33 वर्षों से लेसा में तैनात है बाबू एसएन दीक्षित

कई बार शिकायतों के बाद भी अधिकारी नहीं करते कार्रवाई

ग बाबू की गलत कार्यशैली की जानकारी के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक तरफ जहां बड़े अधिकारियों का स्थानान्तरण तीन वर्ष के अंदर हो जाता हैं वहीं छोटे कर्मचारी कई दशक तक एक ही पद पर जमे हुए हैं। इसकी हकीकत लेसा कार्यालय में देखने को मिलता है। जहां लगभग 33 वर्षों से एसएन दीक्षित तैनात हैं। लेकिन उनके ऊपर कार्रवाई करने से अधिकारी कतरा रहे हैं। हालत यह है कि मलाईदार पोस्टिंग पर तैनात बाबू के अक्कड़ स्वभाव और भ्रष्टाचार से हर अधिकारी और कर्मचारी परिचित है लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
बता दें कि अगस्त 1983 में लेसा विभाग के अधिष्ठान सेक्शन में जूनियर नोटर ड्राफ्टर (कैश सेक्शन में बाबू) के पद पर एसएन दीक्षित को तैनाती दी गई। लगातार कार्य करने के कारण और समय व्यतीत होने पर श्री दीक्षित का प्रमोशन कर विभाग ने उनको उनको वरिष्ठ नोटर ड्राफ्टर बना दिया। वर्तमान में इसी पद को कार्यालय सहायक तृतीय, द्वितीय व प्रथम कहते हैं। वरिष्ठ नोटर ड्राफ्टर के पद पर प्रमोशन होने के बाद भी श्री दीक्षित को इसी विभाग में ही रखा गया। सूत्रों के माध्यम से कई बार श्री दीक्षित के गलत कार्यों की सूचना अधिकारियों के पास पहुंची लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पद पर बने रहने के लिए श्री दीक्षित ने कई प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों से अपने सम्बन्ध भी बनाये हैं।
छह माह से तीन वर्ष के बीच होना चाहिए स्थानान्तरण

विभागीय अधिकारियों की मानें तो छह माह से लेकर तीन वर्ष तक के बीच में अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानान्तरण हो जाना चाहिए। लेकिन अपने रसूखों के दम पर कर्मचरी और अधिकारी एक ही जगह पर एक ही पद पर जमे रहते है। एक ही पद पर लगातार कई वर्षों से कार्य करने पर भ्रष्टाचार पैदा होने की काफी गुंजाइश होती है।
क्या है अधिष्ठान सेक्शन
अधिष्ठान सेक्शन में कामर्शियल, टेक्निकल, मृतक आश्रित जैसे कई कार्य होते है। जिसमें मेडिकल बिल, सहित कई बिल पास कराये जाते हैं। इसके साथ ही कई ऐसे फाइल होते है जिनके पास कराने पर बाबू को मोटी कमाई होती है।
प्रदीप टंडन ने हटाया
कई बार भ्रष्टाचार की सूचना मिलने पर तत्कालीन मुख्य अभियंता लेसा प्रदीप टंडन ने हटा दिया था। लेकिन प्रदीप टंडन के स्थानान्तरण के बाद ही एसएन दीक्षित फिर वापस अपने जगह पर चला आया। एसएन दीक्षित के ऊपर उक्त कार्रवाई 23 मार्च 2012 और 23 फरवरी 2013 के बीच हुई थी।

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