सिटी ब्रीफ

जय नारायण डिग्री कॉलेज में डॉ. वीपी सिंह को दी गई श्रद्घांजलि

captureलखनऊ। जय नारायण डिग्री कालेज में गुरुवार को कालेज में छात्रसंघ के संस्थापक एïवं प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय वीरेन्द्र प्रताप सिंह की 37वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस दौरान उनके परिवार के सदस्यों, शुभ चिन्तकों, छात्रों और शिक्षकों ने कालेज के प्रांगण में उपस्थित होकर उनकी प्रतिमा पर श्रद्घा सुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्घांजलि दी। सब लोगों ने उनके त्याग और बलिदान को याद करने के साथ ही उनके द्वार बताये गये रास्तों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर डॉ. वीपी सिंह के भाई एसपी सिंह, पुत्र आशुतोष सिंह, अंशुमान सिंह, आशीष सिंह और पुत्री पूजा सिंह समेत परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

प्राधिकरण दिवस पर 78 फरियादियों ने लगाई गुहार

लखनऊ। एलडीए में आवंटियों की समस्याओं को निस्तारित करने के लिए प्राधिकरण दिवस व जनता अदालत का आयोजन किया गया। अदालत में 78 फरियादियों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। एलडीए वीसी के निर्देश पर सभी फरियादियों की समस्याओं को निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। समस्याओं का निस्तारण जल्द हो इसलिए संबंधित अफसरों को उनके आवेदन पत्र सौंप दिए गए हैं। अदालत में 2010 में सुलभ आवास योजना में अपना आवास बुक करा चुके प्रवीण कुमार सिंह भी पहुंचे। उनका कहना है कि उन्होंने सुलभ आवास योजना में 2010 में अपने आवास के लिए आवंटन किया था, जिसके बाद लॉटरी में उनका नाम आया था। लॉटरी के बाद से 2011 तक उन्होंने सारी किश्ते जमा करते हुए आवास का पूरा पैसा जमा कर दिया है। किन्तु अभी तक आवास पर कब्जा नहीं मिला है। वह पूरे एक वर्ष से प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नये वीसी से थोड़ी आस जगी है। शायद वह मेरी समस्या को समझेंगे और जल्द उसका निवारण कराएंगे। इसके लिए मैने पंजीकरण करा दिया है।

सीजर का मंचन देख मुग्ध हुए दर्शक

लखनऊ। सत्ता की चाहत में दोस्त ही दोस्त का दुश्मन बन जाता है। धोखे से बहादुर से बहादुर इंसान भी मात खा जाता है। एक ऐसा राजा जो अपने देश को दुश्मनों से सुरक्षित रखता है उसे धोखे से मार दिया जाता है। इसके बाद लोगों में ऐसा जुनून पैदा होता है कि वे देश की हिफाजत के लिए खुद हथियार उठा लेते हैं। कुछ ऐसा ही मंजर बीती शाम संगीत नाटक अकादमी में जूलियस सीजर नाटक के मंचन में दिखा। शेक्सपियर की लिखी इस कहानी से नफरत फैलानेे वालों से सतर्क रहने का संदेश दिया गया। नाटक में उर्दू जुबान का ज्यादा इस्तेमाल किया गया था। नाटक में दिखाया गया कि रोम में सीजर और पाम्पी नाम के दो बादशाह होते हैं दोनों में जंग होती है जहां सीजर पाम्पी को हरा देता है। कैशस नाम का शख्स सीजर से नफरत करता है। वो सीजर के करीबी दोस्त ब्रूटस को भडक़ाता है। ब्रूटस सीजर की हत्या कर देता है। तभी सीजर का एक दोस्त एंटोनी रोम के लोगो को कैशस की सच्चाई बताता है और कहता है कि सीजर रोम का नुकसान नहीं करना चाहता था। नाटक को फरुखदीन अली अहमद मेमोरियल के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। नाटक का निर्देशन युसूफ खान ने किया था। मंचन को देख दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।

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