52 करोड़ की लागत में बनेगी पुराने लखनऊ

की पहली तीन मंजिला भूमिगत पार्किंग

ज्योतिबा फूले पार्क में मल्टी लेवल पार्किंग बनाने को मिली शासन की मंजूरी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नवाबों के शहर में अपने वाहन से ऐतिहासिक स्थलों की सैर करने वालों को पार्किंग की समस्या से छुटकारा मिलने वाला है। शासन से पुराने लखनऊ में तीन मंजिला भूमिगत पार्किंग बनाने के लिए 52 करोड़ रूपये की मंजूरी मिल चुकी है। अब चौक स्थित ज्योतिबा फूले पार्क में बहुत जल्द पार्किंग बनाने का काम शुरू हो जायेगा।
अपर जिलाधिकारी पश्चिमी जय शंकर दूबे के मुताबिक पुराने लखनऊ में पहली तीन मंजिला भूमिगत पार्किंग बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस योजना में पहले की भांति सबसे ऊपर पार्क और नीचे तीन मंजिला पार्किंग बनायी जायेगी। इस पार्किंग में करीब 963 दो पहिया और चार पहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं। इससे इमामबाड़ा, बउली और आस-पास के ऐतिहासिक स्थल आने वाले पर्यटकों को वाहन खड़े करने की समस्या से निजात मिल जायेगी। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण करने से पर्यटकों को आकर्षित करने में भी सहयोग मिलेगा। एलडीए की तरफ से बनाये गये भूमिगत पार्किंग के डिजायन के अनुसार भूमिगत पार्किंग तीन मंजिला रहेगी। बेसमेंट के नीचे भी बेसमेंट रहेगा। यह पार्किंग नगर निगम के सामने झंडी पार्क में बनी भूमिगत पार्किंग की तरह होगा। प्राधिकरण अधिकारियों का तर्क है कि इससे गाडिय़ां अधिक संख्या में पार्किंग में खड़ी हो सकेंगी और ऊपरी हिस्से में पार्क का स्वरूप भी बना रहेगा।

हेरीटेज जोन को आकर्षक बनाने का लक्ष्य
जिला प्रशासन इमामबाड़ा और उसके आसपास के क्षेत्र को हेरीटेज जोन व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है। इस कारण इमामबाड़ा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सौन्दर्यीकरण का काम प्रमुखता से किया जा रहा है। पार्किंग का प्रबंध होने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी। भूमिगत पार्किंग में 669 चार पहिया व 294 दो पहिया वाहन हो सकेंगे। ज्योतिबाफूले पार्क का क्षेत्रफल 12096.23 वर्ग मीटर है, इसके 7764 वर्ग मीटर भाग को हरित क्षेत्र बनाकर खूबसूरत पार्क की शक्ल दी जायेगी। इसके साथ ही पाथ वे, बेंच और शौचालय की
सुविधा भी रहेगी।

सडक़ लेवल से ऊंचा रहेगा पार्क

ज्योतिबाफूले पार्क में तीन मंजिला पार्किंग बनने से चौक स्टेडियम के सामने वाली मुख्य सडक़ से पार्क की ऊंचाई करीब 15 फिट रहेगी। इससे घंटाघर जाने वाली सडक़ का लेवल पार्क से नीचे रहेगा। हालांकि पार्क में जाने के लिए स्लोब व सीढिय़ां बनाई जायेंगी। जबकि दूसरी ओर की सडक़ का लेबल ऊंचा होने से यह पार्क के लेवल के बराबर रहेगा।

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