30 फीसदी आरक्षण मिलना कोरी अफवाह: पीएमएस

  • री-काउंसिलिंग में मिला सिर्फ 15 फीसदी का आरक्षण
  • जूनियर डॉक्टरों के दबाव में सत्र देर से शुरू करना साजिश

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। यूपीपीजीएमई की काउंसिलिंग के बाद रेजीडेंट डाक्टरों की हड़ताल समाप्त होते ही प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) ने पीजी के सत्र में देरी करने पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों एवं मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया के नियमों का उलघंन बताया है। राजधानी के महानगर स्थित पीएमएस संवर्ग के संघ भवन में अध्यक्ष डॉ. अशोक यादव ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेश पर दोबारा काउंसिलिंग हुई है।
डॉ. अशोक यादव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) को सुनने के बाद दोबारा से काउंसिलिंग कराने का आदेश देकर तय प्रावधानों के अनुसार पीएमएस के डॉक्टरों को पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के आदेश दिये थे। उन्होंने केजीएमयू के रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल समाप्ति के लिए एक माह सत्र देर से शुरू करने के फैसले को गलत बताया है। साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि एमसीआइ का 31 मई के बाद से हरहाल में पीजी का सत्र शुरू करने का नियम है, बावजूद सिर्फ जूनियर डॉक्टरों के दबाव में सत्र देर से शुरू करने का फैसला गलत है । डॉ. अशोक यादव ने कहा कि करीब 14 राज्यों में ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टरों को 40 से लेकर 60 फीसद तक का आरक्षण दिया जा रहा है। यूपी में तो अभी 30 फीसद तक का लाभ नहीं मिला है। री- काउंसिलिंग में सिर्फ 15 फीसद के आस-पास संवर्ग के डॉक्टरों को आरक्षण का लाभ हासिल हुआ है। यदि पूरा 30 प्रतिशत का आरक्षण मिलता तो अभी 108 सीटों पर दाखिला मिला है। तब 200 सीटों से ज्यादा पर दाखिला मिलता।

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