80 विधायकों के कट सकते हैं टिकट…

मुजाहिद जैदी
लखनऊ। जनता के बीच खराब छवि के कारण मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। समाजवादी पार्टी के हेडक्वार्टर में चले तीन दिन के मंथन के बाद जो तस्वीर सामने उभर कर आ रही है उसमें मौजूदा समय के 80 से ज्यादा विधायकों के टिकट कट सकते हैं। प्रोफेसर राम गोपाल यादव, शिवपाल यादव, अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों व महानगर अध्यक्षों के साथ बैठक कर आगामी विधान सभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चुनाव पर गहन चर्चा की । एक दिन में 29 जिला अध्यक्ष व 29 महानगर अध्यक्षों के साथ बातचीत की गयी।

प्रत्येक जनपद से भावी उम्मीदवारों के बायोडाटा पार्टी पहले ही मांग चुकी थी, जिन लोगों ने पार्टी उम्मीदवार बनने के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी, उनके नामों पर विस्तृत चर्चा हुई। जातीय समीकरण देखे गये। पार्टी के प्रति वफादारी मुख्य पैमाना थी और जनता के बीच उम्मीदवार की कैसी छवि है जैसे मुद्ïदों पर मंथन हुआ।

ज्यादातर जिला अध्यक्ष विधायक जी के कार्यों से नाराज दिखे। जिला अध्यक्षों का कहना है कि विधायकों का क्षेत्रीय जनता से कटाव आने वाले चुनाव में घातक सिद्ध होगा। सरकार और संगठन को जो फीडबैक मिल रहा है उससे लगता है जनता नाराज है। जनता सरकार के कामकाज से तो संतोष जाहिर कर रही है मगर क्षेत्रीय नेता से नाराज दिख रही है।

सबसे पहले समाजवादी पार्टी
अमूमन समाजवादी पार्टी का टिकट बंटवारा चुनाव से कुछ दिन पहले होता था लेकिन इस बार स्थितियां बदल चुकी हैं। चुनाव से लगभग डेढ़ वर्ष पहले ही पार्टी अपना रुख साफ करना चाहती है कि उसका उम्मीदवार कौन होगा। ज्यादातर इस तरह का मैनेजमेंट बहुजन समाज पार्टी का होता था। आने वाले यूपी विधान सभा चुनाव में भी अगर टिकट बंटवारे की बात करें तो बसपा बाजी मार चुकी है तथा 80 फीसदी टिकट फाइनल किये जा चुके हैं। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। उदहारण के लिए लखनऊ से अरमान खान और दिलीप श्रीवास्तव दिन रात एक किये हुए हैं।

लोकसभा में पहले तय कर लिए थे उम्मीदवार
समाजवादी पार्टी ने बीते लोकसभा इलेक्शन में भी अपने दावेदारों के टिकट बहुत पहले फाइनल कर लिये थे, लेेकिन अंत तक वह अपने फैसले पर टिकी नहीं रह सकी और बार-बार टिकट बदले। बनारस, रायबरेली में अंत तक तय नहीं हो सका कि कौन चुनाव लड़ेगा। इसलिए विधानसभा चुनाव की तैयारियों की बैठक और प्रत्याशियों के नामों पर लगी अंतिम मुहर का पार्टी को कितना फायदा मिलेगा यह समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों से बातचीत के बाद तय कर लिय है कि 80 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं।

नई रणीनति
पार्टी ने नई रणनीति के तहत उन स्थानों पर मजबूती से चुनाव लडऩे की नीति बनाई है जहां पिछले चुनाव में वह कम वोटों से चुनाव हारी थी। जिन कमियों की वजह से हारी थी उसी पर गहन चर्चा की गयी।

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