सपा में घमासान: घंटे-दर घंटे की रिपोर्ट

रविवार को समाजवादी पार्टी में जमकर घमासान चला। ऐसा पहली बार हुआ जब सपा से मुलायम सिंह यादव के परिवार के सदस्य राम गोपाल यादव को निष्कासित किया गया। यह फैसला सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने मिलकर लिया। परिवार के सदस्यों ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। सपा में दिनभर चले घटनाक्रम पर एक नजर:

captureसुबह 6 बजे: सपा के महासचिव और मुलायम सिंह यादव के भाई रामगोपाल यादव ने रविवार तडक़े कार्यकर्ताओंं को एक चि_ी लिखी। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि अब वह वक्त आ गया है जब कार्यकर्ता अखिलेश का साथ दें। सीएम को हराने की साजिश चल रही है। मामले की मध्यस्थता करने वाले ही पार्टी को भ्रमित कर रहे हैं।
सुबह 7 बजे: रामगोपाल की चि_ी सोशल मीडिया में वायरल हो गई। सपा कार्यकर्ताओं का सपा प्रमुख मुलायम सिंह, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व शिवपाल के आवास के बाहर जमावड़ा लगा रहा।
सुबह 9.30 बजे: मुलायम सिंह यादव ने सपा के वरिष्ठ नेताओं को अपने आवास पर बुलाया। बैठक में सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा, यूपी विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल, रेवती रमण सिंह और बेनी प्रसाद वर्मा पहुंचे। इनको अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच समझौता कराने और पार्टी की कलह को शांत कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सभी नेता किए गए प्रयासों की रिपोर्ट मुलायम को सौंपने पहुंचे थे।
सुबह10.30 बजे: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सरकारी आवास पर बैठक बुलाई। शिवपाल यादव और अमर सिंह के करीबी माने जाने वाले 16 विधायकों और 7 विधानपार्षदों को छोडक़र सभी मंत्री, विधायकों और विधानपार्षदों को बुलाया गया। शिवपाल के करीबी
मंत्री साहब सिंह सैनी को बैठक से वापस भेज
दिया गया।
दोपहर 11 बजे: मुख्यमंत्री ने शिवपाल यादव सहित छह मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। इनमें चार कैबिनेट मंत्री और दो राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शामिल हैं। जया प्रदा को भी पद से हटाया गया। बर्खास्त मंत्रियों में शादाब फातिमा, नारद राय, ओमप्रकाश सिंह, मदन चौहान
आदि शामिल हैं। शादाब फातिमा और मदन चौहान
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। मुख्यमंत्री ने
सभी मंत्रियों की बर्खास्तगी की जानकारी राज्यपाल को भेज दी।
दोपहर 11.30 बजे: मुख्यमंत्री ने विधायकों और मंत्रियों को संबोधित किया। अखिलेश ने कहा कि वे अपने पिता मुलायम सिंह यादव का बहुत आदर करते हैं, लेकिन कुछ लोग फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्टï कर दिया कि अमर सिंह के साथ जो भी हैं, वे हटाए जाएंगे।
दोपहर 12 बजे: सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 187 विधायकों से समर्थन का हस्ताक्षर लिया। इस फैसले से शिवपाल खेमे को संदेश दे दिया गया कि वे ड्राइविंग सीट पर हैं। फिलहाल सपा के 224
विधायक हैं।
दोपहर 1 बजे: शिवपाल यादव सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के घर थे, तभी उनके मंत्री पद से बर्खास्त करने की सूचना आई। शिवपाल ने सारी सरकारी सुविधाएं लौटा दी। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को भी लौटा दिया।
दोपहर 1.30 बजे: अखिलेश यादव ने पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के सामने सुलह की शर्त रखी। इसके मुताबिक अमर सिंह को पार्टी से बाहर निकाला जाए, सभी निष्कासित नेताओं को उन्हीं पदों पर वापस लिया जाए, सीएम पद पर मुलायम सिंह उनके नाम की घोषणा करें, टिकट बंटवारे में उनसे बिना विचार किए किसी नाम पर घोषणा न की जाए, कौमी एकता दल और विवादित नेताओं पर
मुख्यमंत्री के निर्णय पर पार्टी उनका साथ दें।
मुलायम सिंह यादव ने शर्तों को मानने से इनकार कर दिया।
दोपहर 2 बजे: शिवपाल यादव ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने रामगोपाल यादव का नाम लिए बगैर उनपर भाजपा के किसी बड़े नेता से तीन बार मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ अपने ही पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
शाम 3.30 बजे: रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
शाम 4 बजे: शिवपाल यादव ने फिर प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाले जाने की औपचारिक घोषणा की। साथ ही रामगोपाल पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि रामगोपाल के बेटे अक्षय और बहू पर सीबीआई के गंभीर आरोप हैं। सीबीआई से परिवार को बचाने के लिए रामगोपाल भाजपा के इशारे पर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
शाम 5 बजे: रामगोपाल ने कहा कि वे पार्टी में रहे या नहीं, वे अखिलेश यादव का समर्थन करते रहेंगे। थोड़ी देर बाद रामगोपाल ने एक चि_ी जारी कर येे बातें पार्टी के सामने रखी।
शाम 5.30 बजे: मुलायम सिंह यादव ने अपने आवास पर पार्टी सहित दूसरे दलों के बड़े नेताओं को आमंत्रित किया। बैठक में बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने पर
चर्चा हुई।

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