रोमांच को जीना है तो आइए फुकेट में

फुकेट से संजय शर्मा की रिपोर्ट…

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तीन दिन बैंक बंद हैं और छुट्टïी का माहौल है, तो क्यों न इसका फायदा उठाया जाए। अगर आप रोमांच और प्रकृति के नजारे को मन से जीना चाहते है तो फुकेट आपका इंतजार कर रहा है। समुद्र का साफ पानी व सौ से ज्यादा टाइगर देखेंगे और उन्हें करीब से महसूस करेंगे तो उसे ताउम्र नहीं भूल पायेंगे। तो देर किस बात की… बैग तैयार कीजिए और निकल पडि़ए, और हां, आज ही क्योंकि इस देश में पहले से वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। वीजा आपको एयरपोर्ट पर ही मिल जायेगा।
अगर आप थोड़ा पैसा बचाना चाहते हैं तो फ्लाइट लखनऊ की जगह दिल्ली से ले सकते हैं। अगर आरामदायक फ्लाइट से सफर करना चाहते हैं तो सिंगापुर एयरलाइंस सबसे बेहतर विकल्प है। मैं भी परिवार के साथ दिल्ली से इसी एयरलाइंस से आया हूं। हमारा जहाज दुनिया के सबसे बड़े जहाजों में एक था। मैंने पहली बार डबलडेकर जहाज देखा। मतलब हम जहाज के ऊपरी तल पर थे और उतने ही यात्री निचले तल पर बैठे थे। लगभग आठ सौ यात्रियों वाले इस जहाज का फुकेट तक का सफर लगभग दस घंटे का था।

वीजा के लिए नहीं करना होगा इंतजार

फुकेट के लिए आपको वीजा के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। एयरपोर्ट पर आपको मात्र बीस मिनट में वीजा मिल जायेगा। हां, अपने साथ पासपोर्ट के अलावा एक फोटो भी ले जाए। वीजा मिलने के बाद इमीग्रेशन पर सुरक्षाकर्मी आपसे फुकेट की करेंसी दिखाने को कहेंगे। अगर आप यहां की करेंसी साथ नहीं लाए हैं तो कोई दिक्कत नहीं। एयरपोर्ट पर करेंसी चेंज करने की सुविधा उपलब्ध है।

