विधानसभा चुनाव में नए चेहरों पर दांव लगाएगी भारतीय जनता पार्टी

  • प्रत्याशी चयन में सिफारिश के बजाय मानक पूरा करने वालों को दी जाएगी तरजीह
  • अन्य दलों से आए नेताओं की मजबूती व काडर के साथ तालमेल का भी होगा आकलन

सुनील शर्मा
captureलखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव में मुंह की खा चुकी भाजपा इस बार प्रत्याशियों के चयन को लेकर काफी संजीदा दिख रही है। 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी नए चेहरों पर दांव लगायेगी। पार्टी 403 विधानसभा में आधे से अधिक सीटों पर नए चेहरों को प्रत्याशी बनाएगी। दस प्रतिशत स्थानों पर महिलाओं को टिकट देने की रणनीति तैयार की गई है। इसके अलावा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर और युवाओं को तरजीह देने का भी निर्णय लिया गया है। चुनावों के दौरान विधानसभा सीटों का टिकट तय करने में संभावित उम्मीदवार के विभिन्न सोशल साइटों पर पार्टी व राजनीतिक मुद्दों पर सक्रियता का भी ध्यान दिया जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व ने किसी बड़े नेता की सिफारिश के बजाय चयन मापदंडों पर खरा उतरने वालों को ही टिकट देने का निर्णय लिया है। इसलिए टिकट की चाहत में ही सही बहुत से पार्टी नेताओं की जनता के बीच और सोशल मीडिया में भी सक्रियता बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश के 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन में हुई गलती का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा था। अधिकांश स्थानों पर पार्टी के बड़े नेताओं की सिफारिश या उनकी जिद्द से टिकट हासिल करने वाले लगभग सभी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए पार्टी ने 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में इससे तौबा कर लिया है। सिफारिश पर टिकट देने के बजाय चयन के लिए निर्धारित मापदंडों को आधार बनाकर सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा पार्टी के रणनीतिकारों ने इस बार आधे से अधिक सीटों पर नए व युवा चेहरे उतारने का फैसला किया है। इस बात की भी चर्चा है कि मौजूदा विधायकों के टिकट बरकरार रह सकते हैं। लेकिन पिछली बार हार चुके प्रत्याशियों को नहीं दोहराया जाएगा। पार्टी में दूसरे दलों से आए नेताओं की मजबूती व अपने काडर के साथ उनके तालमेल का भी आकलन किया जा रहा है। पार्टी टिकट देने के लिए जातीय समीकरण का भी विशेष ध्यान रखेगी। पार्टी लगभग दस प्रतिशत महिलाओं को भी टिकट देगी। टिकट तय करने में संभावित उम्मीदवार के विभिन्न सोशल साइट पर पार्टी व राजनीतिक मुद्दों पर सक्रियता पर भी ध्यान दिया जाएगा।

जमानत जब्त कराने वालों को नहीं मिलेगा टिकट

भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में जमानत जब्त कराने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा जमानत बचाने के बावजूद चुनाव हारने वाले कई उम्मीदवारों के टिकट भी बदले जाएंगे। पार्टी के प्रमुख नेताओं के बेटे-बेटियों को टिकट देने में भी पार्टी सख्ती से फैसला लेगी। उन्हें भी पार्टी के लिए तय किए गए मानक की कसौटी पर अपने को खरा सिद्घ करना होगा। इसके बाद ही उनकी उम्मीदवारी पर विचार होगा।

2012 में 229 प्रत्याशियों की जमानत हुई थी जब्त

भाजपा को 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में करारा झटका लगा था। इस चुनाव में भाजपा ने राज्य की 403 विधानसभा सीटों में 398 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें उसे मात्र 47 सीटों पर ही जीत मिली थी। 351 स्थानों पर पार्टी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी को सबसे ज्यादा झटका उसके 229 उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने से लगा था। इसमें आधे से अधिक बड़े नेताओं की सिफारिश या फिर उनकी जिद की वजह से टिकट पाए थे। इस वजह से पार्टी को इस शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा था। इस बार नेताओं की सिफारिश नहीं चलेगी। चयन मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही टिकट तय किए जाएंगे।

टिकट पाने के लिए पूरे करने होंगे तय मानक

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट हासिल करने के लिए प्रत्याशियों को तय मानक पूरे करने होंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक टिकट तय करने के लिए पांच प्रमुख मानक तय किए गए हैं। इनमें जीतने की संभावना, सामाजिक व निजी पृष्ठभूमि, पार्टी के प्रति निष्ठा, युवा, प्रभावी नेतृत्व व सामाजिक और जातीय समीकरणों की अनुकूलता शामिल हैं। पार्टी अपने उम्मीदवारों के चयन का काम परिवर्तन यात्राओं के पूरा होने के बाद दिसंबर के आखिरी सप्ताह से शुरू करेगी। बताया जा रहा है कि इन यात्राओं के माध्यम से भी संभावित प्रत्याशियों की सामाजिक लोकप्रियता व क्षेत्रीय जातीय समीकरण को भी ध्यान दिया जाएगा।

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