परिषदीय स्कूलों से क्यों मुंह मोड़ रहे बच्चे

अहम सवाल यह है कि अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं भेजना चाहते हैं? क्या परिषदीय विद्यालयों में लगातार गिर रहा शिक्षा का स्तर इसका कारण है या अन्य वजहें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं? बच्चों को लुभाने के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाएं भी असर क्यों नहीं दिखा पा रही हैं? क्या पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलने की जरूरत है? क्या सरकार इसके लिए जिम्मेदार नहीं है?

sajnaysharmaतमाम कवायदों और लुभावनी योजनाओं के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति लगातार कम हो रही है। यूपी की राजधानी लखनऊ की हालत पर नजर डालने से स्थितियां साफ हो जाती हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यहां परिषदीय स्कूलों में महज 50 फीसदी छात्र ही उपस्थित हो रहे हैं। रिपोर्ट देखने के बाद अधिकारियों की भी हालत खराब है। अहम सवाल यह है कि अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं भेजना चाहते हैं? क्या परिषदीय विद्यालयों में लगातार गिर रहा शिक्षा का स्तर इसका कारण है या अन्य वजहें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं? बच्चों को लुभाने के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाएं भी असर क्यों नहीं दिखा पा रही हैं? क्या पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलने की जरूरत है? क्या सरकार इसके लिए जिम्मेदार नहीं है?
सर्वशिक्षा अभियान के तहत सभी बच्चों को शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए प्रदेश भर में हजारों परिषदीय स्कूल हैं। यहां हर साल लाखों बच्चों को दाखिला दिया जाता है। लेकिन अधिकांश स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति आधे से भी कम होती है। यह स्थिति तब है जब यहां बच्चों को ड्रेस, पाठ्य पुस्तकें और मिड-डे मील देने की व्यवस्था की गई है। देखा यह गया है कि पाठ्य पुस्तक और ड्रेस लेने के बाद छात्रों की उपस्थिति में अचानक गिरावट आ जाती है। मिड-डे मिल भी बच्चों की उपस्थिति को नहीं बढ़ा पा रही है। इन सबके बीच असली सवाल यही है कि आखिर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते क्यों है? हकीकत यह है कि परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है। इसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को यहां नहीं भेजना चाहते हैं। इसके अलावा इन स्कूलों में पढऩे वाले अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से निर्बल वर्ग के हैं। अभिभावक अपने बच्चों का विद्यालयों में एडमिशन तो करा देते हैं लेकिन इन्हें स्कूल न भेज कर काम-धंधों में लगा देते हैं। ये अभिभावक अभी भी व्यक्ति के जीवन में शिक्षा के महत्व को नहीं समझ सके हैं। यह मानसिकता काफी चिंताजनक है। बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए सरकार को न केवल शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने होंगे बल्कि अभिभावकों को भी शिक्षा के प्रति जागरूक करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो सरकार की सभी को शिक्षा देने की मंशा पूरी नहीं हो सकेगी और बच्चे स्कूलों से मुंह मोड़ते रहेंगे।

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