फुकेट की आय का स्रोत है टूरिज्म
एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही ताजी हवायें आपकी थकान दूर कर देंगी। फुकेट की कुल आबादी तीन लाख छियासी हजार है। यह शहर 576 किलोमीटर में बसा है। यह दूरी समुद्री क्षेत्र को शामिल करने पर है। यूं तो फुकेट तट छोटा सा शहर है, जो आपको लखनऊ से भी काफी छोटा लगेगा। यहां का मुख्य कारोबार टिन एवं रबर का माना जाता है, मगर हकीकत में फुकेट की आय का मुख्य स्रोत टूरिज्म ही है। समुद्र के किनारे होने के कारण यहां वर्ष भर तापमान लगभग 25 से 32 डिग्री के बीच ही रहता है। फुकेट तीन जिलों में बंटा है और इसके आस-पास कोई रेल सुविधा नहीं है। यहां घूमने के लिए बड़ी संख्या में मिनी बस और टैक्सी मिलेगी।
2004 में आयी सुनामी ने फुकेट को लगभग तबाह कर दिया था। इस तूफान से यहां का कारोबार बहुत तबाह हुआ था और 250 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी, मगर जल्द ही यह शहर फिर अपनी पुरानी शान में आ गया। दिन में इसके आस-पास के आयरलैंड भीड़ से भरे रहते हैं तो लगता है कि फुकेट में मानो रात ही नहीं होती। भगवान बुद्ध के भव्य मंदिर इस शहर को और भव्य बनाते हैं। यूं तो फुकेट घूमने के लिए और इसे महसूस करने के लिए काफी समय चाहिए क्योंकि यहां का हर इलाका अपने आप में बेहद खूबसूरत है, मगर कुछ द्वीप ऐसे हैं जहां जाए बिना यात्रा अधूरी सी लगती है। इसमें फी-फी द्वीपों की यात्रा सबसे प्रमुख है। स्पीड वोट से लगभग नौ घंटे में यह यात्रा पूरी होती है। इसमें छह द्वीप आते हैं। यहां पर नैसर्गिक सौंदर्य के अलावा समुद्र में रोमांच के अवसर भी मिलते हैं। इसमें समुद्र में स्कूटर चलाना और ऑक्सीजन मॉस्क लगाकर समुद्र के भीतर जाकर समुद्री जीव देखने का आकर्षण प्रमुख है। इसके अलावा फैग नगा खाड़ी, फैटा सागर, बैबू राफ्टिंग नेचर टूर आदि शामिल है।
फुकेट शहर का पटोंग बीच शहर का सबसे प्रमुख आकर्षण है। पटोंग बीच में एक तरफ समुद्र है तो दूसरी ओर फुकेट को भव्य बनाती रंगीनियां। तरह-तरह के सी फूड रेस्टोरेंट, बड़े-बड़े मॉल इस शहर को अलग ही रूप देते है। रेस्टोरेंट के बाहर ही बर्फ में रखे हुए तमाम समुद्री जीव उन लोगों के मुंह में पानी ला सकते है जो सी फूड के शौकीन हैं। यहां भारतीय रेस्टोरेंट में भी आप शानदार भारतीय खाना खा सकते हैं। गोरखपुर के कुंवर सिंह, बादशाह नाम से अपना भारतीय रेस्टोरेंट चला रहे हैं जहां आपको बढिय़ा आलू के पराठे और तडक़े वाली अरहर की दाल भी मिल जायेगी। इसी बीच में बंगला रोड को ही फुकेट की नाइट लाइफ माना जाता है। सोई गली में घुसते ही आप चौंक जायेंगे। तेज संगीत और झिलमिलाती लाइटों के बीच बनी बार में लगभग न्यूनतम कपड़े पहने युवतियां पोल डांस करती नजर आयेंगी। अगर आप परिवार के साथ भी हंै तब भी ढ़ेर सारी युवतियां आपके पास एक एलबम लेकर आएंगी जिसमें लिखा होगा कि इस शो में एंट्री की कोई फीस नहीं है। अगर आप फ्री के लालच में घुस गए तो आपकी जेब ढीली होना तय है। शो में घुसते ही स्टेज पर आधा दर्जन लड़कियां निर्वस्त्र होकर डांस करती नजर आयेंगी। आप से एंट्री फीस भले न ली गई हो मगर आपको एक ड्रिंक लेना जरूरी है। अगर आप कोक मगायेंगे या बीयर, तो दोनों नौ सौ भाट मतलब एक हजार आठ सौ रुपए की पड़ेगी। बीच-बीच में यह लड़कियां आपके पास बैठकर फरमाइश करेंगी कि एक ड्रिंक उन्हें भी पिला दी जाए। इसी बीच में स्टेज पर बिना कपड़े पहने लड़कियां शो करती रहेंगी। फुकेट में देह व्यापार गैर कानूनी नहीं है।
पूरे इलाके में इस तरह के शो और सडक़ के दोनों तरफ हो रहे पोल डांस के बीच दुनिया भर से आए लोग परिवार के साथ भी आराम से घूमते रहते हैं। किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं। फुकेट के यह शो पूरी दुनिया में मशहूर हैं और इन्हें देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग यहां आते हैं। अगर फुकेट आए और किंगडम ऑफ टाइगर नहीं देखा तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जायेगी। इस इलाके में सौ से ज्यादा टाइगर हैं। इनमें टाइगर के छोटे बच्चे से लेकर बड़े टाइगर शामिल हैं। इनको पास से छूने और उनके साथ फोटो खिचवाने के लिए आपको 3700 भाट खर्च करना होगा मतलब 7400 भारतीय रुपए, मगर जब आप अंदर जाएंगे तो लगेगा कि इस रोमांच के आगे यह कीमत कुछ नहीं है। इन टाइगर को छूने और उनके साथ फोटो खिंचवाने में आपको पसीने आ सकते हैं। जब टाइगर आपको देखते हैं तो लगता है अगले ही पल यह आपको अपना निवाला बनाना चाहता है, मगर साथ खड़े ट्रेनर के आगे यह टाइगर खामोश रहते हैं। एक साथ आधा दर्जन खुले टाइगर के बीच एक टाइगर के साथ फोटो खिंचवाते समय डर लगा रहता है कि पीछे से बड़ा टाइगर न आ रहा हो, मगर रोमांच इसी को कहते हैं।
टाइगर के अलावा खतरनाक जहरीले कोबरा जैसे सांप भी आपको अपना जलवा दिखाने को बेकरार रहते हैं। जहरीले सांपों का यह शो आपकी कंपकंपी चढ़ा देगा। शो के बीच शो कर रहा व्यक्ति आपको सांपों के बीच बुलाता है। अधिकांश लोग मना कर देते हैं, मगर आपमें हिम्मत हो तो रिंग के अंदर जाकर बहुत बड़े कोबरा को अपने ऊपर चलने का रोमांच महसूस कर सकते हैं जो आपको जिन्दगी भर याद रहेगा।
इसके अलावा भी बहुत कुछ है फुकेट में, पढ़ते रहिए… 4पीएम… जल्दी ही आपको फुकेट की और शानदार बातें बतायेंगे।

