सिटी ब्रीफ

नए चिकित्सकीय कानून के खिलाफ डॉक्टरों का सत्याग्रह

लखनऊ। क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में राजधानी समेत प्रदेशभर के चिकित्सकों ने बुधवार को काला फीता बांध कर केन्द्र सरकार के फैसले का विरोध किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। चिकित्सकों का कहना है कि जनता की समस्या को देखते हुए उन्होंने सत्याग्रह का फैसला लिया है। यदि उनकी मांगे नहीं मानी गयीं तो आने वाले समय में वे आन्दोलन भी कर सकते हैं। राजधानी लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डॉ. पी.के.गुप्ता ने बताया कि लखनऊ के चिकित्सकों ने ड्यूटी के दौरान प्रात: 8.00 बजे से दो बजे तक काली पट्टी बांधकर विरोध किया है। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि इस एक्ट के जरिये सरकार चिकित्सकों की स्वायत्तता छीनना चाहती है। इससे प्राइवेट चिकित्सा शिक्षा महंगी हो जायेगी। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा और चिकित्सक विरोधी कानून है। इस कानून के लागू होने से चिकित्सकों की भूमिका शून्य हो जाएगी और नौकरशाह व गैर चिकित्सक हावी हो जाएंगे। इसमें 60 प्रतिशत सीटें निजी मेडिकल कालेजों को देना अनिवार्य होगा। मेडिकल सीटों को खुले बाजार में बेचने की तैयारी है। इसमें मेधावी व गरीब छात्रों की कोई जगह नहीं होगी। लखनऊ के आईएमए के नव निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि क्लीनिक स्टेब्लिशमेंट एक्ट का हम समर्थन करते हैं लेकिन भारत जैसे देश में यह संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पश्चिम के विकसित देशों के लिए तो यह कानून बेहतर है लेकिन भारत के लिए यह कारगर नहीं है। इस कानून के लागू होने से भारत में चिकित्सा और महंगी हो जायेगी जो मरीजों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने पर एक छोटी सी क्लीनिक खोलने के लिए भी डाक्टर को 17 विभागों से मंजूरी लेनी पड़ेगी। जो प्रावधान इस एक्ट में किये गये हैं वह सभी प्रावधान सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों में ही संभव है। डा. सूर्यकान्त ने बताया कि इस कानून को केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने ही पास किया था। इसके बाद प्रदेश की अखिलेश सरकार इसको पास करना था। चिकित्सकों के विरोध की वजह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कानून का पास नहीं किया है। आईएमए लखनऊ शाखा के डा.विश्वजीत सिंह ने बताया कि हम लोगों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर इस एक्ट में संशोधन की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने हमें इस एक्ट में संशोधन का भरोसा दिलाया था।

कठौता झील में पहुंचा पानी

लखनऊ। इंदिरानगर और गोमतीनगर के ज्यादातर इलाकों में लोगों की प्यास बुझाने वाली कठौता झील में बुधवार की शाम को पानी आ गया। झील में सफाई कार्य के चलते काफी दिनों से शारदा सहायक नहर से पानी नहीं भेजा जा रहा था। इसलिए लोगों के घरों में पानी का संकट बना हुआ था। झील में देर शाम पानी के आते ही लोगों ने राहत की सांस ली। महाप्रबंधक जलकल संजय सिन्हा ने बताया कि झील के दोनों हिस्सों को पूरी तरह से भरने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लगेगा। झील में रॉ वाटर की सफाई भी बुधवार को ठीक ढंग से होने लगी, जिससे तीसरे जलकल को भी जरूरी पानी मिलने लगेगा। इससे दस लाख की आबादी को परेशान नहीं होना पड़ेगा।

डूबने से हुई थी बिजली कर्मी की मौत

लखनऊ। हसनगंज थाना क्षेत्र में बिजली कर्मी की संदिग्ध हालत में मौत हो गयी। उसका शव बुधवार की सुबह गोमती नदी के किनारे मिला था। मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन पीएम रिपोर्ट में घनश्याम की मौत पानी में डूबने से हुई थी। सआदतगंज थाना क्षेत्र स्थित पुलगामा निवासी घनश्याम सिंह (45) पुत्र रामेश्वर प्रसाद बिजली विभाग में संविदा कर्मी के रूप में कार्य करता था। घनश्याम के भाई राम सिंह ने बताया कि बीते रविवार की शाम घनश्याम नाका स्थित अपनी ससुराल पत्नी मौसमी, बेटी खुशी व बेटे आदी के साथ गया था। वह वापस नहीं आया। सआदतगंज थाने में गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज करवाया गया था। बुधवार को घनश्याम का शव हसनगंज थाना क्षेत्र स्थित लल्लूमल घाट पर मिला था। सआदतगंज प्रभारी शशिकांत यादव ने बताया कि पीएम रिपोर्ट के अनुसार घनश्याम की मौत पानी में डूबने से हुई थी।

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