सत्ता में आने के लिए यात्राओं का सहारा लेती रही है भाजपा

  • वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1989 में शुरू की थी रथयात्रा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने के लिए शुरु से ही यात्राओं का सहारा लेती रही है। संघ से अलग होने के बाद देश की राजनीति में मुकाम हासिल करने से लेकर चुनावों में जीत हासिल करने तक पार्टी रथयात्राओं को तरजीह देती रही है। इसी वजह से आज भी रथ यात्रा और परिवर्तन यात्रा के माध्मय से लोगों के संवाद स्थापित करने का भाजपा प्रयास कर रही है। इन यात्राओं के माध्यम से बीजेपी अपनी पहचान बनाने के साथ ही कई बार केंद्र व राज्यों की सत्ता हासिल करने में कामयाब रही। अब उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के पूर्व बीजेपी परिवर्तन यात्रा निकालने की तैयारी में जुट गई है। इस यात्रा का शुभारंभ भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह करेंगे, उनके साथ सरकार के दर्जनों केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहेंगे। वहीं समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूद रहने की संभावना है।
केंद्र व देश के 15 राज्यों में सत्तासीन भाजपा को जनता के बीच अपनी पहचान बनाने लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। तब जाकर वर्तमान समय में अकेले अपने दम पर 11 प्रांतों व चार राज्यों में गठबंधन कर सत्ता पर काबिज होने में सफल हुई है। भाजपा को ये मुकाम हासिल करवाने में समय-समय पर निकाली गर्ई यात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भाजपा की सबसे बड़ी पार्टी बनाने और उसको राजनीति में मजबूती से स्थापित करने वाली यात्रा 25 सितंबर 1989-90 में निकाली गई थी। जबकि 6 अप्रैल 1980 में भाजपा का गठन होने के बाद से कांग्रेस के सामने पार्टी को मजबूती से खड़ा करना पार्टी पदाधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठï नेता लालकृष्ण आडवाणी आगे आए। उन्होंने 25 सितंबर 1989-90 को सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए राम रथयात्रा निकाली। श्री आडवाणी के नेतृत्व में निकली राम रथयात्रा को समस्तीपुर के पास रोक लिया गया। अयोध्या तक यात्रा निकालने की जिद्द पर अड़े आडवाणी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इस यात्रा से पूरे देश में भाजपा के पक्ष में लहर बन गई थी। तब से लेकर आजतक भाजपा के केंद्रीय व प्रांतीय नेतृत्व ने विभिन्न प्रांतो में सैकड़ों यात्राएं निकाली हैं, जिसने भाजपा को देश की राजनीति में मजबूती से खड़ा कर दिया। देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले चुनाव से पूर्व भाजपा एक बार फिर परिवर्तन शंखनाथ यात्रा निकाल रही है, जोकि प्रदेश के चार कोनों सहारनपुर, झांसी, सोनभद्र व बलिया से निकल रही है। इसके पीछे व्यवस्था में परिवर्तन लाने का मकसद बताया
जा रहा है।

जोर-शोर से हो रही यात्रा की तैयारी
प्रदेश के चार कोनों से निकलने वाली परिवर्तन शंखनाथ यात्रा की तैयारी केंद्रीय मंत्रियों व वरिष्ठï भाजपा नेताओं की देख रेख में हो रही है। असम राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को सफलता दिलाने वाले राष्ट्रïीय मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इन परिवर्तन यात्राओं की शुरुआत 5 नवंबर को सहारनपुर, छह नवंबर को झांसी, 8 नवंबर को सोनभद्र और 9 नवंबर को बलिया से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह करेंगे। इस यात्रा का समापन 24 नवंबर को एक साथ लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा। झांसी में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के भी कार्यक्रम में रहने की संभावना है।

देशपे्रम का जज्बा भरने की कोशिश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेना के जवानों के साथ दीपावली मनाने के साथ ही सीमा पर शहीद जवानों के परिजनों के साथ लोगों को दीपावली मनाने का संदेश देकर देशभक्ति की भावना को बढ़ाने की कोशिश की है। नरेंद्र मोदी की अपील के बाद अब पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देश प्रेम का जज्बा भरने का प्रयास कर रहे हैं। पाार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य की अपील पर बहुत से कार्यकर्ताओं ने अपने क्षेत्र के सैनिकों के परिजनों के साथ दीपावली मनाई। इस तरह भाजपा अपनी यात्रा के माध्यम से जनता के बीच जगह बनाने और यूपी में सत्ता हासिल करने की कोशिशों में जुट गई है, लेकिन अन्य राजनीतिक दल भी यात्राओं का सहारा ले रहे हैं। इसलिए भाजपा के लिए यूपी में यात्राओं से जनता का समर्थन हासिल करना आसान नहीं होगा।

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