सीएम बनने की चाह रखने वाले बीजेपी नेताओं की चुप्पी से कार्यकर्ता हैरान

  • योगी आदित्यनाथ, वरुण गांधी, राजनाथ और स्मृति ईरानी ने साधा मौन
  • प्रदेश में कुछ महीने पहले तक ताल ठोंकने वाले नेता अचानक से हो गये गायब

सुनील शर्मा

captureलखनऊ। प्रदेश में चंद महीनों पहले तक यूपी में भाजपा का सीएम चेहरा बनने की चाहत रखने वाले नेताओं ने चुप्पी साध ली है। जो नेता पार्टी में हिन्दुत्ववादी मुद्दों और छोटी- छोटी घटनाओं को लेकर बयानबाजी करते रहते थे, वे भी देश और प्रदेश में होने वाली बड़ी-बड़ी घटनाओं पर चुप हैं। अब यूपी में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की दौड़ और उसमें सफल होने की इच्छा रखने वाले नेता नजर नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश में अब तक इन नेताओं के सपोर्ट में जो लोग जुलूस और रैलियां निकालकर पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाते रहते थे, उनका भी पता नहीं चल रहा है क्योंकि इन नेताओं की वजह से पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा मिल रहा था, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बिल्कुल भी मंजूर नहीं था। इसी वजह से उन्होंने पार्टी नेताओं को फटकार लगाई थी। इसके बाद से अचानक ही यूपी में सीएम पद के उम्मीदवार की दावेदारी करने वाले नेता गायब हो गये।
उत्तर प्रदेश बीजेपी में सीएम पद का उम्मीदवार होने के लिए कुछ महीने पहले यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, गोरखपुर के सांसद व फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, कलराज मिश्र, सुलतानपुर सांसद वरुण गांधी का नाम प्रमुखता के साथ उछाला गया था। इन नेताओं ने भी इसे साबित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। इसमें सांसद योगी आदित्यनाथ व वरुण गांधी की चर्चा सबसे तेज हुई। दोनों नेताओं ने देश और प्रदेश में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं को मुद्दा बनाकर अपने समर्थकों के साथ रैलियां निकालना और बयानबाजी करना शुरू कर दिया था, जिसमें लव जिहाद से लेकर गोमांस तक का मुद्दा शामिल था। लेकिन इनकी वजह से पार्टी की छवि धूमिल हो रही थी। वरुण गांधी तो योगी आदित्यनाथ से भी आगे निकल चुके थे, उन पर तो पार्टी के वरिष्ठï नेताओं व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने व भाजपा के समानान्तर अपना खुद का संगठन-वरुण गांधी यूथ ब्रिगेड- खड़ा करने के आरोप लगने लगे थे। इसके अलावा रक्षा सौदे से जुड़े मामले का विवाद भी सामने आया था। वरुण को पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने के लिए उनके समर्थकों ने भी कई जनपदों में जुलूस और रैली निकालकर मांग की थी। लेकिन इसका निगेटिव इफेक्ट पड़ा और वरुण को संगठन में मिली महासचिव की पोस्ट से भी हाथ धोना पड़ा था। इसलिए मुख्यमंत्री पद की दावेदारी करने वाले ये सभी नेता अब अचानक ही मैदान से गायब हो गये हैं। हिन्दुओं के फायर ब्रांड नेता योगी और वरुण गांधी दोनों चुप हैं। कलराज मिश्र तो सबकुछ भूलकर सिर्फ अपनी उम्र और उसमें मंत्री बने रहने को लेकर बयान दे रहे हैं। कुछ माह पूर्व मानव संसाधन मंत्रालय से पर कतरे जाने के बाद से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी चुप्पी साध ली है और राजनाथ कह रहे हैं कि सीएम बनने का उनका कोई इरादा नहीं है। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता हैरान हैं कि आखिर सीएम पद की दावेदारी करने वाले उम्मीदवार चुप क्यों हैं, जबकि अंदरखाने इस बात की भी चर्चा चल रही है कि पार्टी ने चुनाव में किसी को भी सीएम चेहरा घोषित कर चुनाव लड़ा, तो गुटबाजी और बढ़ेगी। जो आने वाले चुनाव में नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसलिए पार्टी हाईकमान ने यूपी चुनाव में मोदी को स्टार प्रचारक बनाने और बिना सीएम उम्मीदवार का चेहरा घोषित किए चुनाव लडऩे का निर्णय लिया है।

अन्य राज्यों की तरह हो सकता है नया चेहरा

भाजपा में 2012 के लोकसभा चुनाव के बाद से नई टीम का उदय हुआ है। मोदी व अमित शाह की जोड़ी ने नए लोगों को तवज्जो दी है। पार्टी की टीम बनाने की बात हो, प्रदेश में किसी प्रदेश का मुखिया बनाने की बात हो, हर जगह नए चेहरे को ही आगे किया गया। आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की पुरानी टीम के बजाय नए लोगों को तवज्जो दी गई है। हरियाणा और महाराष्ट्र इसका बड़ा उदाहरण है। यहां पुराने चेहरों को छोड़ जैसे हरियाणा में मनोहरलाल जैसे बिल्कुल नए व्यक्ति को मौका दे दिया गया। उन्हें हरियाणा भाजपा के नेता अब भी नहीं पचा पा रहे हैं। इसके बावजूद पार्टी में अंदरखाने इस बात की चर्चा चल रही है कि चुनाव बाद बहुमत आया तो हरियाणा की तरह ही यूपी में भी कोई नया चेहरा सामने लाया जाएगा।

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