शायद लोगों की दुआओं से बची सहगल की जिंदगी…

  • हर किसी की मदद को हमेशा तैयार रहते हैं सहगल
  • सहगल के चाहने वाले कर रहे उनके जल्द ठीक होने की दुआ

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। नवनीत सहगल का जिस तरह एक्सीडेंट हुआ और उसमें जिस तरह वो बचे यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। स्पॉट पर कई चक्कर लगाने के बाद गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी। सहगल को नजदीक से जानने वाले लोगों का कहना था कि यह उन गरीब लोगों की दुआओं का असर है, जिनकी मदद को सहगल हमेशा तैयार रहते थे। शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा, जिसने सहगल से अपने काम को कहा होगा और सहगल ने उसको मना किया होगा। बेहद ऊर्जा से भरे रहने वाले इस अफसर की तेजी को देखकर विरोधी भी उनके कायल रहते हैं। आज सहगल को गुडग़ांव के मेदांता अस्पताल में एयर लिफ्ट कर ले जाया गया। अभी भी उनकी हालत बहुत बेेहतर नहीं है। जिस एक्सप्रेस वे का दो दिन बाद उद्ïघाटन है, वो शायद सहगल की मेहनत के कारण ही रिकार्ड टाइम में तैयार हुआ और यह देश का सबसे तेजी से बनने वाला पहला एक्सप्रेस वे है, जिसके लिये जमीन अधिग्रहण करने को किसी किसान ने विरोध नहीं किया।

कल जैसे ही सहगल के एक्सीडेंट की खबर लोगों को पता चली सभी लोग सन्न रह गये। हर किसी के मुंह से निकला यह बहुत बुरा हुआ, सहगल तो सबके लिये हर समय तैयार रहते थे। कई लोगों ने कहा, चुनाव से पहले सहगल का एक्सीडेंट सरकार को भी नुकसान पहुंचा देगा क्योंकि पूरे देश की मीडिया सहगल संभाले हुए थे। दो दिन वाद होने वाले एक्सप्रेस वे के उद्घाटन की सहगल ने बहुत व्यापक तैयारी की थी। पूरी दुनिया के मीडिया के लोग इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन पर आने वाले थे। अचानक हुए इस हादसे ने नौकरशाही से लेकर सरकार तक में हडक़म्प मचा दिया। यह एक्सप्रेस वे सरकार के लिये अब तक का सबसे महत्वपूर्ण काम था। लिहाजा इसके उद्घाटन की कमान तेजतर्रार अधिकारी और लखनऊ के कमिश्नर भुवनेश कुमार को सौंपी गयी है। खुद सीएम अखिलेश यादव ट्रामा सेंटर सहगल को देखने गये और बाद मे गुडग़ांव में भी उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था की। सहगल की कार के चालक भी गंभीर रुप से घायल हो गये हैं। उनके इलाज की भी बेहतर व्यवस्था करायी गयी।
नवनीत सहगल निजी जि़ंदगी में बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के है । प्रदेश के कई मंदिरों की कायाकल्प कराने मे उनका बड़ा योगदान रहा है। समाजवादी श्रवण यात्रा शुरू कराकर उन्होंने लाखों बुज़ुर्ग गऱीबों को तीर्थ यात्रा करवायी। लोगों ने कहा शायद इन्हीं बुज़ुर्गों का आशीर्वाद रहा होगा कि सहगल को नयी जिंदगी मिल गयी। सहगल को नजदीक से जानने वाले लोगों का कहना है कि सहगल अपने दिन की शुरुआत सुवह छह बजे से करते है। नौ बजे तक सिर्फ पूजा और गऱीब लोगों की मदद करना उनकी दिनचर्या मे शामिल रहता है। किसी ने भी देर रात तक सहगल के चेहरे पर तनाव नहीं देखा। हर समय मुस्कुराने वाले इस अफसर की ताजगी और सकारात्मक ऊर्जा का ही नतीजा है कि हर राजनैतिक पार्टी और सामाजिक संगठनों में उनके चाहने वाले लोगों की कमी नहीं है। इसलिए लोग दुआ कर रहे हैं कि उनका चाहने वाला यह अफसर जल्दी ही ठीक होकर उनके पास वापस आ जाये।

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