ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरत रहा एलडीए

मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देशित शिकायतों पर भी गंभीर नहीं अधिकारी
विभाग में निस्तारण के लिए आने वाली 23 शिकायतें लंबित
संयुक्त सचिव ने शिकायत निस्तारण में लापरवाही पर कसे तहसीलदार के पेंच
तीन दिन में शिकायतों का निस्तारण करने का दिया निर्देश

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण में ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण में हीलाहवाली की जा रही है। प्राधिकरण के सम्पत्ति विभाग में लंबे समय से 23 शिकायतों का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इन शिकायतों में सम्पत्ति, ट्रस्ट विभाग से संबन्धित पीजी पोस्टल का एक मामला, ऑनलाइन शिकायतों के सात मामलों समेत मुख्यमंत्री कार्यालय और आईजीआरएस से आने वाले 15 मामले लंबित हैं। इन सबके बावजूद जिम्मेदार अपनी सुस्त कार्यप्रणाली छोडऩे को तैयार नहीं हैं। शिकायत निस्तारण में लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त सचिव महेन्द्र कुमार मिश्रा ने चिन्ता जाहिर की है। उन्होंने कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में तहसीलदार राजेश शुक्ला को कड़ी फटकार लगाई है। यही नहीं तहसीलदार राजेश शुक्ला को तीन दिन के अन्दर सभी लंबित मामलों को निपटाने के निर्देश दिए हैं। अगर तीन दिन के भीतर सभी मामलों का निस्तारण नहीं किया गया तो मामले की शिकायत शासन में हो सकती है। इसके साथ ही एलडीए के अफसरों ने आईजीआरएस के द्वारा मिलने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए सभी संबंधित अभियंताओं और अफसरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि लंबित मामलों को जल्द से जल्द निस्तारित किया जाए। माना जा रहा है कि जिस अफसर या अभियंता के पास शिकायतों के निस्तारण का प्रतिशत कम होगा उसके खिलाफ शासन में कार्रवाई के लिए लिखा जा सकता है।

भारी विरोध के बीच एलडीए ने ध्वस्त किया अवैध कब्जा
कमिश्नर की नाराजगी के बाद एलडीए के अधिकारियों ने उजरियांव स्थित अपनी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए। इस अभियान के दौरान अफसरों को महिलाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उजरियांव में खसरा संख्या 1280 पर किये गये अवैध निर्माणों को एलडीए ने ध्वस्त कर दिया। इस जमीन को वर्ष 1983 में एलडीए द्वारा अधिग्रहीत किया गया था, लेकिन अभियंताओं की लापरवाही के चलते करोड़ों की इस जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। अधिकारियों का कहना है कि स्लेज फार्म व ग्राम समाज की भूमि का कब्जा नगर महापालिका लखनऊ की ओर से प्राधिकरण को हैंडओवर किया जा चुका है, जिसके चलते अतिक्रमण हटाया गया।

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