लेखा परीक्षा की परीक्षा में एलडीए फेल अवैध निर्माण पर नहीं कस सका शिकंजा

  • ऑडिट रिपोर्ट से हुआ खुलासा, साल भर में केवल 76 लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई

अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। अवैध निर्माणों पर शिकंजा कसने के मामले में एलडीए लेखा परीक्षा की परीक्षा में फेल हो गया है। ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि चालू वित्तीय वर्ष में एलडीए के अफसरों ने अवैध निर्माण को लेकर महज 76 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। लेखा परीक्षा की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार एलडीए की यह कार्य प्रणाली सही नहीं है। रिपोर्ट में हैरत जताई गई है कि राजधानी में एक ओर भवन निर्माण के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है तो दूसरी ओर एलडीए के अधिकारी ऐसा करने वालों के खिलाफ अपनी सक्रियता भी नहीं दिखा पा रहे हैं। तेजी से कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
भवन निर्माण संबंधी मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एलडीए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस वजह से शहर में अवैध निर्माणों की बाढ़ सी आ गयी है। जिन अधिकारियों पर इसकी जिम्मेदारी है, वह मानकों का उल्लंघन करने वालों से मिलकर अपनी जेबें गर्म करने में लगे हुए हैं। एलडीए में प्रवर्तन अधिकारी अवैध निर्माण करने वालों के साथ साठ गांठ करने में व्यस्त हैं, जबकि मानकों को ताक पर रखकर कराए जा रहे निर्माण के संबंध में लोगों की तरफ से विभाग में लगातार शिकायतें आती रहती हैं। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है।

शासन के निर्देश पर भी नहीं हुई जांच

अवैध निर्माण की जांच के लिए शासन ने आवास विकास को जिम्मेदारी दी थी। लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्रवाई न करने पर शासन ने यह कदम उठाया था। जांच में एलडीए के सहयोग न देने से जांच प्रक्रिया अधूरी है जबकि आवास विकास ने पत्रावलियां न दिए जाने पर एफआईआर कराए जाने की नोटिस भेजने के बाद कुछ नहीं किया। यह हाल तब है जबकि खुद मुख्यमंत्री ने आवास विभाग के उच्च अधिकारियों को तलब कर इस मामले की स्पष्ट जांच करने का आदेश दिया था, लेकिन बनाई गई कमेटी को सीएम के निर्देशों का भी शायद डर नहीं है।

नियमों को रखा जाता है ताक पर

शहर में भवन निर्माण एवं उपविधि के विपरीत निर्माण होने की सूचना मिलने पर प्रवर्तन अनुभाग सक्रिय हो जाता है। वह घटना स्थल का निरीक्षण कर कार्रवाई करता है, लेकिन शहर में ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो रहा है। यहां मानकों का पालन कराने संबंधी अधिनियमों का पालन भी नहीं हो पा रहा है, जबकि मानकों का उल्लंघन होने पर प्राधिकरण ऐसे निर्माण कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करता है। साथ ही शासनादेश के मुताबिक ऐसे अवैध निर्माणों को प्रारंभिक चरण में ही हटा दिया जाना चाहिए। इसके लिए दोषी अधिकारियों को जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

प्रवर्तन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

शहर में अवैध निर्माणों को लेकर लेखा परीक्षा की रिपोर्ट में प्रवर्तन अनुभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। अनाधिकृत निर्माण से शमन शुल्क के लक्ष्य को भी नहीं पूरा किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष के लेखा परीक्षा की ऑडिट रिपोर्ट में अनाधिकृत निर्माण के विरूद्घ कार्रवाई करने में प्राधिकरण को विफल बताया गया है। प्राधिकरण ने अक्टूबर 2009 से मार्च 2015 तक 4,695 अवैध निर्माण चिन्हित किए थे। इसमें से 2,838 शमनीय व 1,857 ध्वस्त किए जाने थे। इनमें से 12 प्रतिशत निर्माणों को शमन शुल्क लेकर अनुमति दे दी गई। बाकी के अवैध निर्माणों के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं इसके लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2016-17 में ट्रांसगोमती में अब तक सिर्फ 48 भवनों को ही चिन्हित कर सील किया गया। वहीं, सिस गोमती में इस वित्तीय वर्ष में अब तक सिर्फ 28 अवैध निर्माणों के खिलाफ ही कार्रवाई की गई। प्राधिकरण का प्रवर्तन अनुभाग अनाधिकृत निर्माण व अतिक्रमण पर अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए उत्तरदायी है।

अवैध निर्माण की रोकथाम के लिए बनाई गई है टीम

शहर में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माणों के लिए नई टीम का गठन किया गया है। जल्द ही अवैध निर्माणों को चिन्हित करके अभियान चलाया जाएगा।
डॉ. अनूप यादव
उपाध्यक्ष, एलडीए

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