4पीएम में खबर छपने के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रशासन, घर पहुंचाया प्रमाण पत्र

  • अस्पताल प्रशासन ने जन्म प्रमाण पत्र के बदले पीडि़त से मांगे थे तीन हजार रुपये

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। राजधानी के कुर्सी रोड स्थित गेटवेल हॉस्पिटल में जन्म प्रमाण पत्र के बदले पीडि़त से तीन हजार रुपये की डिमांड की थी। इस मामले को सात दिसंबर के अंक में 4पीएम ने प्रमुखता से छापा था। खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया और संबंधित अस्पताल को तत्काल पीडि़त व्यक्ति को उसके बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनाकर देने का निर्देश दिया गया। इसलिए अस्पताल प्रशासन ने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनाया और अपना एक कर्मचारी भेजकर पीडि़त के घर पहुंचाया।
गेटवेल अस्पताल में बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर लोगों से हजारों रुपये लिए जाते हैं। इस मामले को 4पीएम ने प्रमुखता से छापा था। हमारे अखबार में खबर छपने के बाद स्वास्थ्य महकमा कुम्भकरणीय नींद से जागा और आनन-फानन में पीडि़त के घर बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र पहुंचाया है। वहीं पीडि़त का कहना है कि जब समाचार पत्र में इनके करतूतों की खबर छपी तब जाकर इन्होंने जन्म प्रमाण पत्र दिया है ,लेकिन मेरे बच्चे का एडमिशन जन्म प्रमाण न मिलने के चलते नहीं हो पाया। इसलिए उसका पूरा एक साल खराब हो गया है।
गौरतलब है कि गेटवेल हॉस्पिटल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ.अर्चना मिश्रा ने अपने द्वारा किये गये इलाज के पर्चे को पहचाने से इन्कार करते हुए जन्म प्रमाण पत्र के लिए मुफ्त में रशीद देने से इन्कार कर दिया था। साथ ही महिला चिकित्सक ने जन्म प्रमाण पत्र के लिए बच्चे के पिता से 3000 रूपये की मांग कर डाली थी। पैसा देने से इन्कार करने पर बच्चे के पिता तथा माता के साथ अभद्रता करते हुए अस्पताल से भगा दिया। रहीम नगर निवासी सुधीर के मुताबिक 4 अगस्त 2013 को उनके बच्चे का जन्म गेटवेल हॉस्पिटल में डॉ.अर्चना मिश्रा की देखरेख में हुआ था। उसके बाद डॉ. अर्चना मिश्रा द्वारा बताये गये प्रारूप के हिसाब से टीकाकरण भी इसी अस्पताल में किया गया। लेकिन बच्चे के जन्म के समय कोई रशीद नहीं दी गयी थी, जिससे बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया जा सके। अब जब उनसे अस्पताल से जारी जन्म प्रमाण पत्र की मांग की गयी तो उन्होंने 3000 रुपये की मांग कर डाली। जबकि अन्य निजी अस्पतालों में जन्म प्रमाण पत्र के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। सुधीर ने बताया कि जन्म के समय से लेकर टीकाकरण तक के सभी दस्तावेज जिसमें डॉ अर्चना मिश्रा के पर्चे के अलावा टीकाकरण और अल्ट्रासाउण्ड रिपोर्ट तक मौजूद है, उसको दिखाने के बाद भी चिकित्सक ने मरीज को पहचानने से इंकार कर दिया। जबकि तीन हजार रुपये देने पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर देने की बात अस्पताल की तरफ से स्वीकार की गई। ऐसी स्थिति में किस आधार पर प्रमाण पत्र बनवाते, ये बात समझ से परे थी। फिलहाल प्रमाण पत्र मिलने पर पीडि़त ने 4पीएम का आभार जताया है।

Pin It