सरकार बदलते ही महंगा हो जायेगा किंग जार्ज मेडिकल विवि में इलाज

  • विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार कर चुका है प्लान
  • वीसी प्रो. रविकांत पहले ही दे चुके हैं हर तरह के शुल्क में बढ़ोतरी के संकेत

वीरेंद्र पांडेय
captureलखनऊ। राजधानी के किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सरकार बदलते ही बहुत कुछ बदलने वाला है। खासकर अस्पताल में आने वाले गरीबों का इलाज मंहगा होने वाला है। जानकारों की मानें तो विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से भविष्य को ध्यान में रखकर योजना बनाने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। इस बात के संकेत केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत पहले ही दे चुके हैं। इसलिए सरकार बदलने के तुरंत बाद केजीएमयू में इलाज कराना और अधिक महंगा हो जायेगा, इसको लगभग तय माना जा रहा है।
केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत ने कुछ दिनों पूर्व एक कार्यक्रम के दौरान बताया था कि उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों में सरकार बदलने वाली है। सरकार बदलने के बाद केजीएमयू में आने वाले मरीजों को लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की तरह तमाम तरह की सुविधाओं का वर्तमान से अधिक मूल्य चुकाना पड़ेगा। यह भी बताया कि यहां का बजट 65 करोड़ रुपये के आस-पास है, जिसका अधिकांश हिस्सा बिजली के भुगतान में चला जाता है। अन्त में मेडिकल कालेज प्रशासन के पास कुल 9 करोड़ रूपये ही बचते हैं। यह धनराशि गरीब मरीजों को सस्ता इलाज और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में खर्च हो जाती है। कुलपति प्रो. रविकांत का कहना था कि मरीजों को यदि अच्छी सुविधा देनी है, तो केजीएमयू मेें दी जाने वाली चिकित्सकीय सुविधाओं का शुल्क बढ़ाना पड़ेगा। गौरतलब है कि इससे पहले केजीएमयू में बिना किसी पूर्व सूचना के जांच शुल्क से लेकर भर्ती शुल्क तथा प्राइवेट कमरों का शुल्क बढ़ाया जा चुका है। तब भी अस्पताल प्रशासन को आवश्यक सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में केजीएमयू में इलाज करवाना भी गरीबों के लिए महंगा हो जायेगा। यह बात लगभग तय मानी जा रही है।

ट्रामा टू में शुरू नहीं हो पाया नि:शुल्क इलाज

किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रायबरेली रोड स्थित ट्रामा -2 में भर्ती होने वाले मरीजों को पहले 24 घंटे तक नि:शुल्क चिकित्सा नहीं मिल पा रही है। केजीएमयू प्रशासन इसका मुख्य कारण बजट का आभाव बता रहा है। ट्रामा – 2 शुरू हुए लगभग एक साल होने वाला है, लेकिन केजीएमयू प्रशासन अपना दावा पूरा नहीं कर पा रहा है। जबकि इसके लिए राज्य सरकार से 10 करोड़ का बजट भी मिलना था। लेकिन अब तक बजट नहीं मिला। इस संबंध में ट्रामा-2 प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी का कहना है कि 10 करोड़ का बजट राज्य सरकार की तरफ से दिया जाना था ,लेकिन अभी तक वह बजट नहीं मिल पाया है। इस कारण सभी मरीजों का नि:शुल्क इलाज नहीं मिल पा रहा है, सिर्फ बीपीएल व विपन्न मरीजों को निशुल्क इलाज दिया जा रहा है।

उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवायें देने के लिए चाहिए पर्याप्त बजट: डॉ वेद प्रकाश

केजीएमयू के उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि यहां आने वाले मरीजों को यदि उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवायें देनी हैं, तो उसके लिए पर्याप्त बजट होना जरूरी है। लेकिन केजीएमयू में मरीजों की संख्या को देखते हुए बजट ऊं ट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। इसी वजह से मरीजों को भी समस्यायें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि पीजीआई में केजीएमयू की अपेक्षा एक तिहाई मरीज ही आते हैं, लेकिन वहां का बजट केजीएमयू से कहीं ज्यादा है। जबकि केजीएमयू में रोजाना 8 से 10 हजार मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं, साथ ही 4500 भर्ती मरीजों का इलाज भी किया जाता है। इसलिए इतने बड़े संस्थान को चलाने के लिए बजट तो चाहिए ही। इस खर्च का बोझ या तो सरकार, या मरीज या छात्रों को ही उठाना पड़ेगा। डॉ. वेद के मुताबिक संस्थान के रखरखाव तथा मरीजों को उच्चस्तरीय व्यवस्था देने के लिए कुछ प्रविधान केजीएमयू प्रशासन ने बनाया है, जिससे मरीजों पर बोझ कम पडऩे की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इसके लिए शाम की ओपीडी चलाई जायेगी, जिसका एक शुल्क निर्धारित होगा और साथ ही ओटी,आईसीयू के लिए भी शुल्क तय कर दिया जायेगा। यदि ये फैसला लागू हो गया तो काफी कुछ सुधर जायेगा और जिन लोगों को प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर शिकायत रहती है,वो भी दूर हो जायेगी। इससे केजीएमयू के बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अत्याधुनिक उपकरणों का फायद मरीजों को ज्यादा से ज्यादा मिल सकेगा।

केजीएमयू को पहले की तरह की चलाया जाए : डॉ. संतोष

शिक्षक संघ के महासचिव प्रो. संतोष कुमार का कहना है कि केजीएमयू में ज्यादातर गरीब मरीज ही इलाज के लिए आते हैं। इसलिए यदि केजीएमयू का शुल्क बढ़ाया गया तो गरीब मरीजों के लिए अच्छे चिकित्सकीय संस्थान इलाज करवा पाना मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने बताया कि दो साल पहले तक केजीएमयू के पास बजट की कोई समस्या नहीं थी। यह समस्या अचानक कहां से आई गई। इस बात की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जिस प्रकार से दो साल पहले तक केजीएमयू को चलाया जा रहा था, उसी प्रकार से आगे भी चलाया जाना चाहिए।

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