना था कि वे सीएम से मिलना चाह रहे हैं, मगर प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इस बीच अन्य तीमारदार भी इकट्ïठे हो गये और उनकी डॉक्टरों से मारपीट हो गई। तब तक सीएम के आने का समय हो गया था, लिहाजा पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। भीड़ के दौरान ही अव्यवस्था फैल गई और धक्का-मुक्की में दरवाजे का शीशा भी टूट गया। इस अराजकता से सीएम योगी बेहद नाराज हुए। माना जा रहा है कि आज शाम तक कुछ अफसरों पर इसकी गाज गिर सकती है।

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