संसद, सरकार और विपक्ष की भूमिका

यदि विपक्ष इस फैसले से हो रही जनता की परेशानियों को सरकार के सामने उठाना चाहता है तो उसे जवाब-सवाल करना चाहिए। इससे आम आदमी भी सरकार के सही रुख को जान सकेगा। वैसे विपक्ष का काम केवल जनता की परेशानियों को सदन में उठाना भर नहीं है, बल्कि समस्या का हल निकालने के लिए सरकार पर दबाव बनाना भी है।

sajnaysharmaनोटबंदी के फैसले पर विपक्ष ने मोदी सरकार को संसद में घेर रखा है। शीतकालीन सत्र की शुरुआत से अभी तक दोनों सदनों में एक दिन भी कायदे से कामकाज नहीं हुआ है। किसी मुद्दे पर गहनता से चर्चा नहीं की गई। विपक्ष कभी प्रधानमंत्री की सदन में मौजूदगी और कभी नोटबंदी पर उनके बयान की मांग कर रहा है। हंगामे के बीच मोदी के बयान ने आग में घी का काम किया है। मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कालाधन रखने वाले इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें अपना कालाधन ठिकाने लगाने का मौका नहीं मिला। बयान पर आगबबूला विपक्ष ने सदन में एक स्वर में मोदी से माफी मांगने की मांग की और दोनों सदनों में हंगामा किया। सवाल यह है कि विपक्ष नोटबंदी पर केवल हंगामे का रास्ता क्यों अपना रहा है?  यदि विपक्ष इस फैसले से हो रही जनता की परेशानियों को सरकार के सामने उठाना चाहता है तो उसे जवाब-सवाल करना चाहिए। इससे आम आदमी भी सरकार के सही रुख को जान सकेगा। वैसे विपक्ष का काम केवल जनता की परेशानियों को सदन में उठाना भर नहीं है, बल्कि समस्या का हल  निकालने के लिए सरकार पर दबाव बनाना भी है। विपक्ष को समझना चाहिए कि केवल आलोचना से समस्या का हल नहीं निकलता। ऐसे मौकों पर सरकार तो हंगामा चाहती ही है ताकि सदन के जरिए वह जनता को जवाब देने से बच सके और इसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ सके। मोदी सरकार के कई मंत्री विपक्ष पर सदन न चलने का ठीकरा फोड़ भी चुके हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक सशक्त विपक्ष की भूमिका अहम होती है। वह न केवल सरकार को निरंकुश होने से रोकता है बल्कि जनता के खिलाफ लिए गए किसी भी फैसले पर सरकार पर दबाव भी बनाता है। सवाल यह भी है कि विपक्ष को चर्चा के दौरान सकारात्मक भूमिका भी निभानी चाहिए। कई बार विपक्ष के सुझाव सरकार के लिए रामबाण साबित होते हैं। सरकार को भी चाहिए कि वह अपनी जिद छोडक़र विपक्ष की मांगों पर विचार करे और चर्चा के लिए जरूरी वातावरण बनाए। लेकिन लोकतंत्र के मंदिर संसद में जो स्थिति दिख रही है वह न तो सरकार और न ही विपक्ष की गंभीरता को दिखाते हैं। हंगामे में जनता की परेशानियां दरकिनार कर दी गई हैं। सरकार और विपक्ष दोनों को समझना चाहिए कि आज जनता को सब कुछ पता चल जाता है। जनता ऐसी किसी सरकार और विपक्ष को माफ नहीं करती जो सदन में चुनकर जाने के बाद न केवल एकतरफा फैसला लेते हैं बल्कि उससे उत्पन्न परेशानियों का हल निकालने की कोशिश भी नहीं करते हैं। 

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