सपा के गढ़ इटावा में ब्रजेश पाठक की जबरदस्त रैली से गदगद हुए अमित शाह

  • बसपा छोडक़र थामा था भाजपा का दामन
  • भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दी शाबाशी, बड़ी जिम्मेदारी देने के भी दिए संकेत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। सपा के गढ़ इटावा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गरजे तो चंद दिनों पहले बसपा छोडक़र भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले पूर्र्व सांसद ब्रजेश पाठक ने भी अपनी ताकत दिखाई। रैली में उमड़े जनसैलाब ने जहां पार्टी अध्यक्ष की निगाहों में पाठक का कद बढ़ाया तो वहीं उनको भाजपा में शामिल करने के पीछे केंद्रीय नेतृत्व की मंशा भी फलीभूत होते दिखी। भीड़ देखकर गदगद हुए शाह ने उनकी पीठ थपथपाकर शाबाशी देने के साथ विधान सभा चुनाव में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का भी संकेत दे गए। इसकी चर्चा प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक हो रही है।
गुरुवार को प्रदेश के इटावा जनपद में आयोजित भाजपा की संकल्प सभा कई संदेश छोड़ गई। संकल्प सभा को संबोधित करने पहुंचे भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जब उमड़े जनसैलाब को देखा तो वे इसका जिम्मा संभाल रहे ब्रजेश पाठक की तारीफ किए बगैर नहीं रह सके। इस सभा में करीब दो लाख लोगों के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे थे। चर्चा है कि अमित शाह को सुनने के लिए इससे भी अधिक लोग पहुंचे थे। इसने ब्रजेश पाठक के कद को न केवल बढ़ाया बल्कि उनकी लोकप्रियता का अहसास भी कराया। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह का गृहनगर होने के कारण इतनी भीेड़ एकत्रित करना किसी चुनौती से कम नहीं था। पाठक ने इस चुनौती को स्वीकार किया और सभा की सफलता के लिए जी जान जुटे। इसके लिए उन्होने स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ बाकायदा टीम वर्क किया। गावं-गलियों की खाक छानी। उनकी मेहनत गुरुवार को सभा में उमड़े जनसैलाब के रूप में सामने आई। इस सभा के जरिए उन्होंने केंद्रीय नेताओं को आश्वस्त किया कि उनको पार्टी में शामिल करने का निर्णय सही था। जिस दावे के साथ वे पार्टी में शामिल हुए उसमें वे शत प्रतिशत खरे उतरेंगे।
सभा की जिम्मेदारी मिलने पर सांसत में थे भाजपाई
सपा के गढ़ में राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह की आयोजित होने वाले इस संकल्प सभा की जिम्मेदारी जब बसपा छोडक़र आए ब्रजेश पाठक को सौंपी गई तो उस वक्त तमाम भाजपाई सकते में आ गए थे। भाजपा सूत्रों की मानें तो उस वक्त अंदरखाने में कुछ पुराने भाजपा नेताओं ने इसका विरोध भी किया था। सभा के सफल होने पर शंका जाहिर की थी।

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