शिवरी प्लांट में उड़ रही हैं पर्यावरण नियमों की धज्जियां निगम के अफसर खेल रहे नोटिस-नोटिस का खेल

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी के बगैर चल रहा प्लांट 

कोर्ट को पेश की जा चुकी है मानकों की अनदेखी की रिपोर्ट
30 नवंबर तक कंपनी को दी गर्ई मोहलत कंपनी को संरक्षण दे रहे हैं अफसर

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद निगम के अफसर सुधरने को तैयार नहीं हैं। इनकी शह पर बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी के शिवरी प्लांट संचालित किया जा रहा है। बोर्ड से एनओसी लिए बगैर यहां कूड़े का निस्तारण धड़ल्ले से किया जा रहा है। प्लांट साइट पर कूड़ा अधिकतम सीमा पार कर चुका है। वहीं, निगम के अफसर नोटिस-नोटिस का खेल खेल रहे हैं।
शिवरी प्लांट के संचालन के लिए जिम्मेदार निजी कंपनी के अलावा जल निगम और नगर निगम के अधिकारी भी पर्यावरण सुरक्षा के लिए चिंतित नहीं है। हाईकोर्ट की दखल के बावजूद यहां जरूरी मानक पूरे नहीं किए गए हैं। यहां मिट्टी व पानी के नमूनों की नियमित जांच के लिए लैब बनाई गई है। इस लैब में प्लांट के ईटीपी से निकलने वाले पानी की जांच करने के बाद ही छोडऩे के निर्देश हैं। इसके अलावा प्लांट पर कूड़े का पहाड़ खड़ा हो चुका है जबकि यहां अधिकतम शेड की ऊंचाई तक ही कूड़ा रखने की अनुमति है। लेकिन जल निगम और नगर निगम के अधिकारियों को इसकी परवाह नहीं है। वे इन निर्देशों का पालन नहीं करा पा रहे हैं। दरअसल, निगम अधिकारियों की साठ-गांठ से ही अब तक निजी कंपनी बचती चली आ रही है। अधिकारियों की ओर से लगातार कंपनी को संरक्षण मिल रहा है और इतनी गलतियों के बाद भी कंपनी को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया जाता है। चेतावनी और नोटिस का खेल कई महीनों चला आ रहा है, जिसका नतीजा है कि करोड़ों के खर्च के बाद भी शहर में गंदगी व्याप्त हैं। तमाम अनियमताओं के बावजूद कंपनी से अब तक काम कराया जा रहा है। पिछले दिनों प्लांट पर टीम की निरीक्षण की जानकारी पहले से कंपनी को हो गई थी। नतीजा कंपनी ने सब कुछ ठीक ठाक कर लिया। उस समय शिवरी स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को पूरी क्षमता से न चलाये जाने की कई बार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद नगर निगम की टीम ने निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्लांट की चार यूनिट चलती पाई गई थी। यहीं नहीं सैकड़ों ट्रक कूड़ा डंप था वह भी कम मिला। एक बार फिर कंपनी के कार्य की जांच के लिए संयुक्त टीम सोमवार को शिवरी प्लांट जाएगी। पहले से ही निजी कंपनी को इसकी जानकारी है और वह इस बार फिर कार्यों को दुरुस्त कराके साफ बच निकलेगी। यह खेल सालों से चल रहा है।

प्लांट की हालत बदतर

उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक प्लांट की हालत बदतर है। यहां पर्यावरण सुरक्षा की न्यूनतम शर्तें भी नहीं पूरी की गई हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर संयुक्त टीम सर्वे करने के लिए जाएगी। यह टीम यूपीपीसीबी अधिकारियों के साथ पर्यावरण सुरक्षा के बंदोबस्त को देखेगी। यूपीपीसीबी अधिकारी इससे पहले स्पेशल कोर्ट व हाई कोर्ट को शिवरी प्लांट की स्पेशल रिपोर्ट दे चुके हैं।

बिजली न मिलने का रोना रो रही है कंपनी

ज्योति कंपनी के अधिकारी पर्याप्त बिजली व्यवस्था न मिलने का रोना रो रहे हैं। वर्तमान में प्लांट को जनरेटर से चलाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था द्वारा अभी शहरी फीडर से बिजली को नहीं जोड़ा गया है। इसलिए यहां विद्युत आपूर्ति दस से बारह घंटे ही होती है। नियमानुसार ज्योति इन्वॉयरोटेक को नियमित रूप से तेरह सौ टन कूड़ा प्रोसेस करना है। बिजली न मिलने से यह टारगेट आधा भी नहीं हो पाता है जबकि जनरेटर भी 30 नवंबर के बाद चल पाएगा या नहीं इस पर भी सवाल खड़ा होता है क्योंकि एजेंसी को अपना प्लांट पूरी क्षमता से चलाने के लिए अंतिम तिथि 30 नवंबर दी गई है।

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