250 मीटर चलने में लग जाता है डेढ़ घंटा

अमीनाबाद में वन वे व्यवस्था लागू होने के बाद बढ़ीं मुश्किलें
सडक़ों पर फैले अतिक्रमण की वजह से लग रहा लंबा जाम

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के मकसद से शुरू वन-वे प्लान अमीनाबाद से गुजरने वाले राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही है। अमीनाबाद क्षेत्र में 250 मीटर की दूरी तय करने में डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। इसको पुलिस विभाग और नगर निगम के अधिकारी बखूबी जानते हैं। इसके बावजूद सडक़ों से अतिक्रमण हटवाने की ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जो कि घंटों जाम लगने की प्रमुख वजह है।
राजधानी को खूबसूरत और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की कोशिशों में सडक़ों के किनारे फैला अतिक्रमण बाधक बन रहा है। इस कारण अमीनाबाद क्षेत्र में 18 जनवरी से शुरू किया गया वन-वे प्लान फ्लॉप साबित हो रहा है। इस क्षेत्र में अमीनाबाद चौराहे से जुडऩे वाले किसी भी मार्ग पर 250 मीटर की दूरी तय करना मुसीबत भरा काम होता है। यहां दोपहर 11 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक भयंकर जाम लगा रहता है। इन रास्तों से बाइक, कार और रिक्शा लेकर गुजरने वालों को घंटों जाम में जूझना पड़ता है। इसी प्रमुख वजह सडक़ों के दोनों किनारों पर लगने वाली दुकानें और बाजार में खरीदारी करने वाले लोगों की भीड़ है। जो पूरा का पूरा रास्ता घेर लेती है। इसके अलावा लोग सडक़ के किनारे ही अपनी गाडिय़ां भी पार्क कर देते हैं। जो सडक़ पर लगने वाले जाम का प्रमुख कारण बन रही है। इस जाम की वजह से लोगों को 250-500 मीटर की दूरी तय करने में भी डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। जबकि अमीनाबाद में वन-वे व्यवस्था लागू करने के पीछे प्रशासन और यातायात पुलिस का मकसद लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने का था। ऐसे में प्रशासन की मंशा को फलीभूत करने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण हटवाने की काïर्रवाई करनी होगी और इन सडक़ों पर दोबार अतिक्रमण न हो, इसको लेकर पुलिस विभाग के अधिकारियों को सख्त कदम उठाना चाहिए।
प्रमुख बाजारों में अतिक्रमण बड़ी समस्या
शहरी क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में नगर निगम की तरफ से अतिक्रमण हटवाने के बाद दोबारा अतिक्रमण होने की समस्या नासूर बनती जा रही है। इसकी जद में हजरतगंज, अमीनाबाद, नाजा मार्केट, नाका मार्केट, कैसरबाग, लालबाग, आलमबाग, चौक, नौबस्ता, ठाकुरगंज, कपूरथला, मुंशीपुलिया, टेढ़ी पुलिया, पॉलीटेक्निक, महानगर, इन्दिरानगर और तेलीबाग समेत कई प्रमुख इलाके हैं। इन इलाकों में नगर निगम के जोनल अधिकारियों की तरफ से अनेकों बार अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई की गई। इस प्रक्रिया के तहत सैकड़ों अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण हटवाये गये लेकिन अतिक्रमण दस्ता लौटने के कुछ ही समय बाद दोबारा अतिक्रमण हो गया। यह समस्या नगर निगम के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनती जा रही है, जिसका निदान नगर निगम के अधिकारियों की समझ में भी नहीं आ रहा है। गौरतलब हो कि नगर निगम की तरफ से अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई के बाद हमेशा पुलिस विभाग को पत्र लिखकर दोबारा अतिक्रमण न होने देने की अपील की गई। इसके साथ ही पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी अपने मातहतों को कड़े शब्दों में कहा कि दोबारा अतिक्रमण होने पर संबंधित क्षेत्र के पुलिस चौकी प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी लेकिन ये आदेश ढाक के तीन पात साबित हुए। शहर के किसी भी क्षेत्र में सडक़ों पर दोबारा अतिक्रमण होने के मामले में पुलिस चौकी प्रभारी या थाना प्रभारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। जो अतिक्रमण नहीं हट पाने की प्रमुख वजह बनता जा रहा है। ऐसे में प्रशासन को वन-वे व्यवस्था लागू करने के साथ ही सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण हटवाने का काम भी गंभीरतापूर्वक करना चाहिए।

गलियों के रास्ते पहुंच रहे अमीनाबाद
दरअसल नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर की प्रमुख सडक़ों और चौराहों से अतिक्रमण हटवाना है। इसमें नगर निगम की टीम को अक्सर दुकानदारों, आम जनता और अवैध कब्जेदारों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है। अब तक अनेकों बार नगर निगम के प्रवर्तन दल को आम जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ा है। इसीलिए प्रशासन ने वन-वे व्यवस्था लागू करके अमीनाबाद में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को सुगम करने का प्रयास किया। इन अधिकारियों को लगा कि वन-वे व्यवस्था लागू होने से लोग अमीनाबाद तक दो पहिया और चार पहिया वाहन लेकर नहीं पहुंच पायेंगे लेकिन फिर भी गलियों से होते हुए लोग मार्केट तक पहुंच रहे हैं। इस वजह से गलियों में भी भंयकर जाम लगने लगा है। अमीनाबाद क्षेत्र में बने पार्किंग स्टैण्ड में भी खूब गाडिय़ां खड़ी होती है। इसके बावजूद सडक़ों पर दोपहर से लेकर शाम तक भयंकर भीड़ रहती है। इस दौरान वाहन लेकर गुजरना तो दूर की बात है, इंसान का पैदल चल पाना ही मुश्किल हो जाता है।

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