स्वच्छता अभियान को कौन लगा रहा पलीता

राजधानी के अंतरराष्टीय स्तर के पार्क जनेश्वर मिश्र पार्क के बाहर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। इसकी बदबू के चलते यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। रेलवे स्टेशन के बाहर और भीतर भी गंदगी नजर आती है। सार्वजनिक स्थलों की हालत स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाती दिखती है। सवाल यह है कि आखिर वे कौन है जो इस अभियान को पलीता लगाने में जुटे हैं?

sanjay sharma editor5प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पूर्व गांधी जयंती के मौके पर स्वच्छता अभियान की धूम-धड़ाके से शुरुआत की थी। अभियान के प्रचार-प्रसार में कई हस्तियों को लगाया गया। सरकार ने जागरूकता के लिए खूब विज्ञापन भी किए। खुद प्रधानमंत्री झाडू लेकर सडक़ पर उतरे और प्रतीकात्मक सफाई कर अभियान की शुरुआत की। लोगों से अभियान में बढ़-चढक़र भाग लेने की भावुक अपील की। इस अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त भारत का भी नारा दिया। ऐसा करने वालों को सम्मानित भी किया गया। लेकिन दो साल के बाद भी अभियान परवान नहीं चढ़ सका। आज भी देश के ग्रामीण इलाकों की कौन कहें शहरी इलाकों को भी खुले में शौचमुक्त नहीं कराया जा सका। हां, भाजपा शासित राज्यों में खुले में शौच मुक्त का प्रचार-प्रसार कुछ ज्यादा किया गया। लेकिन, इस अभियान का हाल भी बेहाल रहा। स्वच्छता अभियान की कड़वी हकीकत प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सडक़ों, पार्कों और गलियों में फैले कूड़े के ढेर को देखकर लगाया जा सकता है। राजधानी के अंतरराष्टï्रीय स्तर के पार्क जनेश्वर मिश्र पार्क के बाहर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। इसकी बदबू के चलते यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। रेलवे स्टेशन के बाहर और भीतर भी गंदगी नजर आती है। सार्वजनिक स्थलों की हालत स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाती दिखती है। सवाल यह है कि आखिर वे कौन है जो इस अभियान को पलीता लगाने में जुटे हैं? क्या अफसरशाही को सरकार के आदेशों को नजरअंदाज करने की आदत पड़ गई है? क्या केवल सरकार की इच्छा कर लेने भर से स्वच्छता अभियान को जमीन पर उतारा जा सकता है या फिर जनता की भी कोई जिम्मेदारी है? सच तो यह है कि शहर में साफ-सफाई का जिम्मा संभाल रहा नगर निगम अपनी पुरानी चाल पर चल रहा है। कुछ एजेंसियों को कूड़ा उठाने का जिम्मा देकर निगम के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। उन्हें यह देखने की फुर्सत नहीं है कि ये कूड़ा कहां डंप किया जा रहा है। उनके निस्तारण की क्या और कैसी व्यवस्था हो इस पर विचार तक नहीं किया गया है। इसके अलावा गंदगी को लेकर आम जनता भी जागरूक नहीं है। लोग कूड़े को कहीं भी फेंक देते हैं। यह स्थिति केवल लखनऊ ही नहीं बल्कि पूरे देश की हैं। जाहिर है अगर स्वच्छता अभियान को परवान पर चढ़ाना है तो सरकार को न केवल जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी बल्कि सतत जागरूकता अभियान चलाना होगा। अन्यथा यह अभियान भी कागजों में दर्ज होकर रह जाएगा।

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