हमने गायत्री प्रजापति के अवैध खनन के कारनामों और पंचायती राज विभाग के भ्रष्टाचार का किया खुलासा, सीएम ने कर दिया दोनों विभागों के मंत्रियों को बर्खास्त

इसे कहते हैं शानदार अखबार और तीखी खबरों का अस

  • 4पीएम की खबरों का असर खनन मंत्री गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह बर्खास्त
  • सीएम बहुत पहले कर देते बर्खास्त पर परिवार के कुछ लोगों को मैनेज कर रखा था गायत्री ने
  • गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला मामूली प्रापर्टी डीलर गायत्री बन गया अरबपति
  • अपने गलत कारनामों से पूरी सरकार की किरकिरी करा रहा था गायत्री प्रजापति
  • भ्रष्टाचारी को संरक्षण देना भारी पड़ गया पंचायती राज मंत्री को
  • 14वें वित्त आयोग के करोड़ों रुपये की लालच में प्रमुख सचिव पंचायती राज ने जारी किया था विवादित शासनादेश

संजय शर्मा
11लखनऊ। आखिर 4पीएम में छपी खबरों का बहुत बड़ा असर हो ही गया। हम खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के काले कारनामों से जुड़ी खबरों को लगातार छाप रहे थे। सीएम अखिलेश यादव ने 4पीएम में छपी खबरों को संज्ञान में लेकर गायत्री को बर्खास्त करने का मन बहुत पहले ही बना लिया था लेकिन शातिर दिमाग गायत्री ने परिवार के कुछ लोगों को मैनेज कर अपनी कुर्सी बचा ली थी। इसी तरह 14वें वित्त आयोग के पैसे को लेकर जिस तरह प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी ने एक विवादित शासनादेश जारी किया और उसमें करोड़ों रुपये की हेराफेरी की योजना बनाई थी। उसको भी हमने प्रमुखता से छापा। इस योजना के खिलाफ प्रदेश भर में प्रदर्शन किया गया लेकिन पंचायती राज विभाग के कैबिनेट मंत्री राज किशोर सिंह ने मामले में चुप्पी साध रखी थी। लेकिन जब हकीकत सामने आई, तो मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने विवादित शासनादेश रद कर दिया। इस मामले को भी 4पीएम ने प्रमुखता से छापा था। इन दोनों मामलों की सीएम ने अपने स्तर से पड़ताल कराई। इसमें सत्यता पाये जाने पर दोनों मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया।

गायत्री की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। वह कुछ साल पहले गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला मामूली प्रापर्टी डीलर था। सपा मुखिया ने पिछले विधानसभा चुनाव में उनको अमेठी से टिकट दिया और सपा की सरकार बनने पर गायत्री को पहले राज्यमंत्री और उसके बाद कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। कैबिनेट मंत्री बनते ही गायत्री ने पूरे प्रदेश में अवैध खनन को बेतहाशा बढ़ावा देना शुरू कर दिया। प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध खनन होने लगा। सूबे का जो भी अफसर अवैध खनन रोकने की कोशिश करता, उसके पास गायत्री का फरमान पहुंच जाता। इसलिए खनन के क्षेत्र में गायत्री ने भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़ डाले। जो शख्स कुछ वर्षों पहले गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करता था, वह करोड़ों की सम्पत्ति का मालिक बन बैठा।

गायत्री के काले कारनामों को सबसे पहले 4पीएम ने प्रमुखता से छापा। हमारी खबरों को संज्ञान में लेकर मुख्यमंत्री ने गायत्री के पेंच कसे और सूबे में अवैध खनन पर रोक लगाने का अधिकारियों को निर्देश भी दिया। सीएम गायत्री को अपने मंत्रिमण्डल से हटाने का निर्णय भी कर चुके थे लेकिन उनके परिवार के कुछ लोगों को मैनेज कर गायत्री ने अपनी कुर्सी बचा ली। गायत्री की वजह से सरकार की काफी किरकिरी हुई। गायत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायतें हुईं और नूतन ठाकुर की शिकायत राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बन गई। प्रदेश में अवैध खनन का मामला होईकोर्ट तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने प्रदेश में हो रहे अवैध खनन पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुये 28 जुलाई 2016 को मामले की सीबीआई जांच कराने का आदेश कर दिया। खनन विभाग के प्रमुख सचिव गुरदीप सिंह भी अवैध खनन को लेकर खासे बदनाम हो गये हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में जो शपथपत्र दिया उसने हाईकोर्ट के जजों को और नाराज कर दिया। नतीजा अवैध खनन की सीबीआई जांच के रूप में सामने आया। गायत्री दबाव बना रहे थे कि सरकार इस जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करें। चुनाव से ठीक पहले हाईकोर्ट के इस आदेश से राजनीतिक गलियारों में हडकंप मच गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव में गायत्री और अवैध खनन का मुद्दा उठाने की बात भी कह दी थी। इसलिए सबको मालूम है कि अगर सीबीआई ने अपनी जांच सही तरीके से कर दी तो गायत्री का जेल जाना तय है।

पंचायती राज में करोड़ों रुपये की बंदरबांट का रचा गया था खेल

पंचायती राज विभाग में विवादित शासनादेश जारी कर 14वें वित्त आयोग के पैसों की बंदरबांट का खेल रचा गया। इसमें पंचायतों के विकास के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपये को एकल हस्ताक्षर से निकालने का शासनादेश जारी किया गया लेकिन पूर्व में दो अधिकारियों के हस्ताक्षर के पंचायतों के विकास का पैसा निकाला जाता था। इसके साथ ही सीडीओ और डीएम को पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों का सीआर लिखने का अधिकार खत्म कर दिया गया था। शासन स्तर से नियुक्त होने वाले खण्ड विकास अधिकारी के अधीन काम करने के लिए पंचायती राज विभाग के अधिकारी बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। इस गलत शासनादेश के विरोध में कर्मचारियों से घूस लेकर प्रदेश स्तर पर आंदोलन चलाया गया और विभाग के कामकाज को प्रभावित करने का काम किया गया। लेकिन 4पीएम ने पंचायती राज विभाग को अलग करने की असली वजह के प्रमुखता से छापा। इससे बौखलाये लोगों ने हमारे अखबार की मान्यता रद करने का लेटर भी मुख्यमंत्री को दिया था लेकिन हमने हमेशा सच्चाई का साथ दिया और विवादित शासनादेश रद हो गया। आज मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग के मंत्री राज किशोर को भी बर्खास्त करके हमारी खबरों की सत्यता पर मुहर लगा दी है। यह निश्चित तौर पर 4पीएम के सत्यता की जीत है।

गायत्री के गुर्गों ने हमारे हाकर पर किया था हमला

गायत्री के काले कारनामों की खबरों ने 4पीएम ने लगातार प्रमुखता से छापा है। हमारी खबरों के बौखलाये गायत्री के गुर्गों ने 4पीएम के हॉकर पर हमला भी कर दिया था, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गया था। इसके बाद भी हमने गायत्री के अवैध खनन के कारनामों का खुलासा अपने अखबार के माध्यम से करना जारी रखा। आखिरकार मुख्यमंत्री गायत्री को बर्खास्त कर हमारी खबर की सत्यता पर मुहर लगा दी।

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