सडक़ हादसे, मौतें व आधुनिक जीवन शैली

गत वर्ष प्रदेश में हुए सडक़ हादसों में मरने वालों की संख्या 17 हजार 500 को पार कर गई। एक साल में इतने लोगों की मौत बेहद गंभीर मुद्दा है। सवाल यह है कि आखिर इतने सडक़ हादसे क्यों होते हैं? इसकी वजहें क्या है? क्या इन मौतों के आंकड़ों को कम नहीं किया जा सकता? क्या हादसों के पीछे केवल ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है या आधुनिक जीवन शैली भी इसके लिए जिम्मेदार है?

sajnaysharmaउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक दिन में छह लोग असमय काल के गाल में समा गए। इन सभी की मौत सडक़ हादसों की वजह से हुई। कम से कम एक दर्जन से अधिक लोग इन दुर्घटनाओं में घायल हो गए। घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें कई जीवन और मौत के बीच झूल रहे हैं। सडक़ हादसों को लेकर कमोबेश यह स्थिति देश में हर जगह है। लेकिन यूपी में सडक़ हादसों में मौतों का आंकड़ा चौंकाने वाला है। गत वर्ष प्रदेश में हुए सडक़ हादसों में मरने वालों की संख्या 17 हजार 500 को पार कर गई। एक साल में इतने लोगों की मौत बेहद गंभीर मुद्दा है। सवाल यह है कि आखिर इतने सडक़ हादसे क्यों होते हैं? इसकी वजहें क्या है? क्या इन मौतों के आंकड़ों को कम नहीं किया जा सकता? क्या हादसों के पीछे केवल ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है या आधुनिक जीवन शैली भी इसके लिए जिम्मेदार है? हकीकत यह है कि अधिकांश जगहों पर लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं। तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना और टै्रफिक सिग्नल तोडऩा आम बात है। इसके अलावा ट्रैफिक को कंट्रोल करने वाली पुलिस भी कई चौराहों पर नदारद दिखती है। लिहाजा लोग बेतरतीब होकर कभी दाएं और कभी बाएं से गाडिय़ां दौड़ाते हैं। यह स्थिति हादसों को न्योता देती है। कई बार टूटी-फूटी सडक़ें भी हादसों का कारण बनती हैं। ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही के कारण बिना लाइसेंस नाबालिगभी सडक़ों पर फर्राटा भरते दिखते हैं। पढ़े लिखे माता-पिता भी अपने नाबालिग बच्चों को स्कूल और कॉलेज जाने के लिए बाइक और स्कूटी चलाने में कोई गुरेज नहीं करते हैं। बिना प्रशिक्षण और ट्रैफिक नियमों की जानकारी के बिना ये बच्चे सडक़ों पर गाडिय़ां दौड़ाते हैं और कई बार हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा शराब पीकर गाड़ी चलाना भी हादसों की एक वजह है। हाईस्पीड मोटर साइकिलों और तनाव एवं भागदौड़ भरी जीवन शैली भी हादसों की एक वजह बन गई है। हादसों पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि सरकार न केवल ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करे बल्कि लोगों को जागरूक करने के लिए नियमित अंतराल पर अभियान भी चलाए। इसके अलावा दुर्र्घटना जोन में आने वाली सडक़ों को चिह्निïत कर उसके लिए जरूरी बंदोबस्त भी करें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश की सडक़ें रोज खून से लाल होती रहेंगी और लोग असमय मौत के मुंह में समाते रहेंगे।

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