सीमा पर गरज रहीं बंदूकें और पाक की चालबाजी

क्या मान लिया जाए कि पाकिस्तान को खराब संबंधों के दौरान कूटनीति व राजनीति कैसे की जाती है, इसकी समझ नहीं है? दरअसल, आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और पाक में तनाव चरम पर है। यह तनाव उस समय अधिक बढ़ गया जब भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की गई।

एक ओर पाकिस्तान भारतीय सीमा पर लगातार गोलीबारी कर रहा है तो दूसरी ओर उसने सिंधु नदी जल बंटवारे के मुद्दे को संयुक्त राष्टïsajnaysharmaमें उठाया है। पाकिस्तान ने जल, शांति एवं सुरक्षा के मुद्दे पर वैश्विक संस्था से हस्तक्षेप करने की मांग की है। पाकिस्तान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय स्तरों पर मानकों को विकसित करने और उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और किसी देश को युद्ध और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सवाल यह है कि अपने दोमुंहे व्यवहार से पाकिस्तान क्या साबित करना चाहता है? क्या संयुक्त राष्टï संघ में सवाल उठा देने से भारत सिंधु नदी जल बंटवारे पर पाकिस्तान से अपने ताजा संबंधों को देखते हुए समीक्षा नहीं करेगा? क्या मान लिया जाए कि पाकिस्तान को खराब संबंधों के दौरान कूटनीति व राजनीति कैसे की जाती है, इसकी समझ नहीं है? दरअसल, आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और पाक में तनाव चरम पर हैं। यह तनाव उस समय अधिक बढ़ गया जब भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की गई। इसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर पचास से अधिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। तब से आज तक सीमा पर बंदूकें गरज रहीं हैं। तीन सौ से अधिक बार पड़ोसी देश ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी सेना के साथ आतंकवादी भी सीमा पर फायरिंग कर रहे हैं और घुसपैठ की कोशिश में लगे हैं। यही नहीं पाक सेना गोलीबारी में शहीद भारतीय जवानों के साथ बर्बरता कर रही है। हाल में पाक सेना एक भारतीय फौजी का सिर काटकर ले गई। इन स्थितियों में भारत क्या पाकिस्तान को कोई रियायत दे सकता है। वैसे पाकिस्तान ने ऐसे ही संयुक्त राष्टï की शरण नहीं ली है। भारत ने काफी पहले ऐलान किया था कि वह सिंधु नदी जल बंटवारे की समीक्षा कर सकता है। भारत-पाक के बीच हुए इस समझौते का गारंटर विश्व बैंक है। हालांकि, भारत ने इस मामले में अभी तक कोई पहल नहीं की है। लेकिन पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबों के कारण खुद डरा हुआ है। पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी काफी अहम है। पश्चिमी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और जल संबंधी जरूरतों के लिहाज से इसे वहां रीढ़ की हड्डी माना जाता है। यदि भारत ने कोई अहम कदम उठाया तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था रसातल में चली जाएगी। इससे आर्थिक रूप से खोखले पाकिस्तान की हालत और भी खस्ता हो जाएगी। पाकिस्तान को यह भूलना नहीं चाहिए कि युद्ध और आतंकवाद शांति का पर्याय नहीं होते। यदि ऐसे ही चलता रहा तो भारत कुछ और कड़े कदम उठा सकता है। इसमें सिंधु नदी समझौते की समीक्षा भी की जा सकती है।

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