लेसा को अपनों ने ही डुबोया

  • सरकारी आवासों में रहने वाले कर्मियों ने नहीं जमा किए दस करोड़ रुपए का बिजली बिल
  • स्थानांतरण के बाद बकाया बिल जमा किए बगैर तैनाती स्थल को चले गए अधिकारी व कर्मचारी

सुनील शर्मा
captureलखनऊ। राजधानी में विद्युत आपूर्ति करने का जिम्मा संभालने वाले लेसा को डुबोने में अपनों ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। स्थानांतरण होने के बाद सैकड़ों अधिकारी व कर्मचारी सरकारी आवासों का बकाया बिल जमा किए बगैर ही नए तैनाती स्थल के लिए चलते बने। आलम यह है कि बीते तीन साल में यह बकाया दस करोड़ रुपए के ऊपर पहुंच गया है। इसे वसूलने के लिए महकमे को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं।
बिजली महकमे ने शहर में तैनाती के समय अधिकारियों व कर्मचारियों को रहने के लिए 53 आवासीय कालोनियां बनाई है। इसमें रहने वाले अधिकारी व कर्मचारी आवास आवंटित होने के बाद अलाटमेंट के आधार पर महकमे से पोस्टपेड बिजली कनेक्शन ले लेते थे, जोकि अपनी तैनाती के दौरान बिजली का भरपूर उपयोग करते रहे। सरकारी आवासों में रहने के दौरान सैकड़ों अधिकारियों व कर्मचारियों ने बिजली का उपयोग तो किया लेकिन विभाग को बिल नहीं अदा किया। जिनका बाद में कहीं और के लिए तबादला हो गया। स्थानांतरित होने के बाद ये अधिकारी व कर्मी अपना सामान उठाकर तैनाती स्थल के लिए चले गए। उन्होंने जाने से पहले बकाया बिजली बिल जमा करना मुनासिब भी नहीं समझा। कई कर्मचारी तो आवासों में लगे उपकरण भी खोल ले गए। शुरुआती दौर में विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया। विभागीय अधिकारियों का जब इस ओर ध्यान गया तब तक बकाया का आंकड़ा लाखों से होते हुए करोड़ों में पहुंच चुका था। तीन साल के अंदर ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों का बकाया बिजली बिल दस करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया। इसे वसूलने के लिए लेसा ने बहुत प्रयास किए, लेकिन ये निरर्थक ही साबित हुए हैं।

बकाया कालोनियों का विवरण

शहर में तैनाती के दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने के लिए सरकारी विभागों की बटलर पैलेस, इंदिरानगर ए ब्लाक मुंशी पुलिया, बटलर पैलेस, ऐशबाग पीली कालोनी, मोती झील कालोनी, लाप्लास, टिकैतराय, डालीबाग, केंद्रांचल, अलीगंज में बनी सरकारी कालोनियों में सबसे अधिक बकाया है। लेसा ने अब सरकारी कालोनियों में पोस्टपेड बिजली कनेक्शन न देने का निर्र्णय लिया है। इसकी पुष्टिï करते हुए लेसा के मुख्य अभियंता आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया है कि सरकारी कालोनियों में अब प्रीपेड कनेक्शन दिए जाएंगे।

प्रीपेड बिजली कनेक्शन का प्रारूप

सरकारी आवासों में एक किलोवाट का कनेक्शन लेने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रीपेड मीटर के लिए छह हजार रुपए जमा करने होंगे। संबंधित उपखंड में जाकर आवास आवंटन का पत्र लगाकर आवेदन करना होगा। आवेदन के दो दिन के अंदर बिजली कर्मचारी सरकारी आवास पर जाकर मीटर लगाएंगे। यानी की सरकारी आवासों में रहने वाले अधिकारी कर्मचारी जितने का रिचार्ज कराएंगे उतनी ही बिजली पाएंगे। इससे विभाग पर बकाया का बोझ नहीं बढ़ेगा।

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