20-30 फीसद कम होगी बारिश, फसलों को संकट

Captureखरीफ की फसल के लिये उत्पन्न हो सकती हैं दिक्कतें
पहले ही बर्बाद फसलों के मुआवजे के नाम पर बरती गई अनियमितता

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। वैसे तो पहले ही अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों की आधे से ज्यादा फसल को बर्बाद कर दिया है। ऊपर से इस बार कमजोर मानसून की खबर सुन कर किसान बहुत दहशत में हैं। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार बरसात औसत बारिश से 20-30 फीसद तक कम होगी। जिससे फसलें कमजोर होने की आशंका है।
दहशत की वजह यह है कि कहीं सूखे की वजह से फिर उनकी फसलें खराब न हो जायें। क्योंकि जून तक मुख्यत: धान की फसल बोई जाती है और इसको अधिक से अधिक मात्रा में पानी की जरूरत होती है। किसानों से हुयी बात चीत में उन्होंने कहा कि किसान के पास उसकी खेती ही उसके लिए रोजी रोटी का जरिया होती है और अगर उसकी फसल खराब हो जाती है तो आत्महत्या के शिवा किसानों के पास और कोई रास्ता नहीं बचता है। आज भी किसान गरीब होने के कारण जमीदारों और बैंकों से ऋण पर पैसा लेते हैं और फसल बर्बाद होने पर उसकी अदायगी नहीं कर पाते हैं। सरकारों का आलम यह है कि चुनाव के समय तो सभी पार्टियां अपने आप को किसान की बड़ी हितैषी बताती हैं लेकिन हकीकत आप लोगों के सामने है कि मुआवजा देने के समय दो सौ, तीन सौ रुपये का चेक देकर किसानों के साथ बहुत बड़ा मजाक किया जाता है। उनकी इसी कारगुजारी की बदौलत आज लोग किसानी छोड़ कर मजदूरी करने के लिए विवश हैं। किसानों का कहना है कि मजदूरी में कम से उनकी दिन भर की दिहाड़ी तय होती है पर किसानी करने में कभी बाढ़ तो कभी सूखा जैसी प्राकृतिक आपदायें उनकी लाखों रुपये की तैयार फसल पर पानी फेर जाती हैं।
जे.पी. गुप्ता प्रमुख निदेशक मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मौसम विभाग द्वारा बारिश औसतन सामान्य से 25 से 30 प्रतिशत कम होने की आशंका जातायी जा रही है । उन्होंने ने बताया कि एक निश्चित अन्तराल में अगर यह बारिश होगी तो इसमे परेशान होने वाली कोई बात नहीं है। बुन्देलखण्ड का हाल पूछने पर उन्होंने कहा कि वो भी इसी दायरे के अन्तर्गत आयेगा। किसानों के लिए सुझाव से इस बात का जवाब देते हुये श्री गुप्ता ने कहा कि विभाग की तरफ से हर मंगलवार और शुक्रवार को किसानों के लिए एडवाईजरी प्रत्रिका का प्रकाशन किया जाता है। किसान इससे लाभान्वित हो सकते हैं।

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