सिटी ब्रीफ

आरोप पत्र सच हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा: वरुण गांधी

लखनऊ। रक्षा सौदों की जानकारी लीक करने या राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के आरोपों पर भाजपा सांसद वरुण गांधी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर इन आरोपों में एक फीसदी भी सच्चाई होगी तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। दरअसल प्रशांत भूषण ने गुरुवार को इस बात का खुलासा किया था कि नौसेना वार रूम लीक मामले के आरोपी अभिषेक वर्मा के पूर्व सहयोगी एडमंड ऐलन ने हाल ही में प्रधानमंत्री को दो पत्र लिखे हैं। एक 25 अगस्त तथा दूसरा 16 सितंबर को लिखा गया है। उन्होंने लिखा है कि कैसे उच्च सैन्य अधिकारियों द्वारा सेना के दस्तावेज लीक कराए जा रहे हैं। इसमें विदेशी वेश्याओं की भी मदद ली गई। यहां तक कि रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक का विवरण तक लीक कराया गया। प्रशांत भूषण ने हैरत जताई कि पीएमओ इस पत्र पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐलन ने अपने पत्र में एक सांसद का उल्लेख किया। आरोपों के मुताबिक, सांसद के कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक फोटो भी भेजे गए हैं। पत्र में कहा गया है कि उक्त सांसद तब रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति के सदस्य थे। इस पर वरुण गांधी ने कहा कि वह पिछले 15 साल से अभिषेक वर्मा से नहीं मिले और उस संसदीय समिति की बैठक में भी शामिल नहीं हुए, जिसका ऐलन ने जिक्र किया है। उन्होंने आशंका जताई कि यूपी चुनाव में उनकी भूमिका को रोकने के लिए ऐसे आरोप लगाए गए हैं। वहीं अभिषेक वर्मा ने कहा कि वह शिकायत में लगाए गए ऐसे घिनौने आरोपों को नकारते हैं। गांधी की न तो कभी तस्वीरें ली गईं और न ही उन्हें कभी ब्लैकमेल किया गया। फिलहाल वरुण गांधी को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं को दौर तेज हो गया है। वरुण के बहाने अन्य राजनीतिक दलों के नेता बीजेपी को घेरने में जुट गये हैं।

लोढ़ा कमेटी को एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने का आदेश

नई दिल्ली। बीसीसीआई के मामले में जारी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर कोर्ट ने आज आदेश जारी करते हुए कहा कि बीसीसीआई जल्द से जल्द लोढ़ा पैनल की सिफारिशों को मानने का एफिडेविट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने कहा कि लोढा पैनल एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करेगा, जो बीसीसीआई के तमाम दिए जाने वालों ठेकों की जांच करेगा। कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा राज्य क्रिकेट बोर्डों को फंड जारी करने पर भी रोक लगाई और कहा कि तब तक फंड न दिए जाएं जब तक राज्य के बोर्ड भी लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने के संबंध में एफिडेविट नहीं दे देते हैं।

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