धुंध की वजह से कम हुआ घर से निकलना मार्केट में बढ़ी मास्क की डिमांड

  • शहर के पार्को में भी लगातार घट रही टहलने आने वालों की संख्या
  • विषैली गैसों से बचाव के लिए अच्छी क्वालिटी के मास्क खरीदने की सलाह दे रहे चिकित्सक

 ऐश्वर्या गुप्ता
captureलखनऊ। लखनऊ की हवा इस वक्त पूरे देश में सबसे ज्यादा जहरीली हो चुकी है। जबकि अब तक इस मामले में दिल्ली पहले स्थान पर था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक बुधवार को लखनऊ की इंडेक्स वैल्यू 471 मिली, जबकि दिल्ली का एक्यूआई 382 ही रहा। इनके मुताबिक लखनऊ की हवा को प्रदूषित करने में सबसे बड़ा कारण पार्टिक्युलेट मैटर है। वाहनों से निकल रहे धुएं और कोहरा बढऩे से अचानक से हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इसलिए लोगों का घरों से निकलना कम हो रहा है। जो लोग घरों से जरूरी काम के सिलिसिले में मजबूरन निकल रहे हैं, उनके चेहरे पर मास्क या मुंह कपड़े से ढका होता है। ऐसे में जनता के बीच धुंध से फैलने वाली बीमारियों का डर बुरी तरह बैठ चुका है। जबकि चिकित्सकों ने धुंध में मौजूद विषैली गैसों और कणों से बचने के लिए अच्छी क्वालिटी के मास्क लगाने की सलाह दी है।
जिले में दीपावली के बाद से ही प्रदूषण काफी बढ़ गया है। इससे फिलहाल कुछ दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। यही वजह है कि बिना काम के लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार इन दिनों जो लोग चिकनगुनिया और वायरल से पीडि़त हैं, उन्हें सांस लेने में अधिक जोर लगाना पड़ रहा है। कई लोगों ने मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक पर निकलना भी बंद कर दिया है। जबकि दीपावली से पहले मॉर्निंग वॉक पर आने वालों की संख्या ज्यादा थी। राजधानी के जनेश्वर मिश्र पार्क, लोहिया पार्क और अन्य छोटे-बड़े पार्कों में टहलने और वर्जिस के लिए आने वाले लोगों की संख्या भी घट गई है। दीवाली के बाद से जिस तरीके से धुंध छाई है, उससे लोगों को ताजा हवा नहीं मिल पा रही है। इसलिए लोग ज्यादा देर तक खुले में नहीं रुकते हैं।
बताते चलें कि करीब तीन-चार दिनों से लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। साथ ही आंखों में भी जलन पैदा हो रही है। जिन लोगों को सांस संबंधी बीमारी है, उनका घर से निकलना बंद हो गया है।

केमिस्ट शॉप पर जुट रही भीड़

प्रदूषण बढऩे की वजह से केमिस्ट शॉप पर मास्क की बिक्री बढ़ गई है। सिविल हॉस्पिटल के आसपास जितने भी केमिस्ट हैं, उनकी दुकान पर पिछले दो दिनों से मास्क की डिमांड बढ़ गई है। मास्क खरीदने के लिए काफी लोग आ रहे हैं। एक हफ्ते पहले तक पूरे दिन में जहां 5 से 10 मास्क की सेल होती थी, वहीं अब 30 से 40 मास्क डेली बिक रहे हैं। शहर के बहुत से स्कूलों में बच्चों को मास्क पहनकर आने के लिए कहा गया है। इसके चलते मास्क की बिक्री काफी बढ़ गई है। ज्यादा संख्या में पैरेंटस मास्क खरीदने के लिए आ रहे हैं। जबकि कुछ लोग अवेयरनेस के चलते भी खरीद रहे हैं। जबकि हजरतगंज में एक केमिस्ट शॉप के कर्मचारी ने बताया कि दीवाली से पहले शॉप से रोजाना 25 मास्क बिकते थे लेकिन अब इनकी बिक्री बढक़र 80 तक पहुंच गई है।

मास्क खरीदते समय एहतियात बरतें

मास्क खरीदते समय एहतियात बरतना जरूरी है। साधारण हरे या नीले क्लीनिकल मास्क ज्यादा काम के नहीं होते और लगभग हर तरह के एयर प्रदूषण के सामने बेअसर रहते हैं। मार्केट में वॉगमास्क, नियो, टोटोबोबो, रेस्प्रो और वीनस कंपनी के मास्क अच्छी क्वालिटी के होते हैं। इसलिए क्वॉलिटी के हिसाब से इनकी कीमत 150 रुपये से 5000 रुपये तक है। इन्हें यूज करना लाभदायक होता है।
– डॉ. आशुतोष दुबे, सिविल अस्पताल

अलग-अलग रेंज के मास्क

मार्केट में हर तरीके के मास्क उपलब्ध हैं। सबसे कम रेंज वाले मास्क 50 रुपये में मिल रहे हैं। ये सबसे ज्यादा डिमांड में हैं। अच्छी क्वॉलिटी के मास्क 230 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में मिल रहे हैं, लेकिन इनकी ब्रिकी बहुत कम है। यहां तक की ऑनलाइन भी कई वैरायटी के मास्क उपलब्ध हो रहे हैं। केमिस्ट शॉप ओनर्स का कहना है कि बहुत महंगी रेंज की सेल कम होती है, इसलिए उसका स्टॉक कम रखते हैं या फिर कस्टमर की खास डिमांड पर ही मंगाते हैं।

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