निगम की हालत डावांडोल, 300 करोड़ की है देनदारी

फिजूलखर्ची ने बढ़ाई मुसीबत, आमदनी बढ़ाने पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
भुगतान के लिए पेंशनर्स और ठेकेदार लगा रहे चक्कर
विकास कार्यों के लिए निगम के खाते में नहीं है पैसा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। नगर निगम की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। हाल यह है कि बजट न होने के कारण विभाग विकास कार्यों को नहीं करा पा रहा है। यही नहीं कर्मचारियों का वेतन, पेंशन समेत ठेकेदारों के करोड़ों रुपये नगर निगम पर बकाया हैं। बकाया भुगतान के लिए ठेकेदारों से लेकर पेंशनर्स तक नगर आयुक्त कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। खाते में रकम न होने के कारण विभाग द्वारा जारी चेक बाउंस हो रहे हैं। दूसरी ओर अफसरों की फिजूलखर्ची जारी है। फिजूलखर्ची को रोकने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का भी इन अफसरों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। जिस केंद्रियत सेवा के अफसरों को वाहन की सुविधा नहीं मिलनी चाहिए उनको भी विभाग वाहन समेत कई सुविधाए मुहैया करा रहा है। इन स्थितियों के बावजूद निगम के अफसर आय बढ़ाने की कोई कोशिश करते नहीं दिख रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में निगम की हालत और खस्ता हो जाएगी।
नगर निगम में पिछले चार माह से कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में धनराशि जमा नहीं की गई है। कार्यदायी संस्था के अधीन 2500 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से कई कर्मचारियों को पिछले चार माह से मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। रिटायर्ड कर्मचारी पेंशन के लिए भटक रहें हैं। निगम पर ठेकेदारों और कर्मचारियों का लगभग 300 करोड़ बकाया है। आर्थिक तंगी के चलते रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन में सातवें वेतनमान का लाभ तक नहीं दिया जा रहा है। यही नहीं जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके जीपीएफ भुगतान में प्रत्येक की लगभग 70 हजार रुपये की कटौती करते हुए कम भुगतान किया जा रहा है। तमाम विकास कार्यों को करने के बाद भी उनका भुगतान नहीं हो रहा है। अफसर बजट न होने की बात कहकर ठेकेदारों को उल्टे पांव वापस भेज रहे हैं। इस तरह कई अव्यवस्थाओं एवं अनियमिताओं के मामले पूर्व में नगर निगम के कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों द्वारा भी उठाये जा चुके हैं। विभाग में तमाम ऐसे केंद्रियत सेवा के अफसर हैं जो जोनल अफसरों के बराबर सुविधाए ले रहें हैं। विभागीय कार्यों के अतिरिक्त गाडिय़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे डीजल व पेट्रोल पर भी फिजूल खर्च हो रहा है। इसका सारा खर्च विभाग की ओर से दिया जा रहा है। वहीं अफसरों का कहना है कि विभागीय कार्यों के लिए गाडिय़ां उपलब्ध करायी जाती हैं, लेकिन अफसर गाडिय़ों का प्रयोग कार्यालय आने-जाने के लिए कर रहे हैं। वहीं तमाम अफसर ऐसे भी हैं, जिनको समान कार्य के बावजूद कोई सुविधा नहीं मिल रही है। फिजूलखर्ची के चलते विभाग अपनी आर्थिक स्थिति को और खराब कर रहा है।

सुस्त वसूली ने बिगाड़ दी स्थित
अफसर विभाग की वसूली को बढ़ाकर आर्थिक स्थिति मजबूत करने की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। निगम तमाम तरह की वसूली को पूरी तरह भूल चुका है। इसके कारण निगम को हर साल कई करोड़ की चपत लग रही है। कई वसूली मामलों में अफसर केवल पत्राचार तक सीमित हैं। निगम की आमदनी बढ़ाने की बात करें तो अभी तक इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। निगम ने अपनी सीमा का विस्तार भी नहीं किया है। पिछले साल नगर निगम क्षेत्र में 84 गांव शामिल किए जाने थे, लेकिन मामला आज तक लंबित पड़ा है। सीमा विस्तार न होने से विभाग को हाउस टैक्स वसूली में बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है। अभी हाल ही में नगर निगम को 44 नये राजस्व निरीक्षक मिले हैं, जिनसे विभाग में टैक्स वसूली बढऩे की उम्मीद है। लेकिन अभी तक इन निरीक्षकों को कार्य नहीं मिला है।

मामला संज्ञान में आया है। निगम में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने और आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। जल्द ही स्थितियों में सुधार आएगा।
नंदलाल सिंह, अपर नगर आयुक्त

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