22 करोड़ की आबादी पर मात्र एक बर्न यूनिट

बर्न यूनिट न होने की वजह से आग और तेजाब से जले मरीजों को होती है परेशानी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश की करीब 22 करोड़ की आबादी पर मात्र एक बर्न यूनिट राजधानी के सिविल अस्पताल में स्थित है। करीब 50 बेड की ये बर्न यूनिट अक्सर फु ल रहती है, जिससे आग और तेजाब से जले मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
साल 2004 में 10 बेड से शुरू हुई इस बर्न यूनिट आज 50 बेड में तब्दील हो चुकी है। इसी के साथ बर्न यूनिट में आने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। बर्न यूनिट फु ल होने के चलते आग से जले मरीजों को बर्न वार्ड में रखना पड़ता है जिससे मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों को इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
बताते चलें कि साल 2004 सिविल अस्पताल करीब 50 बेड की बर्न यूनिट प्रदेश में मात्र एक बर्न यूनिट है। पहले ये बर्न यूनिट केजीएमयू में बननी थी लेकिन केजीएमयू की ओर से इस यूनिट के लिए जगह चयनित करने में देरी के कारण सरकार की ओर से सिविल अस्पताल में बर्न यूनिट के निर्माण का आदेश पारित किया गया। केजीएमयू की ओर से आग व तेजाब से जले पीडि़तों की समस्या को देखते हुए बर्न यूनिट के लिए सरकार को 2009 से प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। केजीएमयू में एसिड अटैक से पीडि़त महिलाओं को बेहतर इलाज देने के लिए केजीएमयू में अगले वर्ष प्रदेश की दूसरी बर्न यूनिट खुलेगी। महिला समाज कल्याण विभाग की ओर से इसके लिए साढ़े सात करोड़ का बजट जारी कर दिया गया है। बजट मिलने के बाद केजीएमयू प्रशासन यूनिट को शुरू कराने की तैयारी में लगा है।
कुलपति प्रो. रविकांत ने बताया कि महिला समाज कल्याण विभाग की ओर से इसके लिए 7.5 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। बजट मिलने के बाद बर्न यूनिट के निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा कराने की तैयारी है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एके सिंह ने बताया कि बर्न यूनिट का प्रपोजल काफ ी समय से चल रहा था। बर्न यूनिट में बेहतर इलाज के लिए 20 बेड पर मरीजों की भर्ती की सुविधा के साथ ओटी और वेंटिलेटर से लैस किया जाएगा। आग और तेजाब से पीडि़त मरीजों के लिए बर्न यूनिट में सारी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। ओटी, आईसीयू से लेकर तमाम प्रकार की सुविधाये बर्न यूनिट में मौजूद होती हैं। जानकारों का कहना है कि बर्न यूनिट को संचालित करने के लिए करीब पांच फैकेल्टी, 20 डॉक्टर, 40 पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य संसाधनों की जररूत पड़ेगी। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

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