सरकार की साख पर सवाल

सवाल यह है कि क्या वाकई राजावत की बात में सच्चाई है? यदि ऐसा है तो यह बेहद गंभीर मामला है और कालेधन के खात्मे को लेकर सरकार के ताजे फैसले पर सवाल उठाता है? क्या विपक्षी दलों के आरोप को सच मान लिया जाए जिसमें वह लगातार मोदी सरकार पर पूंजीपतियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाते रहते हैं?

sajnaysharmaनोटबंदी पर सरकार के फैसले और उसकी मंशा पर खुद भाजपा के एक विधायक ने सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान के कोटा जिले के भाजपा विधायक भवानी सिंह राजावत ने यह कहकर सियासत गरमा दी है कि उद्योगपति अंबानी और अडानी को 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के बारे में पहले से पता था। लिहाजा इन उद्योगपतियों ने मामले को मैनेज कर लिया। सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो में राजावत को ऐसा कहते दिखाया गया है। वीडियो में वे नोटबंदी से आम जनता को हो रही परेशानियों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना करते भी दिख रहे हैं। हालांकि खुद राजावत अब सफाई दे रहे है कि उन्होंने वैसा कुछ नहीं कहा जैसा वीडियो में दिखाया जा रहा है। यह कि उनके बयान को काट-छांट कर पेश किया गया है। भले ही राजावत कुछ कहें, बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। सवाल यह है कि क्या वाकई राजावत की बात में सच्चाई है? यदि ऐसा है तो यह बेहद गंभीर मामला है और कालेधन के खात्मे को लेकर सरकार के ताजे फैसले पर सवाल उठाता है? क्या विपक्षी दलों के आरोप को सच मान लिया जाए जिसमें वह लगातार मोदी सरकार पर पूंजीपतियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाते रहते हैं? यदि ऐसा नहीं है तो मोदी सरकार को इस मामले पर जल्द और तार्किक जवाब देना होगा वरना जनता मोदी सरकार को शायद ही माफ कर सके? यह वीडियो ऐसे समय आया है जब नोटबंदी के फैसले से देश में अफरातफरी मची हुई है। बैंकों में नोट बदलवाने के लिए लोग कतार लगाए अपना कीमती समय जाया कर रहे हैं। कई घरों में शादी-विवाह जैसी रस्में रुकी पड़ी हैं। किसान से लेकर मजदूर तक परेशान हैं। यही नहीं इन कतारों में लगने के दौरान अब तक पूरे देश में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत की खबरें आ चुकी हैं। बतातें चलें कि ये वही अंबानी और अडानी है जिससे मोदी सरकार से नजदीकियों का आरोप विपक्ष लगाता रहता है। यही नहीं कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल नोटबंदी के पहले दिन से सरकार के फैसले पर सवाल उठाते रहे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र के दो दिन के दौरान इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेर रखा है और जांच कराने की लगातार मांग कर रहा है। ऐसे में राजावत के ताजे बयान ने सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को एक नया मुद्दा दे दिया है। भले ही सरकार संसद में चर्चा कराने को तैयार हो, उसे राजावत के खुलासे का जवाब तो जनता को देना ही पड़ेगा वरना उसकी साख पर बट्टïा लगते देर नहीं लगेगी।

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