सरहद पर गरजती बंदूकें और ‘ना’ पाक इरादे

सवाल यह है कि हर बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान अपने कुकृत्यों से बाज क्यों नहीं आ रहा है? सवाल यह भी है कि आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुका पाकिस्तान आखिर किसके भरोसे इस तरह की उकसाने वाली कार्रवाई करता है? क्या पाकिस्तानी लोकतंत्र को वहां की सेना ने वाकई बंधक बना लिया है या वे भारतीय फौज द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाकर इस प्रकार की हैवानियत पर उतारू हैं?

sanjay sharma editor5पाकिस्तान अपने नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाक फौज व उनके पिट्ठू आतंकियों ने एक बार फिर भारतीय फौज के एक जवान मंदीप सिंह की न केवल हत्या कर दी बल्कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। इसके पहले भी पाकिस्तानी फौज ने एक अन्य भारतीय जवान हेमराज की हत्या कर दी थी और उसका सिर काट कर ले गए थे। इससे पूरे देश में आक्रोश है और एक बार फिर पाक को सबक सिखाने की आवाजें बुलंद होने लगी हैं।
सवाल यह है कि हर बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान अपने कुकृत्यों से बाज क्यों नहीं आ रहा है? सवाल यह भी है कि आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुका पाकिस्तान आखिर किसके भरोसे इस तरह की उकसाने वाली कार्रवाई करता है? क्या पाकिस्तानी लोकतंत्र को वहां की सेना ने वाकई बंधक बना लिया है या वे भारतीय फौज द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाकर इस प्रकार की हैवानियत पर उतारू हैं? पाक की इस बौखलाहट के कई कारण हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की कूटनीति ने पाकिस्तान को विश्व बिरादरी से अलग-थलग कर दिया है। लिहाजा आज विश्व के तमाम देश आतंकवाद को खत्म करने के मुद्दे पर भारत के सुर में सुर मिला रहे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में भी भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लपेटा था। इस बैठक में भारत ने साफ कह दिया था कि आतंकवादी पड़ोसी देश पाकिस्तान का दुलारा बच्चा है और इसके जरिए वह भारत में आतंक फैला रहा है। इसके अलावा पिछले दिनों भारतीय फौज द्वारा पीओके में घुसकर आतंकी कैंपों और पचास के करीब आतंकवादियों का सफाया किया गया था। सबसे अहम बात यह है कि सीरिया में मित्र राष्टï्रों की सेना ने आईएसआईएस के आतंकवादियों को खदेड़ दिया है। वे पाकिस्तान की सीमा पर पहुंच गए हैं। पाकिस्तानी सेना उन्हें इस शर्त पर अपने यहां शरण देने को तैयार है कि वे भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां जारी रखेंगे। इसके अलावा चीन पाकिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए उसे आर्थिक सहायता मुहैया करा रहा है। साथ ही पाकिस्तान के हुक्मरानों पर सेना का भी दबाव है। वे अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को पटरी पर नहीं आने देना चाहती है। लिहाजा सरहद पर बंदूकें गरज रही हैं। लेकिन पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि जिस तरह की वह लगातार उकसाने वाली कार्रवाई कर रहा है, इसका नतीजा उसके लिए आत्मघाती ही होगा। युद्ध किसी भी विवाद का हल नहीं हो सकता, इस मूल मंत्र को उसे आज नहीं तो कल समझना होगा।

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