बीआरडी में इंसेफेलाइटिस से मौतों का सिलसिला जारी, हर तरफ चीख-पुकार

गोरखपुर अस्पताल में हुई मौतें नरसंहार है : कैलाश सत्यार्थी

12 AUG PAGE- 8 FINAL

लखनऊ। नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत को नरसंहार बताया है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर के अस्पताल में हुई मौतें त्रासदी नहीं, स्पष्ट रुप से नरसंहार है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि आखिर हमारे बच्चों के लिए 70 साल की आजादी के क्या यही मायने हैं? सत्यार्थी ने ट्विटर के माध्यम से सीएम योगी से अपील करते हुए कहा कि दशकों से चले आ रहे भ्रष्ट चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के लिए आपके एक सही निर्णय की जरुरत है। इसी बीच सीएम योगी ने इस मामले की पूरी तरह से जांच के आदेश दे दिए हैं। घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश भी दिया है।

गोरखपुर पहुंचे सिद्धार्थनाथ व आशुतोष

ऑक्सीजन सप्लाई रुकना अगर मौतों का कारण नहीं तो कंपनी पर क्यों पड़े छापे

मेडिकल कॉलेज में 50 बच्चों की मौत पर घमासान मच गया है। विरोधी योगी सरकार पर निशाना साध रहे हैं तो अब राज्य सरकार भी हरकत में आ गई है। बच्चों की मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी बताई गई है। कंपनी ने भुगतान नहीं होने पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी, जिसके बाद अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो गई। अब एक्शन में आते हुए पुलिस ने सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मनीष भंडारी के कई ठिकानों पर दबिश दी और छापे मारे। खबर है कि मनीष भंडारी फरार है। घटना के बाद से ही अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में है। ऐसे में कई सवाल भी उठ रहे हैं कि ऑक्सीजन सप्लाई रोकने की सप्लायर की चेतावनी के बाद भी अस्पताल प्रशासन सजग क्यों नहीं हुआ? अगर सप्लायर ने ऑक्सीजन रोका था तो उसे ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया और क्यों नहीं जरूरी कदम उठाए गए? घटना से 2 दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अस्पताल के दौरे पर गए थे। उन्हें ऑक्सीजन की स्थिति और बच्चों की मौतों के बारे में क्यों नहीं बताया गया? जबकि बच्चों की मौत 7 अगस्त से ही शुरू हो गई थी।

आज सुबह गोरखपुर की घटना को लेकर मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन स्पेशल विमान से गोरखपुर पहुंचे । मुख्यमंत्री ने दोनो मंत्रियों को निर्देश दिये हैं कि मौके पर जाकर खुद जांच करें और शाम तक पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपे। इसलिए माना जा रहा है कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार अफसरों पर आज शाम तक गाज गिरना तय है। यूपी सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा है कि आज कुल सात मौतें हुई हैं लेकिन उनका ऑक्सीजन की कमी से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा है कि अभी भी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन के 100 से अधिक सिलेंडर मौजूद हैं।

कहीं कमीशन के चलते तो नहीं हुई मासूम बच्चों की मौत?

कमीशन का खेल अधिकारियों और कर्मचारियों के जेहन में इतना अंदर तक घर कर गया है कि वह उसे नहीं छोड़ रहे है, इससे चाहे किसी की कोख उजड़े या किसी के सर से मां-बाप या भाई का साया उठ जाए। यह सरकारी योजनाओं को पूरी तरह नेस्तोनाबूद करने में लगे हैं। बिल पास कराने में कंपनियों को कदम-कदम पर कमीशन देना पड़ता है। कमीशन न देने पर बजट होने के बाद भी बिल पास नहीं होता है। हर मेज पर फाइल रुकती है, जिसके कारण बिल बढ़ता रहता है। यदि कोई एजेंसी बीच में सप्लाई रोक दे तो सारी गलती उसकी हो जाती है। हर कोई उसे दागी मानता है, लेकिन संबंधित लोग अपने गिरेबान में झांकते नहीं है और एजेंसी को काली सूची में डालकर फिर से दूसरी एजेंसी से यही खेल शुरू हो जाता है। ऐसा ही कुछ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भी हुआ है, जिसके चलते इतने बच्चे असमय मौत के गाल में समा गए हैं। इस पर यदि अब सरकार और प्रशासन ने नहीं सोचा तो ऐसी घटना दोबारा होने की भी आशंका है। राजधानी के केजीएमयू समेत प्रदेश के अधिकतर बड़े सरकारी अस्पतालों व संस्थानों में भी ऐसा ही कुछ चल रहा है। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के सूत्रों की मानें तो ऑक्सीजन गैस सप्लाई करने वाली एजेंसी के अधिकारियों ने कॉलेज के प्रधानाचार्य समेत कई अधिकारियों से लगभग चार माह पहले मिलकर और लिखित रूप में यह शिकायत किया था कि यदि उसका बकाया पेमेंट नहीं किया गया तो वह सप्लाई बंद कर देगा, लेकिन एजेंसी की धमकी के बाद अधिकारियों ने सिर्फ उसका कागज आगे बढ़ाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान ली। एजेंसी के कर्मचारी कॉलेज के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिल पास कराने के नाम पर मोटी रकम भी दे चुके थे, जिसके बाद ही फाइल आगे बढ़ी थी, लेकिन तब तक सरकार बदल गई, जिसके बाद फाइल एक बार फिर से रूक गई। एजेंसी बिल पास कराने के लिए दोबारा कमीशन नहीं देना चाहती थी और अधिकारी व बाबू भी अब फाइल को नहीं बढ़ाना चाहते थे। दोनों के बीच की तकरार में आखिरकार एजेंसी को ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसका नतीजा अब सबके सामने है।

तत्काल इस्तीफा दें सीएम योगी: गुलाम नबी आजाद

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के गृह जनपद गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी से जिन 50 बच्चों की मौत हुई है सरकार उसकी जिम्मेदार है। यह बात उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कही। बच्चों की मौत के बाद गोरखपुर पहुंचे गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर सहित अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफे की भी मांग की है। कंाग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मेडिकल कालेज में हुई इस हृदय विदारक घटना ने सरकार की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। इन मौतों के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों स्वयं मुख्यमंत्री गोरखपुर सहित महराजगंज जनपद के दौरे पर थे। गोरखपुर मेडिकल कालेज की कमियों के बारे में उन्हें बखूबी जानकारी है। यह ऐसा समय है, जब पूरे पूर्वांचल से इंसेफेलाइटिस के मरीज इलाज के लिए बीआरडी आ रहे हैं, तब भी ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिलने और सप्लाई रोके जाने पर अस्पताल प्रशासन और सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया। यदि मुख्यमंत्री जरा भी संवेदनशीलता दिखाते और अपने कार्यक्रमों में मेडिकल कालेज को वरीयता देते तो शायद बच्चों की मौत नहीं होती।

पूरे मामले में गलती राज्य सरकार की है: मायावती

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौतों को हृदय विदारक घटना करार दिया है। उन्होंने मामले की सही जानकारी के लिए पार्टी की तरफ से तीन सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल गोरखपुर के लिए रवाना कर दिया है। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए सीएम योगी से नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है। मायावती ने कहा कि पूरे घटनाक्रम में जिस तरह की संवेदनहीनता का परिचय अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और सरकार के मंत्रियों ने किया है, वह अक्षम्य है। इसलिए मासूमों की मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों ेके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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