समाजवाद के सच्चे योद्धा हैं धरतीपुत्र मुलायम

जनता ने जन्मदिन की दी शुभकामनाएं

 सूर्यकांत त्रिपाठी
captureलखनऊ। उत्तर भारत के बड़े समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव का आज जन्मदिन है। प्रदेश की जनता ने सपा मुखिया को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी है। यह उन्हीं के दिशा-निर्देशों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश लगातार विकास के पायदान चढ़ रहा है। प्रदेश की जनता अपने प्रिय नेताजी के दीघार्यु की कामना करती है। जनता के बीच वे नेताजी व धरतीपुत्र के नाम से लोकप्रिय हैं। एक युगदृष्टïा के रूप में मुलायम सिंह यादव को देश की जनता बड़े सम्मान भाव से देखती है।
गरीब, दलित और पिछड़े उन्हें अपना मसीहा मानते हैं क्योंकि नेताजी ने हमेशा उनके हक की लड़ाई लड़ी। 22 नवंबर 1939 को जन्मे नेताजी ने कई दशकों से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मुलायम सिंह यादव अपने धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी विचार के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 1954 में मात्र 15 वर्ष की आयु में महान समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के आह्वान पर नहर रेट आन्दोलन में उन्होंने भाग लिया और पहली बार जेल गए। वर्ष 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर पहली बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गये और मंत्री बने। एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले मुलायम सिंह यादव का प्रभाव बहुत कम समय में पूरे उत्तर प्रदेश में फैल गया। 1992 में मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी बनाई। भारत के राजनीतिक इतिहास में यह क्रान्तिकारी घटना थी, जब करीब डेढ़-दो दशकों से मृतप्राय समाजवादी आन्दोलन को पुनर्जीवित किया गया था। अपने विशाल और उदार व्यक्तित्व के कारण वे तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। वे केन्द्र सरकार में रक्षा मन्त्री भी रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में उन्होंने साहसिक भूमिकाएं निभाई। केंद्रीय राजनीति में मुलायम सिंह का प्रवेश 1996 में हुआ, जब कांग्रेस पार्टी को हरा कर संयुक्त मोर्चा ने सरकार बनाई। एच. डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली सरकार में वह रक्षामंत्री बने। उन्होंने देश हित में कई काम किए। मुलायम सिंह यादव की राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्तों में अटूट आस्था रही है। भारतीय भाषाओं, भारतीय संस्कृति और शोषित पीडि़त वर्गों के हितों के लिए उनका अनवरत संघर्ष जारी रहा है। उन्होंने ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैण्ड, पोलैंड और नेपाल आदि देशों की यात्राएं की। उनकी याददाश्त गजब की है। कहा जाता है कि मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश की किसी भी जनसभा में कम से कम पचास लोगों को नाम लेकर मंच पर बुला सकते हैं। समाजवाद के फ्रांसीसी पुरोधा कॉम डी सिमॉन की अभिजात्यवर्गीय पृष्ठभूमि के विपरीत उनका समाजवाद का भारतीय संस्करण केंद्रीय भारत के कभी निपट गांव रहे सैंफई के अखाड़े में तैयार हुआ है। वहां उन्होंने पहलवानी के साथ राजनीति के पैंतरे भी सीखे। वे कई बार लोकसभा के सदस्य चुने गये। पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को 28 मई, 2012 को लंदन में अंतर्राष्ट्रीय जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुलायम सिंह यादव ने विधि क्षेत्र में खासा योगदान दिया है। समाज में भाईचारे की भावना पैदाकर उन्होंने लोगों को न्याय दिलाने में विशेष योगदान है। मुलायम सिंह पर कई पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। आपातकाल में मुलायम सिंह 19 माह जेल में भी रहे। अक्टूबर, 1992 में देवरिया के रामकोला में गन्ना किसानों पर पुलिस फ़ायरिंग के खिलाफ चलाए गए किसान आन्दोलन सहित विभिन्न आन्दोलनों में 9 बार इटावा, वाराणसी और फ़तेहगढ़ आदि जेलों में रहे। मुलायम सिंह यादव स्वतंत्रता के बाद आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक न्याय के क्षेत्र में संघर्ष करने वाले चौधरी चरण सिंह के उत्तराधिकारी हैं। वे एक संघर्षशील समाजवादी कार्यकर्ता के रूप में राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेन्द्र देव, और राज नारायण, इन सबके विचारों और राजनीतिक प्रयोगों और प्रयासों के उत्तराधिकारी हैं।

Pin It