सरकारी विभागों में तैनाती के लिए अभी तैयार नहीं हैं अफसर

  • सूबे में नई सरकार बनने का कर रहे इंतजार
  • कृषि विभाग में पदोन्नति के बाद भी नहीं हो रही अफसरों की तैनाती
  • किसानों की परेशानियां बढ़ीं, रबी सीजन की फसल हो रही प्रभावित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। सरकारी विभागों में अधिकारियों की नजर प्रदेश सरकार और सत्ताधारी पार्टी में चल रही उठापटक पर लगी हुई है। कृषि विभाग में अफसर जोड़-तोड़ की राजनीति पर उतर आये हैं। सबकी निगाहें आगामी चुनाव और सत्ता परिवर्तन पर टिकी हुई है। इसलिए कृषि विभाग में बीते एक माह से पदोन्नति होने के बावजूद 16 अफसरों की तैनाती नहीं की जा रही है। वहीं अफसरों में भी नई तैनाती को लेकर उत्सुकता नजर नहीं आ रही है जबकि रबी का सीजन होने और अफसरों की अनुपस्थिति से बीज और खाद से जुड़े फैसले पेंडिंग में पड़े हुए हैं। रबी के फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। इस ओर शासन-प्रशासन के अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि किसानों की समस्याओं से अधिकारियों को कोई गुरेज नहीं है। उन्हें सिर्फ अपने लाभ की चिन्ता है।

मलाईदार पोस्टिंग की चाह प्रमोशन के बाद भी पद खाली

कृषि विभाग में प्रमोशन होने के बाद मलाईदार पोस्टिंग की चाह रखने वाले अफसरों में कम्पटीशन चल रहा है। इस कारण करीब एक महीने से अपर कृषि निदेशक के पांच पद और संयुक्त कृषि निदेशक के ग्यारह पद खाली हैं, जिससे रबी सीजन की बुआई प्रभावित हो रही है, वहीं समय पर बीज और खाद उपलब्ध न होने की वजह से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। मलाईदार पोस्ट की लालच में शासन में कटिया लगाए बैठे कुछ मंत्री और आला अफसर जहां मायूस हैं, वहीं पदोन्नति पाने वाले अफसर भी राजनीतिक अस्थिरता को भांपते हुए नई सरकार की आस में चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।

कृषि निदेशक के लिए इनकी हुई थी पदोन्नति

संयुक्त कृषि निदेशक आजमगढ़, संयुक्त कृषि निदेशक मिर्जापुर, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती के पद भी खाली हैं। इससे पूर्व निदेशक पद के लिए डीपीसी हुई थी, जिसमें ज्ञान सिंह, पीसी सिंह, सोराज सिंह और संतोष खरे का चयन हुआ था। इन अधिकारियों में ज्ञान सिंह को कृषि निदेशक के पद पर तैनात किया गया।

अफसर नई सरकार बनने का कर रहे इंतजार

विभागीय सूत्रों की माने तो पदोन्नति पाए अफसर अभी भी जानबूझ कर रुके हुए हैं। वह पदोन्नति वाले पदों पर ज्वाइनिंग को लेकर जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। वहीं इस समय राजनीतिक अस्थिरता के चलते अधिकतर अफसर वेट एंड वॉच मोड में हैं। इसलिए शासन को पदोन्नति की लिस्ट जारी ही करना होगा, चाहे इसके लिए कितने भी दिन लग जाएं। अब अगली सरकार में समीकरण साध कर कुर्सी हासिल करेंगे। फिलहाल चुनाव का वक्त है। इस पर अफसरों की निगाहें टिकी हुई हैं कि किसकी सरकार सत्ता में आएगी। इसके बाद जोड़-तोड़ का सिलसिला शुरू होगा।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस मुद्दे पर सम्पर्क किए जाने पर कृषि निदेशक ज्ञान सिंह ने कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि अधिकारी इस मुद्दे पर जवाब देने से साफ-साफ बच रहे हैं और अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं।

 

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