लाइसेंस न मानक, धड़ल्ले से हो रही धन उगाही

  • मीट की दुकानों पर अफसर मस्त, जनता त्रस्त
  • गंदगी से क्षेत्रीय लोगों का निकलना हुआ दूभर

अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। शहर में हर तरफ अवैध रूप से चल रही मीट की दुकानों पर लगाम लगाने में नगर निगम प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। वहीं मीट की दुकानों से निकलने वाली गंदगी से क्षेत्रीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ऐसे में नगर निगम के अधिकारी जनता की शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय इसका ठीकरा पुलिस प्रशासन पर फोडक़र अपना पल्ला झाड़ रहा है। नगर निगम अधिकारियों की मानें तो अभियान चलाकर इन अवैध दुकानदारों को हटवाया जाता है, लेकिन पुलिस की शह पर फिर से दुकानें लग जाती हैं। इसलिए इसके लिए हकीकत में पुलिस ही जिम्मेदार है।
जानकीपुरम क्षेत्र में टेढ़ी पुलिया चौराहे के पास और साठ फिटा रोड के बगल में धड़ल्ले से मीट की दुकानें चल रही हैं। इनमें से अधिकांश दुकानों के पास लाइसेंस नहीं है। इन दुकानों की जांच करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि क्षेत्रीय लोगों के बार-बार प्रदर्शन करने के बाद कुछ महीने पहले यहां से दुकानों को हटवाया गया था। लेकिन स्थिति जस की तस को गई है। बिना लाइसेंस और मानकों के विपरीत चलने वाली इन दुकानों ने क्षेत्रवासियों का रहना दुश्वार कर दिया है।

कार्रवाई के नाम पर होती खानापूर्ति

क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों के अधिकारी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करके चले जाते हैं। इसके कुछ ही दिनों बाद दुकानें फिर से खुल जाती हैं। जानकीपुरम के अवधेश मिश्रा बताते हैं कि क्षेत्र में बिना लाइसेंस के दर्जनों दुकानें चल रही हैं। सडक़ किनारे कब्जा करके मीट और मछली बेचने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसमें क्षेत्रीय पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत है। इसलिए मानकों को ताक पर रखकर दुकानें चल रही हैं।

दुकानों पर टकराते हैं जाम, तो कैसे हो कार्रवाई

क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई क्या खाक होगी, जब जिम्मेदार ही इनसे मिले हुए हैं। रोजाना शाम को थाने के कुछ सिपाही और थानेदार क्षेत्र के दबंग लोगों के साथ मीट की अवैध दुकानों पर जमावड़ा लगाते हैं। यहां दारू की बोतलें खुलती हैं। आधा दर्जन लोग पुलिस वालों की मौजूदगी में चखना, रोस्टेड चिकन और मटन के साथ जाम पर जाम लड़ाते हैं। इससे उन दुकानदारों की हौसले और बुलंद हो गये हैं। क्षेत्रीय निवासी अवधेश ने बताया कि कभी दबाव पडऩे पर नगर-निगम अधिकारी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करते हुए इन्हें हटवाते हैं, लेकिन जिम्मेदारों से साठ-गांठ के चलते यह पुन: स्थापित हो जाती हैं।

माननीयों से गुहार लगाने से भी नहीं हुआ कुछ हासिल

ऐसा नहीं है कि अवैध दुकानों को हटाने को लेकर क्षेत्रीय लोगों ने दौड़-भाग नहीं की। लोगों ने दुकानदारों को हटवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। हद तो तब हो गई, इसे हटाने को लेकर महापौर से लेकर क्षेत्रीय विधायक तक को पत्र लिखकर मांग की गई लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात साबित हुआ।

कई बार चल चुका अभियान

नगर निगम पशु चिकित्सा अधिकारी अरविंद रॉव ने बताया कि कई बार यहां अभियान चलाकर दुकानें हटवाई गई हैं। क्षेत्रीय थाने को पुलिस को इस ओर ध्यान देना चाहिए। लेकिन पुलिस वाले रुचि नहीं ले रहे हैं, इसलिए दुबारा ऐसा हो रहा है। नगर निगम की ओर से बीते मई माह में अभियान चलाकर कार्रवाई की गई थी। यदि यह पुन: स्थापित हो गई हैं, तो जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रवासियों का राह चलना मुश्किल

मीट की दुकानों से निकलने वाली गंदगी सडक़ों के किनारे फेंक दी जाती है। इसको लेकर क्षेत्रीय लोग दुकानदारों को कई बार टोक चुके हैं लेकिन उस पर कोई असर नहीं हो रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रोड के किनारे मीट की दुकानें खुलने और सडक़ों पर मीट के टुकड़े व गंदगी फेंके जाने की वजह से काफी बदबू आती है। लोगों को मजबूरी में निकलना पड़ता है। वहीं बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। मीट की दुकानों से निकलने वाले कचरे की वजह से मच्छर, मक्खी और मवेशियों का जमावड़ा रहता है। इसलिए लोगों का राह चलना भी मुश्किल हो जाता है। इस समस्या के संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से लिखित शिकायत की जा चुकी है। स्थानीय पुलिस से भी शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई भी मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई नहीं कर रहा है।

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