हंगामेदार रही एमओयू रूट की परियोजनाओं पर हुई सुनवाई

  • आयोग अध्यक्ष ने पावर कारपोरेशन व बिजली कंपनियों से किए सवाल जवाब

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समझौता ज्ञापन रूट के तहत परियोजनाओं को लगाने के लिए और समय देने के मामले में हुई सुनवाई हंगामेदार रही। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जहां पावर कारपोरेशन व निजी कंपनियों को घेरा वहीं आयोग अध्यक्ष ने भी उनसे सवाल जवाब किए। आयोग अध्यक्ष ने कारपोरेशन व कंपनियों से यह भी पूछा कि जब बिडिंग रूट से सस्ती दरें मिल रहीं हैं तो एमओयू रूट पर सहमति क्यों दी जाए। फिलहाल सुनवाई के बाद आयोग ने अपने फैसले को सुरक्षित कर लिया है।
समझौता ज्ञापन रूट (एमओयू ) के तहत प्रदेश में लगने वाली नौ में से छह परियोजनाओं के सप्लीमेंटरी पावर परचेज एग्रीमेन्ट (एसपीपीए) की सेवा शर्तों को 18 माह का द्वितीय विस्तार दिये जाने के संबंध में नियामक आयोग अध्यक्ष देश दीपक वर्मा, सदस्य एसके अग्रवाल, सचिव संजय श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक अभिषेक श्रीवास्तव की उपस्थिति में सार्वजनिक सुनवाई हुई। जिसमें पावर कारपोरेशन के अनेकों अभियन्ताओं सहित निजी घरानों मेसर्स बेलस्पन, मे. त्रिशक्ति, मे. क्रिएटिव थर्मोलाइट, मे. हिमावत पावर, मे. लैन्को, मे. अनपरा, मे. ललितपुर पावर जनरेशन कम्पनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सुनवाई में मुख्य अभियन्ता पीपीए द्वारा पावर कारपोरेशन का पक्ष रखते हुए सेवा शर्तों के विस्तार की वकालत की गयी। जिसका राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अयोग के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने विरोध किया। आयोग अध्यक्ष देश दीपक वर्मा के अनेकों तीखे सवालों के सामने पावर कारपोरेशन के प्रतिनिधि की बोलती बंद हो गयी। आयेाग अध्यक्ष ने कड़े शब्दों में सभी निजी घरानों व पावर कारपोरेशन से सवाल किया कि जब बिडिंग रूट से सस्ती दरें प्राप्त हो रही हैं तो एमओयू रूट पर सहमति क्यों दी जाये? उनके सवालों के सामने सभी चुप रहे और फैसला सुरक्षित कर लिया गया। सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेते हुए परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब भारत सरकार ने 10 अक्टूबर 2016 को यह निर्णय कर लिया है कि उपभोक्ताओं के हित में बिडिंग रूट की ही बिजली अनिवार्य रूप से खरीदी जाये तो ऐसे में इन सभी एमओयू रूट की परियोजनाओं को अविलम्ब खारिज कर दिया जाना चाहिये।

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