सिल्वर स्क्रीन के आगे फीका हुआ थिएटर

  • मल्टीप्लेक्स की तरफ तेजी से बढ़ा लोगों का रुझान

 ऐश्वर्या गुप्ता

captureलखनऊ। आज के दौर में बिग स्क्रीन पर चमकना हर यंग टैलेंट की ख्वाहिश होती है। इसमें थिएटर ऐसा मंच है जो सिल्वर स्क्रीन तक पहुंचाने में काफी मददगार रहा है लेकिन अब धीरे-धारे थिएटर का क्रेज तेजी से घट रहा है। थिएटर को युवा कलाकार अपना तो रहे हैं लेकिन पब्लिक में थिएटर को लेकर रुचि लगातार घट रही है। जनता थिएटर की जगह सिल्वर स्क्रीन पर मूवी देखना अधिक पसंद कर रही है। इसलिए आने वाले समय में थिएटर का क्या होगा। इसकी चिन्ता थिएटर आर्टिस्ट में सबसे अधिक देखी जा रही है।

थिएटर में तेजी से बदलाव

थिएटर के प्रति युवाओं के आकर्षण में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। फिल्मों में काम करने की चाहत के कारण युवा थिएटर करने में रुचि दिखा रहा है लेकिन जनता में थिएटर को लेकर रुचि लगातार कम हो रहा है। थियेटर आर्टिस्ट और डॉयरेक्टर मुकेश वर्मा का कहना है कि थिएटर के प्रति युवाओं में तेजी से बदलाव आया है। पहले का युवा थिएटर की ओर बहुत आकर्षण महसूस करता था। पहले के समय में थिएटर ही नाटकीय मनोरंजन का एक साधन था और यही वजह थी कि दर्शकों में भी युवाओं की संख्या ज्यादा थी। लेकिन केबल टीवी, डिश, इंटरनेट और एफएम रेडियो ने कुछ ही समय में ही काफी कुछ बदल कर रख दिया है। आज का युवा जल्द फेम पाने की कोशिश में अपना कनेक्शन डॉयरेक्ट सिल्वर स्क्रीन से ही बनाना चाहता है। इसके लिए वे ऑडिशंस भी देते हैं लेकिन थिएटर जैसी दुनिया से दूर भागने की कोशिश करते हैं।

नहीं दिखती पहले जैसी रौनक

किसी भी ट्रेंड का फ्यूचर उसकी यूथ एक्सेप्टेबिलिटी तय करती है, लेकिन अफसोस यह है कि थिएटर के लिए यूथ एक्सेप्टेबिलिटी काफी कम हो गई है। एसएनए ऑडिटोरियम में काफी समय से काम करतो आ रहे सुरेश का कहना है कि युवाओं का थिएटर की ओर अट्रैक्शन काफी तेजी से कम हुआ है। एक समय था जब हमारे ही ऑडिटोरियम में नाटक देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटा करती थी। हालांकि, तब इतने अच्छे ऑडिटोरियम भी नहीं थे, लेकिन आज थिएटर को इतना बेहतरीन मंच मिलने के बावजूद भी युवाओं में इसे देखने का कोई क्रेज नहीं रह गया है। पहले के समय में कम से कम 200 लोगों की भीड़ में 150 लोगों की भीड़ तो होती ही थी। मगर अब तो जिन्हें नाटक पसंद है, वही भूले भटके यहां किसी प्रोग्राम में दिख जाते हैं।

बदलाव तो युवाओं से ही आएगा

जहां एक तरफ यंग व्यूअर्स की संख्या घट रही है। ऐसे में यूथ का एक फेम ऐसा भी है, जो कि थिएटर को सिल्वर स्क्रीन तक पहुंचने की सीढ़ी बना रहा है। हाल ही में थिएटर आर्टिस्ट्स की बढ़ती हुई पॉप्युलैरिटी से ये बात साफ हो गई है कि अब सिर्फ गुड लुक्स नहीं, बल्कि एक टेलैंटड एक्टर ही बॉक्स ऑफिस पर हिट है। बली ऑडिटोरियम में कई सालों से नाटक प्रर्दशन करते आ रहे अनुपम गिरी बताते हैं कि भले ही दर्शक कम हों, लेकिन युवाओं की भारी संख्या थिएटर ज्वॉइन करके एक्टिंग की बारीकियों को सीखना चाहती है। आये दिन हमारे पास कई युवा ऑडियंश के लिए आते हैं। इनमें वो युवा ज्यादा हैं, जो सही मायनों में कला की इज्जत करते हैं और बेहतर कलाकार बनना चाहते हैं। इन कलाकारों की बढ़ रही लगन से थिएटर को एक नया मुकाम मिलता जा रहा है। इसके साथ ही अब थिएटर के एक्ट्स में भी फ्यूजन करने की तैयारी है।

मेरा एक्टिंग के प्रति काफी रुझान रहा है। इसलिए मैंने थिएटर चुना है ताकि मैं बेहतर ढंग से अभिनय सीख सकूं। अब तो बॉलीवुड में भी थिएटर आर्टिस्ट्स की डिमांड ज्यादा है।
– स्वपनिल, युवा आर्टिस्ट

मैं पिछले 8 साल से थिएटर कर रही हूं। साथ में पढ़ाई भी कर रही हूं। लेकिन थिएटर के प्रति मेरे आकर्षण और लगाव ने मुझे यहां तक पहुंचाया है। मैं इसे पर्सनालिटी डेवलपमेंट मानती हूं।
-नंदिनी मौर्या,
युवा आर्टिस्ट

Pin It