12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई कि सीएम के नाम पर अफसर क्यों करते हैं हस्ताक्षर

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सीएम के नाम पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों द्वारा हस्ताक्षर करने के मामले पर 12 जनवरी को सुनवाई नियत की है। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर की थी और फिर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी।
नूतन ठाकुर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने का निर्णय किया है। अब तक तीन बार सुनवाई हो चुकी है। 2 दिसंबर की सुनवाई के समय उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता रवि प्रकाश महरोत्रा के अनुरोध पर कोर्ट ने इसकी अगली सुनवाई 12 जनवरी को नियत किया है। उन्होंने अपने पीआईएल में कहा था कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पर यह कहते हुए हस्ताक्षर करना कि ‘मुख्यमंत्री ने अनुमति दे दी है’ अवैध है जिसका व्यापक दुरुपयोग संभव है। इसलिए मामले की गंभीरता को लेकर व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने यह प्रश्न रखते हुए कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 166 (3) के अंतर्गत बनाए गए रूल्स ऑफ़ बिजिनेस के विपरीत तो नहीं है, इस मामले को सुनवाई हेतु वृहत बेंच को सुनवाई के लिए संदर्भित किया था पर वृहत बेंच में सुनवाई होने के पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दिया है। बता दें कि प्रदेश के सीएम कार्यालय में यह परंपरा काफी समय से चल रही है कि जिसमें उनके अफसर सीएम के नाम पर फाइलों और पत्रों पर दस्तखत कर देते हैं। जिससे लोगों में भ्रम बना रहता है। भले ही अब नूतन ठाकुर ने इस मामले पर पीआईएल दाखिल की हो, लेकिन यह मामला काफी समय से चर्चा में रहा है।

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