स्ट्रीट वेंडर्स कानून लागू होने के बाद भी पटरी दुकानदारों को जारी नहीं किए जा रहे लाइसेंस

पटरी दुकानदारों का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भूल गये अधिकारी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

captureलखनऊ। राजधानी में स्ट्रीट वेंडर्स कानून 2014 लागू होने के बावजूद आज तक पटरी दुकानदारों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। नगर निगम हमेशा से इन छोटी पूंजी वाले दुकानदारों को निशाना बनाता आया है। इसलिए शहर के फुटपाथों पर दुकान लगाने वाले पटरी दुकानदारों में हमेशा नगर निगम के प्रवर्तन दल की कार्रवाई का डर बना रहता है।
भारत सरकार ने पटरी दुकानदारों की रोजी-रोटी को ध्यान में रखकर स्ट्रीट वेंडर्स कानून 2014 लागू कर दिया। लेकिन अभी तक पटरी दुकानदारों को उनका हक नहीं मिल सका है। इसको लेकर कई बार नगर निगम के अधिकारियों और पटरी दुकानदारों की बीच बैठकें भी हो चुकी है और हजारों दुकानदारों का रजिस्ट्रेशन भी कराया गया, लेकिन इसके बाद फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उधर निगम अधिकारी इस पर कुछ दिक्कतों के आने का बहाना बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

दो लाख से अधिक पटरी दुकानदार

शहर में दो लाख से अधिक पटरी दुकानदार लंबे समय से वेंडिंग लाइसेंस की आस में बैठे हैं। लाइसेंस के लिए इन गरीब दुकानदारों ने नगर निगम में बीते 6 माह पूर्व 200 रुपये शुल्क जमा करके रजिस्ट्रेशन कराया था लेकिन आज तक इनको वेंडिंग जोन में दुकान लगाने के लिए लाइसेंस जारी नहीं किए गए हैं, जबकि बीते जनवरी माह में शहर के स्ट्रीट वेंडर्स और नगर निगम अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई थी, जिसमें सडक़ किनारे पीली पट्टी खीच कर दुकानदारों की हद तय करने के साथ ही उनको लाइसेंस दिए जाने की बात कही गई थी। लाइसेंस जारी करने के लिए नगर निगम ने तैयारियां भी पूरी कर ली है, इसी क्रम में बीते 25 मई 2016 को पटरी दुकानदारों में लाइसेंस जारी किए जाने की आस जगी, लेकिन राणा प्रताप मार्ग के चौड़ीकरण के मामले की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अधिकारियों ने लाइसेंस जारी करने का कार्य शुरू होने से पहले ही रद कर दिया था। तब से लेकर आज तक लाइसेंस वितरण का यह कार्य ठण्डे बस्ते में पड़ा है।

साप्ताहिक बाजारों की दुकानों को जारी होने थे लाइसेंस

बता दें कि इस कानून के पालन के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर पीली पट्टी खीच कर वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन के बोर्ड लगाए गए थे। यही नहीं उक्त लाइसेंस का लाभ साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाने वालों को भी दिया जाना था, लेकिन निगम अधिकारियों के रवैये के चलते वह भी ठंडे बस्ते में चला गया।
20 हजार पटरी दुकानदारों का हुआ था रजिस्ट्रेशन
नगर निगम के सभी आठों जोनों में लगभग 20 हजार पटरी दुकानदारों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी थी। पटरी दुकानदारों को दुकान देने के बदले लिए गए रजिस्ट्रेशन शुल्क से लाखों रुपये का राजस्व भी मिला था। लेकिन पटरी दुकानदारों के लाइसेंस का मामला अभी तक हल नहीं हुआ है। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि अभी कुछ बिंदुओं पर समस्या आ रही है, जल्द ही इनका समाधान कर पटरी दुकानदारों को लाइसेंस जारी किए जाएंगे। लेकिन इस सबके बीच पटरी दुकानदारों की रोजी-रोटी का सवाल आज भी पहाड़ बनकर सामने खड़ा है। सूत्रों की माने तो पटरी दुकानदारों को अधिकारी लाइसेंस देना ही नहीं चाहते हैं, क्योंकि यदि पटरी दुकानदारों को वैध बनाने का काम कर दिया गया, तो शहर में अतिक्रमण को बढ़ावा मिलेगा। इससे शहर में लगने वाले जाम की स्थिति और अधिक भयावह हो जायेगी। यही कारण है कि पटरी दुकानदारों को लाइसेंस देने में नगर निगम के अधिकारी हीला हवाली कर रहे हैं।

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