हनीट्रैप: बात निकली है तो दूर तलक जाएगी

राजनीति में यदि एक बार किसी पर झूठा आरोप भी लग जाता है तो उसके नुकसान उठाने ही पड़ते हैं। इस समय जब भाजपा विभिन्न पार्टियों के असंतुष्टï नेताओं को पार्टी में लाने में जुटी है, वरुण की आड़ में विपक्ष उन्हें छोडऩे वाला नहीं। यानी बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। अब देखना यह है कि वरुण इसका सामना कैसे करते हैं।

sanjay sharma editor5भाजपा के तेजतर्रार नेता व सांसद वरुण गांधी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। उन पर रक्षा जानकारी लीक करने का आरोप है। स्कॉपीन पनडुब्बी मामले के व्हिसलब्लोअर एडमंड्स एलन ने पीएमओ कार्यालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि आम्र्स डीलर अभिषेक वर्मा ने वरुण को हनीट्रैप में फंसाकर रक्षा संबंधी गोपनीय जानकारियां हासिल की। सबूत के लिए दर्जनों तस्वीरें भेजी गई हैं। पत्र की एक कॉपी रक्षा मंत्री व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर को भी भेजी गई है। एलेन का यह पत्र स्वराज अभियान के नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने सार्वजनिक किया है। पत्र 16 सितंबर का बताया जा रहा है। हालांकि वरुण ने आरोपों को खारिज करते हुए चुनौती दी है कि यदि इसमें एक फीसदी भी सच्चाई मिली तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने भूषण और प्रशांत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात भी कही है। वर्मा ने भी इसको फर्जी बताया है। ये वही एलन हैं जो कभी वर्मा के एजेंट हुआ करते थे। एलन ने 2012 में कई दस्तावेज शेयर किए थे, जिसके आधार पर अभिषेक पर कई मामले दर्ज हुए। इनमें रक्षा मंत्रालय से जुड़े गोपनीय दस्तावेज लीक मामला भी शामिल है। सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश चुनाव के ठीक पहले अपने ऊपर लगे इन आरोपों से वरुण कैसे निपटेंगे? क्या पत्र वरुण की छवि खराब करने या भाजपा को जवाब देने के लिए जारी किया गया? बोफोर्स तोप मामले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। विपक्ष ने तब इसका खूब फायदा उठाया था। वैसे भाजपा में वरुण को लेकर अंदरखाने एक राय नहीं है। एक गुट उनको उत्तर प्रदेश का नेतृत्व देने की मांग अक्सर करता है तो दूसरा उनके खिलाफ लामबंदी। यह लामबंदी सुल्तानपुर में वरुण की रैली में भी दिखी। यहां उनके समर्थकों ने खुलेआम वरुण को प्रदेश का मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर नारेबाजी तक की। उस समय वरुण ने समर्थकों को ऐसा करने से मना किया था। जाहिर है वरुण भाजपा में खुद को लेकर चल रही खींचतान से अच्छी तरह वाकिफ हैं और चुनाव के पूर्व कोई गलती करने के मूड में नहीं हैं। वैसे भी राजनीति में यदि एक बार किसी पर झूठा आरोप भी लग जाता है तो उसके नुकसान उठाने ही पड़ते हैं। इस समय जब भाजपा विभिन्न पार्टियों के असंतुष्टï नेताओं को पार्टी में लाने में जुटी है, वरुण की आड़ में विपक्ष उन्हें छोडऩे वाला नहीं। यानी बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। अब देखना यह है कि वरुण इसका सामना कैसे करते हैं।

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