500 व 1000 रुपए का नोट बंद करना जल्दबाजी का निर्णय नहीं: राजनाथ सिंह

  • केजीएमयू में सीएसआर फण्ड से बनेगा विश्राम सदन
  • पावर ग्रिड बनाने के लिए 7.6 करोड़ रुपए की दी गई आर्थिक सहायता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। देश में 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जल्दबाजी भरा निर्णय कहे जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का निर्णय बिल्कुल उचित है। इसमें कहीं भी जल्दबाजी नहीं की गई। कालाधन रखने वालों को 30 सितंबर तक का समय दिया गया था, इसके बाद भी लोग खुद को चालाक साबित करने में जुटे रहे। आखिरकार कालेधन पर रोक लगाने के लिए सरकार को कड़ा फैसला लेना ही पड़ा।

राजनाथ सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय में 69वीं आल इंडिया कामर्स कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में कहा कि ब्लैकमनी पर हमारी सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने सबसे पहले एसआईटी बनायी जो अभी भी काम कर रही है। उसके बाद रियल सेक्टर में कानून बनाया गया। गलत तरीके से कमाई करने वाले लोगों के पास काला धन है और इसकी वजह से गरीबों व इमानदार लोगों को भुगतना पड़ता है। हमारी सरकार ने 500 व 1000 का नोट बंद कर दिया। इससे कालाधन रखने वाले लोग परेशान हैं। यह जल्दबाजी का निर्णय नहीं है। इसमें दूर की सोच छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि मैं फिजिक्स का स्टूडेन्ट हूं लेकिन जानता हूं कि भारत ही नहीं दुनिया भी क्रेडिट, डेबिट और व्यापार से अछूती नहीं है। एशिया में चीन की प्रगति की रफ्तार भी भारत जैसी ही रही है। वर्ष 2014 तक अपने देश का ग्रोथ रेट कम था और हमारी सरकार बनने के बाद विश्व पटल पर भारत की फ ास्टेड ग्रोथ रेटिंग है। वहीं 7.9 जीटीपी ग्रोथ रेट पहुंच चुकी है। आने वाले वर्षों से यह सिंगल नहीं रहेगी और डबल नम्बर में होगी।

दुनिया भर के इनवेस्टर आ रहे इंडिया

राजनाथ सिंह के मुताबिक दुनिया के इन्वेस्टर भारत आ रहे हंै। देश में 52 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है। बाहर के देश यहां आकर्षित हो रहे हैं। हमारी सरकार बनने के पहले से इस पर हम काम कर रहे थे। अभी उतनी उछाल नहीं है, किन्तु कुछ परिवर्तन की शुरुआत हो गयी है। सरकार पारदर्शिता लाने में जुटी है। मुद्रा बैंक के माध्यम से दस लाख तक का ऋण दिया जा रहा है। कई नयी योजनाओं की शुरुआत की गयी है। हमारी सरकार की बैकिंग व सर्विसेज पर भी नजर है। हम गांवों के किसान का विकास चाहते हंै। उन्होंने कहा कि केजीएमयू में विश्राम सदन सीएसआर फण्ड से बनाया जाएगा। साथ ही पावर ग्रिड बनाने के लिए 7.6 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता भी दी गई है। अस्पताल में तीमारदारों के लिए भी एक उचित व्यवस्था होनी चाहिए। 155 बेड का यह विश्राम सदन 4000 मरीजों और तीमारदारों के हिसाब से काफी कम है, इसलिए मैं प्रयास करूंगा कि वह 330 बेडों का हो जाए। ये विश्राम सदन नवम्बर, 2017 तक बनकर तैयार हो जाएगा।

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