2014: सात सौ गुंडों को पैदा किया पुलिस ने

गणेश जी वर्मा
लखनऊ। मात्र तीन वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो राजधानी में लगभग पांच हजार से अधिक गुंडे मौजूद हैं। यह आंकड़ा पुलिस का ही है। सवाल उठता है कि यदि राजधानी में पांच हजार से अधिक गुंडे मौजूद हैं तो आम जनता कहां सुरक्षित रहेगी। दूसरी तरफ देखें तो राजधानी पुलिस ने वर्ष 2014 में रिकॉर्ड बनाते हुए लगभग 700 गुंडों को पैदा कर दिया। यह आंकड़ा स्वयं पुलिस का ही है। इसलिए इस आंकड़े पर चकित होने की जरूरत नहीं है। जबकि पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो 79 गुंडे घट गए। ऐसे में सवाल उठता है कि वर्ष 2014 में एकाएक इतने गुंडे कैसे पैदा हो गए। गौर किया जाए तो स्वाभाविक है कि इन गुंडों को पैदा करने में पुलिस ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा होगा।
वर्ष 2014 में पुलिस ने गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 1832 लोगों को गुंडों की उपाधि से नवाज दिया। जबकि वर्ष 2013 में यह कार्रवाई 1149 लोगों पर की गई। वहीं वर्ष 2012 में 1228 लोगों पर गुंडा एक्ट लगाया गया। आंकड़े बता रहें हैं कि वर्ष 2014 में 683 गुंडों की राजधानी में वृद्धि हो गई। जबकि वर्ष 2013 में 79 गुंडे घट गए। ऐसे में सवाल उठता है कि वर्ष 2014 में की गई कार्रवाई कहीं दबाव में तो नहीं किया गया है या फिर पुलिस अपने मर्जी के हिसाब से जब चाहे जितना चाहे उतना गुंडों को पैदा कर देती है।
ट्रॉसगोमती क्षेत्र के साथ ही गाजीपुर थाना गुंडों में प्रथम स्थान
राजधानी के ट्रॉसगोमती क्षेत्र में गुंडों की संख्या सबसे अधिक है। ट्रॉसगोमती में वर्ष 2014 में 641 गुंडे पैदा हुए। जबकि इसी क्षेत्र के गाजीपुर थाने से 105 गुंडें पैदा हुए। राजधानी के सभी थानों में गाजीपुर इस मामले में प्रथम स्थान पर है।
मानकनगर थाना क्षेत्र में सबसे कम गुंडे
मानकनगर थाना क्षेत्र में सबसे कम गुंडे हैं। वर्ष 2014 में मात्र पांच, वर्ष 2013 में शून्य जबकि वर्ष 2012 में 11 लोगों पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।

 

 

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