वेंकैया ने ली उपराष्ट्रपति पद की शपथ, कहा अब मैं किसी पार्टी का व्यक्ति नहीं

पीएम मोदी बोले, देश के सर्वोच्च पदों पर अब आमजन भी, विपक्ष ने दी बधाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। वेंकैया नायडू ने आज राष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली और राज्यसभा के सभापति के रूप में पदभार संभाल लिया। वह ऐसे पहले उपराष्ट्रपति हैं, जिनका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नायडू को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नायडू ने हिंदी में शपथ ली। राज्यसभा में वेंकैया ने कहा कि जब मैं पहली बार इस सदन में आया था तो पता नहीं था कि सभापति बनूंगा। मेरे जैसे किसान के बेटे का यहां आना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि अब मैं किसी पार्टी का व्यक्ति नहीं हूं। मैं सभी का ध्यान रखूंगा। राष्टï्रपति भवन की ओर से आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी राष्ट्रपति भवन पहुंचे। नायडू संसद पहुंचकर औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वेंकैया ऐसे पहले उपराष्ट्रपति बने हैं, जो सदन की बारीकियों से वाकिफ हैं। वह प्रक्रिया से निकले पहले उपराष्ट्रपति हैं। मोदी ने कहा कि नायडू पहले ऐसे उपराष्ट्रपति हैं, जो आजाद भारत में पैदा हुए। उन्होंने कहा कि नायडू किसान के बेटे हैं और गांव को भलीभांति जानते हैं। वह जेपी आंदोलन से भी जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि आज सर्वोच्च पदों पर सामान्य घरों के लोग आसीन हुए हैं। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने पदभार संभालने के लिए नायडू को बधाई दी। 

यूपी में मदरसों की राष्ट्रभक्ति का टेस्ट लेगी योगी सरकार

प्रदेश भर के मदरसों में झंडारोहण व राष्ट्रगान की होगी वीडियोग्राफी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सूबे की योगी सरकार ने प्रदेश के सभी मदरसों में इस बार स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली है और इन कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह पहला मौका है जब ऐसे निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं प्रदेश सरकार के फैसले पर सोशल मीडिया में भी सकारात्मक और नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
प्रदेश में झंडा रोहण व राष्ट्रगान की वीडियोग्राफी कराने का मकसद राष्ट्रीय पर्व को लेकर मदरसों की हकीकत का पता लगाना बताया जा रहा है। हालांकि यूपी मदरसा बोर्ड की तरफ से जारी इस आदेश का विरोध भी शुरू हो गया है। मदरसा प्रबंधक हाजी सैयद तहव्वर हुसैन ने परिषद द्वारा जारी पत्र की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जंग-ए-आजादी में मदरसा और यहां के शिक्षकों का बहुमूल्य योगदान रहा है। इसके बावजूद मदरसों को शक की निगाह से देखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण व निंदनीय है। दरअसल, मदरसा परिषद बोर्ड की ओर से 3 अगस्त को जिला अल्पसंख्यक अधिकारी को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि स्वतंत्रता दिवस पर सुबह आठ बजे झंडारोहण एवं राष्ट्रगान होगा। उसके बाद अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इन सभी कार्यक्रमों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराकर जिले के अल्पसंख्यक अधिकारी को सौंपने का भी निर्देश दिया गया है।

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