हकीकत छुपाने में माहिर है राजधानी पुलिस

  • मलाइदार थानों पर तैनात पुलिसकर्मी आला अधिकारियों को भी नहीं देते जानकारी

 आमीर अब्बास

captureलखनऊ। राजधानी की हाईटेक पुलिस क्राइम की घटनाओं को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में मलाईदार थानों पर तैनात पुलिसकर्मी खुद को बेहतर साबित करने और संवेदनशील घटनाओं को छुपाने में माहिर हो चुके हैं। इन वारदातों की जानकारी पत्रकारों और आला अफसरों से भी छिपाई जाती है। ऐसा ही एक मामला सआदतगंज थाना क्षेत्र का है। जहां फेसबुक पर कमेंट को लेकर आमने-सामने आए एक ही समुदाय के दो लोगों के बीच गैंगवार होते होते बच गई। लेकिन पुलिस कर्मियों ने थाने में क्रास एफआईआर होने के बाद भी उच्चाधिकारियों को घटना के बारे में जानकारी नहीं दी। इतना ही नहीं घटना का विवरण पूछने पर मीडिया के लोगों को भी वे गुमराह करते रहे। जब मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा, तो उन्हें क्षेत्र का माहौल न बिगड़े इसका हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश की गई। लेकिन हकीकत ये है कि मामला अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है।
फेसबुक पर किसी मुद्दे पर कमेंट को लेकर एक ही समुदाय के दो आमने-सामने आ गए थे। एक पक्ष का आरोप था कि फेसबुक पर पोस्ट किए गए मैटर पर दूसरे पक्ष के लोगों ने भद्दे कमेंट किए हैं। इसलिए कश्मीरी मोहल्ला वार्ड की पार्षद साईमा लाईक आगा के देवर की तरफ से सआदतगंज कोतवाली में 5 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई। वहीं दूसरे पक्ष के गोरे की तहरीर पर भी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस दोनों पक्ष के लोगों की क्रास एफआईआर दर्ज कर शांत हो गई है। लेकिन अंदरखाने दोनों पक्षों के बीच एक दूसरे को सबक सिखाने की प्लानिंग की जा रही है। ऐसे में पुलिस को ठोस ऐक्शन लेने की जरूरत है? जबकि पुलिस ने बवाल करने की नीयत से आमने-सामने आने वालों को शांत करवाकर मामले को रफा-दफा समझ लिया है। मुकदमा दर्ज करने के बाद किसी को गिरफ्तार नहीं किया है जबकि दोनों पक्ष के लोग मामले को हवा देने की फिराक में जुटे हैं। कश्मीरी मोहल्ला वार्ड की पार्षद साईमा लईक आगा के देवर रिजवान आगा के मुताबिक उनकी फेसबुक वाल पर सरवर, सफदर, असजर, मेंहदी व गोरे ने भद्दे और आपत्तिजनक शब्द लिखे थे, जिसे पढऩे के बाद उन्होंने फोन करके चारों के कमेंट पर आपत्ति जताई। लेकिन चारों लोगों ने मामले पर खेद व्यक्त करने के बजाय फोन पर धमकाना शुरू कर दिया। इसके बाद नूरबाड़ी सआदतगंज निवासी रिजवान आगा व गोरे की तहरीर पर पुलिस ने एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। हालांकि पुलिस के लिए मामूली सी दिखने वाली इस घटना को क्ष़ेत्र के तमाम लोग गैंगवार की तरह से देख रहे हैं। स्थानीय लोंगो ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शनिवार को आमने सामने आए दोनों ही पक्ष मजबूत हैं। यदि पुलिस समय पर न आती तो यहां गंैगवार की तरह के हालात बन सकते थे, जिसमें कई लोंगो को गंभीर चोटें भी आ सकती थीं। फिर भी पुलिस ने मामले को हल्के में ही लिया है। इस मामले में जब एसओ सआदतगंज शशिकान्त यादव से संवाददाता ने बात की तो उन्होंने घटना को मामूली बताते हुए मुकदमों का विवरण बताने से भी इंकार कर दिया। ये कह कर मुद्दे को टाल दिया कि मामूली घटना है, अभी मैं व्यस्त हूं बाद में जानकारी दूंगा।

एएसपी को भी नहीं लगी भनक

एएसपी पश्चिम जय प्रकाश को क्षेत्र में गैंगवार जैसे हालात बनने के बाद भी वारदात की भनक तक नहीं लगी। इस संबंध में उन्होंने कहा कि मेरे पास ऐसी किसी भी घटना की जानकारी नहीं है। लेकिन जब उन्होंने अपने मातहतों से पूछा तो पूरे मामले के बारे में पता चला। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एएसपी ही अपने क्षेत्र में तैनात थाना प्रभारियों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं और उन्हें ही क्षेत्र में होने वाली घटनाओं की जानकारी नहीं दी जा रही है तो कोई बड़ी घटना होने और उपद्रवियों से निपटने में पुलिस कितनी एकजुटता दिखा सकेगी। जो अधिकारी घटनाएं छुपाने में माहिर हैं, वे पारदर्शी रिपोर्ट कहां से तैयार करेंगे।

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